Allahabad High Court : अधिवक्ता कल्याण निधि की धनराशि दिए जाने का हलफनामा तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिवक्ता कल्याण निधि की धनराशि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को देने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने निर्देश का अनुपालन किए जाने का हलफनामा अगली सुनवाई पर तलब किया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिवक्ता कल्याण निधि की धनराशि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को देने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने निर्देश का अनुपालन किए जाने का हलफनामा अगली सुनवाई पर तलब किया है। अब इस मामले में 15 मार्च को सुनवाई होगी। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति एसडी सिंह ने अधिवक्ता सुनीता शर्मा, अधिवक्ता पूजा मिश्रा की ओर से दाखिल जनहित याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
याचियों के अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव और प्रियंका श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन मधुसूदन त्रिपाठी के प्रतिनिधि मंडल ने सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर अधिवक्ता कल्याण निधि के तीन अरब, 54 करोड़, सात लाख, 91 हजार रुपये से अधिक धनराशि दिए जाने की मांग की थी। जिससे प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए पांच लाख रुपये तक का मुफ्त चिकित्सा बीमा, मृतक अधिवक्ताओं के लंबित दावों का यथाशीघ्र भुगतान, अधिवक्ता चैंबर निर्माण, अधिवक्ता पेंशन दी जा सके। लेकिन, सरकार ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। दूसरी ओर सरकारी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इसी तरह की याचिका एक दूसरी खंडपीठ के समक्ष लंबित है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सरकार अधिवक्ता कल्याण निधि की धनराशि मुहैया कराए और इसका हलफनामा अगली सुनवाई पर दाखिल करें।
मॉडल बाईलॉज से चुनाव कराने के संबंध में फैसला सुरक्षित
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश की सभी बार एसोसिएशन को मॉडल बाईलॉज ऑफ बार काउंसिल के प्रावधानों के अंतर्गत चुनाव कराने के संबंध में बुधवार को सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया। अधिवक्ता सुनीता शर्मा और अधिवक्ता पूजा मिश्रा की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर एवं न्यायमूर्ति एसडी सिंह की खंडपीठ कर रही थी।
याचियों के अधिवक्ता प्रियंका श्रीवास्तव ने कहा कि मॉडल बाईलॉज बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा अनुमोदित है। इसमें चुनाव से संबंधित सभी प्रक्रियाओं का प्रावधान किया गया है। लेकिन, अभी बहुत से एसोसिएशन हैं, जो कि न तो रजिस्ट्रार सोसाइटी से रजिस्टर्ड हैं और न ही बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से संबद्ध हैं। ऐसे एसोसिएशन बगैर चुनाव कराए अवैध रूप से बार एसोसिएशन के विभिन्न पदों पर कब्जा जमाए हुए हैं। इसलिए बार एसोसिएशन जैसे सम्मानित संस्था मॉडल बाईलॉज के प्रावधानों के अंतर्गत कराए जाने का आश्वासन बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को दे, अन्यथा उनके खिलाफ आवश्यक कार्यवाही करें। बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से एसके तिवारी, उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की ओर से वरिष्ठï अधिवक्ता ओपी सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पांडेय ने बहस की। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया।