आगरा: क्रिकेट मैच में भारत की हार पर पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी करने वाले तीन कश्मीरी छात्रों को हाईकोर्ट से मिली जमानत
याचियों की जमानत अर्जी मंजूर करने के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी भी की और शेर भी पढ़े। कोर्ट ने कहा कि भारत की एकता बांस के सरकंडों से नहीं बनी है, जो खाली नारों की हवा में झुक जाएगी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टी20 क्रिकेट वर्ल्ड कप में भारत के हारने के बाद पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी करने वाले तीन कश्मीरी छात्रों की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। कोर्ट ने कहा कि तीन अभियुक्तों के गुणदोषों पर विचार किए बिना उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया जाता है। उन्हें निजी मुचलके केसाथ दो जमानतदारों की जमा करना होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने इनायत अल्ताफ शेख व दो अन्य की जमानत अर्जी को मंजूर करते हुए दिया है।
याचियों की जमानत अर्जी मंजूर करने के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी भी की और शेर भी पढ़े। कोर्ट ने कहा कि भारत की एकता बांस के सरकंडों से नहीं बनी है, जो खाली नारों की हवा में झुक जाएगी। हमारे राष्ट्र की नींव अधिक स्थायी है। कोर्ट ने अपने आदेश में अल्लामा इकबाल के शेर कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी। सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-जमां हमारा।
मामले में अर्शीद यूसुफ , इनायत अल्ताफ शेख और शौकत अहमद गनी के खिलाफ आगरा जिले के जगदीशपुरा थाने में 27 अक्तूबर 2021 को एफआईआर (124ए, 153ए, 505 आईपीसी और आईटी एक्ट की घारा 66 एफ) दर्ज कराई गई थी। तीनों पर 24 अक्तूबर 2021 को भारतीय टीम की हार पर पाकिस्तान के पक्ष में और भारत केविरोध में नारेबाजी करने का आरोप है। तीनों आगरा के आरबीएस कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे। इस घटना के बाद तीनों छात्रों को कॉलेज से निष्काषित कर दिया गया था।
बचाव पक्ष ने कहा- नहीं की गई नारेबाजी
याचियों की ओर से तर्क दिया गया कि उन पर गलत आरोप लगाए गए हैं। विरोधियों ने साजिश के तहत उन्हें फंसाया है। याची भारतीय नागरिक हैं और उन्होंने भारत विरोधी नारेबाजी नहीं की। हालांकि सरकारी अधिवक्ता ने इसका विरोध किया। कहा कि तीनों ने पाकिस्तान के समर्थन में भारत के खिलाफ नारेबाजी की। ये जमानत पाने के हकदार नहीं है।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणियां कीं।
कहा कि देश का प्रत्येक नागरिक संरक्षक है और भारत की एकता और राष्ट्र के संवैधानिक मूल्यों का प्रहरी है। मेजबान राज्य के लोगों का यह कर्तव्य है कि वे हमारे देश के संवैधानिक मूल्यों को सीखने और जीने के लिए आने वाले छात्रों के लिए सक्षम परिस्थितियों का निर्माण करें। युवा छात्रों का दायित्व भी है कि वे आत्मसात करें और उनका पालन करें।
कानूनी सहायता प्रदान नहीं करने का पास किया था प्रस्ताव
कोर्ट ने कहा कि उसे जानकारी मिली है कि आगरा जिला बार एसोसिएशन ने आवेदकों को कोई कानूनी सहायता प्रदान नहीं करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया था और इसलिए याची सीधे हाईकोर्ट पहुंचे। कोर्ट ने यह भी कहा कि आगरा में जिला अदालत में जमानत याचियों के साथ मारपीट भी की गई।