Akhara Parishad : अखाड़ों में बिछी सियासी चौसर, पंच निर्मोही में तख्ता पलटने की चाल
हाल में ही अखाड़ा परिषद की बैठक में दूसरे धड़े के महामंत्री के तौर पर पूर्व अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि और महंत ज्ञानदास पर अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार और लूटखसोट का आरोप लगाने वाले निर्मोही अखाड़े के सचिव महंत राजेंद्र दास से अब महाकुंभ की जिम्मेदारी छिनने के आसार हैं।
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के दोनों धड़ों के बीच मचे घमासान के बीच पंच निर्मोही अखाड़े में तख्ता पलट की नई बिसात बिछ गई है। सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ अखाड़ा परिषद,आचार्यबाड़ा, दंडीबाड़ा की बैठक के दौरान परिषद के पूर्व अध्यक्षों पर भ्रष्टाचार और लूटखसोट, धन उगाही का आरोप लगाने वाले पंच निर्मोही अखाड़े के सचिव राजेंद्र दास की घेराबंदी तेज हो गई है। इस बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य और सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट में पक्षकार रहे अखिल भारतीय श्री पंच रामानंदीय निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने महंत रवींद्र पुरी (निरंजनी) को अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष मानते हुए अपना समर्थन पत्र सौंप दिया है।
इसी के साथ पंच निर्मोही अखाड़े की ओर से महाकुंभ की जिम्मेदारी संभालने के लिए नए चेहरे की तलाश शुरू हो गई है। अखिल भारतीय श्री पंच रामानंदीय निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास की ओर से अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी (सचिव निरंजनी) और महामंत्री महंत हरि गिरि( संरक्षक जूना अखाड़ा) के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त किया गया है।
उन्होंने पत्र में लिखा है कि वह बिना किसी जोर-दबाव के पहले से गठित महंत रवींद्र पुरी के नेतृत्व वाले अखाड़ा परिषद में पूर्ण रूपेण विश्वास व्यक्त कर रहे हैं। महाकुंभ मेला की तैयारी बैठकों और संचालन के अलावा अन्य नीतिगत निर्णयों के लिए उन्होंने अखाड़ा परिषद में प्रतिनिधित्व के लिए दो नामों का प्रस्ताव भी किया है। इसमें एक वह खुद होंगे और दूसरे सत्येंद्र दास को नामित किया जा सकता है।
सत्येंद्र दास पंच निर्मोही अखाड़े के अयोध्या में पुजारी हैं। पंच निर्मोही अखाड़े की ओर से अखाड़ा परिषद को जारी किए गए इस समर्थन पत्र के बाद महाकुंभ के लिए इस अखाड़े में नए नाम के चयन की चर्चा शुरू हो गई है। कहा जा रहा है कि 12 वर्ष के बाद महाकुंभ में अखाड़ों में नेतृत्व बदलने की परंपरा है।
हाल में ही अखाड़ा परिषद की बैठक में दूसरे धड़े के महामंत्री के तौर पर पूर्व अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि और महंत ज्ञानदास पर अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार और लूटखसोट का आरोप लगाने वाले निर्मोही अखाड़े के सचिव महंत राजेंद्र दास से अब महाकुंभ की जिम्मेदारी छिनने के आसार हैं।
पंच दशनाम जूना अखाड़ा के संरक्षक और अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि का कहना है कि रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सदस्य महंत दिनेंद्र दास और सत्येंद्र दास ही निर्मोही अखाड़े के मुख्य कर्ताधर्ता हैं। उनकी संस्तुति पर ही अखाड़ा परिषद की ओर से निर्मोही अखाड़े में महाकुंभ का दायित्व तय किया जाएगा। इस प्रकरण पर महंत राजेंद्र दास से संपर्क किया गया, लेकिन उनका फोन नहीं उठा।
महाकुंभ की बैठकों में आगे बैठने को लेकर अखाड़ा परिषद के दोनों धड़ों में खींचतान
महाकुंभ की बैठकों में पहली कतार में बैठने के लिए अखाड़ा परिषद के दोनों धड़ों के बीच खींचतान मची हुई है। इस बार सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ परेड मैदान में हुई बैठक के दौरान खुद को अखाड़ा परिषद का निर्वाचित अध्यक्ष बताने वाले महानिर्वाणी
अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी और महामंत्री राजेंद्र दास को मेला प्रशासन ने पहली कतार में जगह दे दी थी। इस पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्रपुरी(निरंजनी) ने खुलकर विरोध दर्ज कराया था। अखड़ा परिषद के अध्यक्ष के तौर पर निरंजनी के सचिव महंत रवींद्र पुरी का कहना था कि बहुमत उनके साथ है और असली अध्यक्ष वह हैं। ऐसे में आगे बैठने का अधिकार उन्हीं का है। इस पर मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने उन्हें समझा बुझा कर शांत कराया। मेलाधिकारी ने उनको भरोसा दिलाया कि इस बार कुर्सी से उठाने पर सीएम की बैठक में विवाद खड़ा हो सकता है। ऐसे में अगली बैठक में वह उन्हें ही पहला स्थान देंगे। तब जाकर किसी तरह मामला शांत हो सका।