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साढ़े छह लाख तक आय वाले भी बचा सकेंगे टैक्स
Allahabad
Updated Fri, 11 Jul 2014 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। मोदी सरकार ने आयकर में मौलिक छूट दो से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये तक कर दी है। साथ ही धारा 80-सी के तहत डेढ़ लाख रुपये की बचत करने और सालना दो लाख रुपये तक होम लोन चुकाने वालों को भी टैक्स से राहत प्रदान की है। ऐसे में पेंशनर अधिकतम साढ़े छह लाख रुपये तक की आय और कर्मचारी छह लाख रुपये तक की आय पर टैक्स बचा सकते हैं लेकिन बजट से न तो कर्मचारी खुश हैं और न ही पेंशनर। बजट में डीए मर्जर, सातवें वेतन आयोग और पुरानी पेंशन नीति पर कोई चर्चा न होने से कर्मचारी एवं पेंशनर वर्ग में नाराजगी है।
हालांकि बजट आने से पूर्व यह अनुमान लगाया जा रहा था कि सरकार इनकम टैक्स में कोई खास राहत नहीं देगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पहले पांच लाख रुपये की तक की आय में हर तरह की बचत दिखाने के बावजूद कम से कम 3090 रुपये इनकम टैक्स में कटवाने पड़ते थे लेकिन अब साढ़े छह लाख रुपये की तक की आय पर भी टैक्स बचाया जा सकता है। कर एवं वित्त सलाहकार पवन जायसवाल के मुताबिक अगर पेंशनर वर्ग को छोड़ दिया जाए तो कर्मचारियों को पहले पांच लाख रुपये की आय पर धारा 80-सी के तहत बचत दिखाने के बावजूद टैक्स भरना पड़ता था। उदाहरण के तौर पर किसी कर्मचारी की आय पांच लाख रुपये है। वह डेढ़ लाख रुपये सालाना होम लोन चुका रहा है और एक लाख रुपये धारा 80-सी के तहत बचा रहा है तो ढाई लाख रुपये बचते हैं। पहले दो लाख रुपये तक मौलिक छूट थी। ऐसे में पांच लाख रुपये की आय पर कम से कम 50 हजार रुपये पर हर हालत में दस फीसदी टैक्स कटवाना पड़ता था। पचास हजार का दस फीसदी पांच हजार रुपये होता है। पांच हजार पर दो हजार रुपये की विशेष छूट दी जाती थी, सो आयकर की राशि तीन हजार रुपये बनती है। उस पर शिक्षा उपकर के रूप में 90 रुपये बनते हैं। ऐसे में पांच लाख रुपये की आय पर कुल मिलाकर 3090 रुपये टैक्स बनता था लेकिन अब छह लाख रुपये की आय वाले भी पूरा टैक्स बचा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर किसी कर्मचारी की आय छह लाख रुपये है। दो लाख रुपये होम लोन और डेढ़ लाख रुपये धारा 80-सी के तहत सालाना बचत में जाते हैं तो कुल शेष आय ढाई लाख रुपये बचती है और इस आय पर टैक्स में मौलिक छूट है। ऐसे में टैक्स के रूप में एक रुपया भी नहीं देना पड़ेगा। अगर पेंशनरों के लिहाज से देखा जाए तो दो लाख रुपये होम लोन चुकाने और धारा 80-सी के तहत डेढ़ लाख रुपये बचत करने पर कुल साढ़े छह लाख रुपये तक की आय में तीन लाख रुपये शेष बचते हैं और पेंशनरों के लिए इतनी आय को इनकम टैक्स से मौलिक छूट दे दी गई है।
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हालांकि बजट आने से पूर्व यह अनुमान लगाया जा रहा था कि सरकार इनकम टैक्स में कोई खास राहत नहीं देगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पहले पांच लाख रुपये की तक की आय में हर तरह की बचत दिखाने के बावजूद कम से कम 3090 रुपये इनकम टैक्स में कटवाने पड़ते थे लेकिन अब साढ़े छह लाख रुपये की तक की आय पर भी टैक्स बचाया जा सकता है। कर एवं वित्त सलाहकार पवन जायसवाल के मुताबिक अगर पेंशनर वर्ग को छोड़ दिया जाए तो कर्मचारियों को पहले पांच लाख रुपये की आय पर धारा 80-सी के तहत बचत दिखाने के बावजूद टैक्स भरना पड़ता था। उदाहरण के तौर पर किसी कर्मचारी की आय पांच लाख रुपये है। वह डेढ़ लाख रुपये सालाना होम लोन चुका रहा है और एक लाख रुपये धारा 80-सी के तहत बचा रहा है तो ढाई लाख रुपये बचते हैं। पहले दो लाख रुपये तक मौलिक छूट थी। ऐसे में पांच लाख रुपये की आय पर कम से कम 50 हजार रुपये पर हर हालत में दस फीसदी टैक्स कटवाना पड़ता था। पचास हजार का दस फीसदी पांच हजार रुपये होता है। पांच हजार पर दो हजार रुपये की विशेष छूट दी जाती थी, सो आयकर की राशि तीन हजार रुपये बनती है। उस पर शिक्षा उपकर के रूप में 90 रुपये बनते हैं। ऐसे में पांच लाख रुपये की आय पर कुल मिलाकर 3090 रुपये टैक्स बनता था लेकिन अब छह लाख रुपये की आय वाले भी पूरा टैक्स बचा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर किसी कर्मचारी की आय छह लाख रुपये है। दो लाख रुपये होम लोन और डेढ़ लाख रुपये धारा 80-सी के तहत सालाना बचत में जाते हैं तो कुल शेष आय ढाई लाख रुपये बचती है और इस आय पर टैक्स में मौलिक छूट है। ऐसे में टैक्स के रूप में एक रुपया भी नहीं देना पड़ेगा। अगर पेंशनरों के लिहाज से देखा जाए तो दो लाख रुपये होम लोन चुकाने और धारा 80-सी के तहत डेढ़ लाख रुपये बचत करने पर कुल साढ़े छह लाख रुपये तक की आय में तीन लाख रुपये शेष बचते हैं और पेंशनरों के लिए इतनी आय को इनकम टैक्स से मौलिक छूट दे दी गई है।
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