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चौराहे-चौराहे जली होलिका

Mon, 13 Mar 2017 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 13 Mar 2017 12:18 AM IST
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Crossroads
होली महोत्सव
होली की पूर्व संध्या पर रविवार को शहर के विभिन्न गली-मोहल्लों के चौराहों पर परंपरागत रूप से होलिका जलाई गई। निर्धारित मुहूर्त के मुताबिक लोग होलिकास्थल के इर्द-गिर्द जुटे और फिर क्षेत्र के किसी बड़े बुजुर्ग या संबंधित कमेटी के मुखिया ने ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होलिका में आग लगाई। आग लगते ही होलियारों की टोली ने ‘होली है, होली है’ कहकर होलिका को प्रणाम किया। होलिका के चारों ओर चक्कर लगाकर पूजा की।
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परंपरा के मुताबिक माघी पूर्णिमा के बाद से ही चौराहों पर लकड़ियां जमा करने का सिलसिला शुरू हो गया था। कई जगहों पर होलिका की मिट्टी की मूर्ति भी रखी गई थी। मीरापुर, शास्त्रीनगर, करेला बाग, जल संस्थान वाली गली, बलुआघाट, अल्लापुर, मम्फोर्डगंज, दारागंज, हाईकोर्ट हनुमान मंदिर, प्रीतमनगर, कीडगंज, सुलेमसराय, तेलियरगंज, सदर बाजार, राजापुर, राजरूपपुर सहित शहर के तमाम मोहल्लों के चौराहों पर होलिका के करीब देर रात तक जमावड़ा रहा।
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होलिका दहन स्थल पर ही लोग एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर गले मिले और पर्व की शुभकामनाएं दीं। कहीं-कहीं ठंडई और गुझिया का भी इंतजाम किया गया था। कई जगहों पर जुटे लोगों ने फगुआ संग होली गीत गाए गए। तकरीबन हर होलिका स्थल के करीब होलियारों की ओर से लाउडस्पीकरों या स्पीकरों की पूरी फौज जुटाई गई थी, जहां से होली के नए-पुराने परंपरागत गीत खूब बजे जिस पर होलियारों की टोली जमकर डांस करती रही। कई जगहों पर विविधतापूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।
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परंपरागत रूप से चने की डालियां, जौ की बालियां और गोबर से बना हुआ बल्ला होलिका को समर्पित किया गया। इससे पहले घर के सभी सदस्यों को उबटन लगाया गया, जिस छुड़ाने के बाद बचे हुए की पिंडियां बनाई गई। सिर से लेकर पांव तक नापा गया कच्चा सूत और उबटन से तैयार की गई पिंडियों के साथ ही गुझिया और घरों में बने अन्य पकवान भी अग्नि में समर्पित किए गए। इसी के साथ घर-परिवार की आपदाओं के समूल नष्ट होने के लिए प्रार्थना की गई। पूजा के बाद लौटे लोग संग होलिका की भभूत ले गए जिसे सोमवार को सबसे पहले देवों को अर्पित करके होली की शुरुआत होगी।
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