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अलग रहने पर भी खत्म नहीं हो सकते पत्नी के कानूनी अधिकार : हाईकोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jul 2026 02:27 AM IST
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A wife's legal rights cannot be extinguished even if living separately: High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल लंबे समय से पति से अलग रहने के आधार पर पत्नी के कानूनी अधिकार समाप्त नहीं हो जाते। कोर्ट ने कहा, यदि पति-पत्नी कभी साझा गृहस्थी (शेयर्ड हाउसहोल्ड) में साथ रहे हैं तो पत्नी घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत राहत मांग सकती है। 11 साल बाद दायर आवेदन केवल देरी के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।
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इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने गाजियाबाद की अपीलीय अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा। जिसमें पति को पत्नी के रहने के लिए ससुराल में समुचित व्यवस्था करने और ऐसा संभव न होने पर उसी स्तर का वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। यह आदेश न्यायमूर्ति अचल सचदेव की अदालत ने गाजियाबाद निवासी पति की याचिका पर दिया।
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पति का आरोप था कि पत्नी 30 अक्तूबर 2000 से अपनी इच्छा से मायके में रह रही है। उसने 18 नवंबर 2011 को घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा-12 के तहत आवेदन दाखिल किया, जो 11 साल की देरी से किया गया।
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वहीं, पत्नी की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि विवाह के बाद अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर उसे लगातार प्रताड़ित किया गया। 2000 में ससुराल से निकाल दिया गया। इसके बाद उसने दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया। पति ने न तो उसे अपने साथ रखा और न ही उसके रहने की स्थायी व्यवस्था की। कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत आवेदन बनाए रखने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि आवेदन दाखिल करने की तिथि पर भी पति-पत्नी साथ रह रहे हों।

यदि वे किसी समय साझा गृहस्थी में साथ रह चुके हैं तो घरेलू संबंध माना जाएगा और पीड़ित महिला अधिनियम के तहत संरक्षण, निवास और अन्य वैधानिक राहत पाने की हकदार होगी। कोर्ट ने कहा कि अपीलीय अदालत के आदेश में हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने पति की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।
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