Research : विमानों में बारीक छेद खोज लेगी एकॉस्टिकल इमेज, इलाहाबाद विवि के अजित ने शुरू किया शोध
इविवि के भौतिक विज्ञान विभाग के शोधार्थी अजित कुमार मद्धेशिया इन दिनों फ्रांस में रहकर वहां के वैज्ञानिकों के साथ नैनोफ्ल्यूड्स के गुणों और उसके औद्योगिक अनुप्रयोगों पर अल्ट्रासोनिक तरंगें डालकर शोध कर रहे हैं। उन्हें इंडो-फ्रेंच कार्यक्रम के तहत अति प्रतिष्ठित रमन-चारपाक फेलोशिप मिली है। इसी के बूते वह दुनिया की इस विशिष्ट शोध परियोजना के हिस्सेदार बने हैं।
विस्तार
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) और फ्रांस के वैज्ञानिक स्कैनिंग एकॉस्टिकल इमेजिंग तकनीक के जरिये ऐसे शोध में जुटे हैं, जिससे वे विमानों में होने वाले बारीक से बारीक छेद का पहले ही पता लगा सकें। दावा यह भी है कि नैनोफ्ल्यूड्स के इस्तेमाल के कारण इमेज लेते वक्त निकलीं अल्ट्रासोनिक तरंगों का शरीर पर दुष्प्रभाव भी बेहद कम होगा। यह शोध एयरोस्पेस इंडस्ट्री में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला सिद्ध हो सकता है।
इविवि के भौतिक विज्ञान विभाग के शोधार्थी अजित कुमार मद्धेशिया इन दिनों फ्रांस में रहकर वहां के वैज्ञानिकों के साथ नैनोफ्ल्यूड्स के गुणों और उसके औद्योगिक अनुप्रयोगों पर अल्ट्रासोनिक तरंगें डालकर शोध कर रहे हैं। उन्हें इंडो-फ्रेंच कार्यक्रम के तहत अति प्रतिष्ठित रमन-चारपाक फेलोशिप मिली है। इसी के बूते वह दुनिया की इस विशिष्ट शोध परियोजना के हिस्सेदार बने हैं।
अजित बताते हैं कि एकॉस्टिकल स्कैनिंग इमेजिंग तकनीक से विमान और अंतरिक्ष यान की गहनता से निगरानी की जा सकेगी। यह तकनीक मोटी दीवार के आरपार की गतिविधियों की तस्वीर खींचने में भी सक्षम है। यह तकनीक विमान की बॉडी के किसी हिस्से के कमजोर हो जाने अथवा आंखों से सीधे न देखे जाने लायक छिद्रों को भी आसानी से पकड़ लेती है।
दरअसल, एयरोस्पेस उद्योग में ईंधन प्रणालियों, हाइड्रोलिक लाइनों और दबावयुक्त केबिनों में मामूली छिद्र या लीकेज अक्सर बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन जाते हैं। एकॉस्टिकल स्कैनिंग इमेजिंग तकनीक ऐसी खतरनाक आहटों का पहले ही सटीक पता लगाकर विमान परिचालन को बेहद सुरक्षित बना देगी। इससे विनाशकारी घटनाएं रोकना भी संभव हो सकेगा।
सबसे कम हानि पहुंचाने वाली तकनीक
स्कैनिंग एकॉस्टिक माइक्रोस्कोपी सबसे कम हानि पहुंचाने वाली ऐसी इमेजिंग तकनीक है, जो ध्वनि तरंगों का उपयोग करके अपारदर्शी सामग्री की आंतरिक विशेषताओं की जांच करती है। नैनोफ्ल्यूड्स का इस्तेमाल किए जाने के कारण अल्ट्रासोनिक बीम का इसमें दुष्प्रभाव सबसे कम होता है। अजित के मुताबिक, यह दुनिया की सबसे कम खतरे वाली जांच तकनीक है। यह बायोलॉजिकल नमूनों की जांच के लिए और अधिक उपयोगी है।