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एक दर्जन मकानों की दीवारों में दरार
Allahabad
Updated Fri, 13 Sep 2013 05:35 AM IST
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इलाहाबाद। मुट्ठीगंज में हुए सिलेंडर हादसे ने लोगों को भयभीत कर रखा है। लोगों को कोठापार्चा में हुआ हादसा अब भी याद है जिसमें नौ लोगों की जान गई थी। मुट्ठीगंज विस्फोट में आसपास के लगभग एक दर्जन मकीनों में दरार पड़ गई। लोग डरे हुए हैं कि किसी और घर की छत या दीवार गिरती तो हादसा बड़ा हो सकता था। विस्फोट में माधवलाल के पड़ोसी राकेश और सुरेंद्र जायसवाल के मकान को भी नुकसान पहुंचा है। अगल-बगल के एक दर्जन से अधिक मकानों के खिड़की के शीशे टूट गए। ईंट के टुकड़े पूरी गली में बिखरे पड़े थे। राकेश और सुरेंद्र के मकान सटे हुए हैं। आसपास के दर्जन भर मकानों की दीवारों में दरारें भी आ गई हैं।
मुट्ठीगंज का हादसा और भयावह हो सकता था अगर बच्चे घर में होते। दुर्घटना के वक्त घर के तीन बच्चे स्कूल में थे। एक दो साल की बच्ची मकान के निचले हिस्से में मौजूद थी लेकिन वह भी बाल-बाल बच गई। मनोज की बेटी कोमल, बेटा कुलदीप तथा संजय की बेटी ऋतिका दुर्घटना के वक्त स्कूल में थीं। जमीनी तल पर दो साल की नंदिनी खेल रही थी। हादसे के कुछ ही देर बाद स्कूल की छुट्टी हुई तो बच्चे घर पहुंचे। भीड़ भाड़ देखकर बच्चे सहम गए। वे घर में दाखिल हुए तो हर तरफ चीख पुकार मची हुई थी। बच्चों की निगाहें सभी से सवाल पूछतीं लेकिन कोई कुछ बोलने की स्थिति में नहीं था। सूचना माधवलाल के नाती अनुज जायसवाल को हुई। उनका परिवार भी मौके पर पहुंच गया। मनोज की पत्नी भी हादसे के वक्त पड़ोस में गई हुई थीं। धमाका सुनकर वह भी बदहवास सी दौड़ीं। उनकी भी समझ में कुछ नहीं आ रहा था।
सिलेंडर फटने से माधवलाल का पूरा घर तो बर्बाद हुआ ही, गृहस्थी भी चौपट हो गई। टीवी, फ्रिज समेत घर के सारे सामान चकनाचूर हो गए। आलमारी, पलंग, बर्तनों के भी परखच्चे उड़ गए। घटना स्थल पर विधायक हाजी परवेज अहमद टंकी और सपा के महानगर अध्यक्ष केके श्रीवास्तव भी पहुंचे। उन्होंने डीएम से बात कर घायलों को आर्थिक मदद और सुविधा दिलाने का आग्रह किया। व्यापारी एकता समिति ने भी मदद की गुहार लगाई है।
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घटना के बाद मुट्ठीगंज की गली में चीख पुकार मच गई। गली इतनी संकरी थी कि फायर ब्रिगेड की गाड़ी और एंबुलेंस तक मौके पर नहीं पहुंच सकी। लोगों को हाथ में ही लेकर लोग चौराहे तक पहुंचे। अस्पताल में भी परिजनों की चीख पुकार मची रही। जो लोग कुछ देर पहले हंस खेल रहे थे, वह पट्टियों में लिपटे हुए थे।
पूरी छत ही नीचे आई, मोटर साइकिल क्षतिग्रस्त
धमाके के बाद पहली मंजिल की छत का बड़ा हिस्सा पीछे गली में गिर पड़ा। मलबा सीधे एक बाइक पर गिरा। बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
सिलेंडर धमाके इतने जोरदार थे कि मकान का अगला हिस्सा भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मकान के अगले हिस्से की खिड़कियां उखड़कर सड़क पर आ गिरीं।
नुकसान इतना ज्यादा था कि लोगों को घर के आसपास फटकने तक नहीं दिया गया। घर को गिराने पर भी विचार किया जा रहा है। परिवार के सदस्य घर में जाना चाहते थे लेकिन पुलिस ने उनको रोक दिया।
गली इतनी संकरी थी कि नगर निगम के कर्मचारियों को मलबे को हटाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। छत के हिस्से को तोड़ा गया और मलबे को हाथ में उठाकर बाहर लाया गया। नगर निगम की छोटी जेसीबी भी गली तक नहीं पहुंच सकी।
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मुट्ठीगंज का हादसा और भयावह हो सकता था अगर बच्चे घर में होते। दुर्घटना के वक्त घर के तीन बच्चे स्कूल में थे। एक दो साल की बच्ची मकान के निचले हिस्से में मौजूद थी लेकिन वह भी बाल-बाल बच गई। मनोज की बेटी कोमल, बेटा कुलदीप तथा संजय की बेटी ऋतिका दुर्घटना के वक्त स्कूल में थीं। जमीनी तल पर दो साल की नंदिनी खेल रही थी। हादसे के कुछ ही देर बाद स्कूल की छुट्टी हुई तो बच्चे घर पहुंचे। भीड़ भाड़ देखकर बच्चे सहम गए। वे घर में दाखिल हुए तो हर तरफ चीख पुकार मची हुई थी। बच्चों की निगाहें सभी से सवाल पूछतीं लेकिन कोई कुछ बोलने की स्थिति में नहीं था। सूचना माधवलाल के नाती अनुज जायसवाल को हुई। उनका परिवार भी मौके पर पहुंच गया। मनोज की पत्नी भी हादसे के वक्त पड़ोस में गई हुई थीं। धमाका सुनकर वह भी बदहवास सी दौड़ीं। उनकी भी समझ में कुछ नहीं आ रहा था।
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सिलेंडर फटने से माधवलाल का पूरा घर तो बर्बाद हुआ ही, गृहस्थी भी चौपट हो गई। टीवी, फ्रिज समेत घर के सारे सामान चकनाचूर हो गए। आलमारी, पलंग, बर्तनों के भी परखच्चे उड़ गए। घटना स्थल पर विधायक हाजी परवेज अहमद टंकी और सपा के महानगर अध्यक्ष केके श्रीवास्तव भी पहुंचे। उन्होंने डीएम से बात कर घायलों को आर्थिक मदद और सुविधा दिलाने का आग्रह किया। व्यापारी एकता समिति ने भी मदद की गुहार लगाई है।
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घटना के बाद मुट्ठीगंज की गली में चीख पुकार मच गई। गली इतनी संकरी थी कि फायर ब्रिगेड की गाड़ी और एंबुलेंस तक मौके पर नहीं पहुंच सकी। लोगों को हाथ में ही लेकर लोग चौराहे तक पहुंचे। अस्पताल में भी परिजनों की चीख पुकार मची रही। जो लोग कुछ देर पहले हंस खेल रहे थे, वह पट्टियों में लिपटे हुए थे।
पूरी छत ही नीचे आई, मोटर साइकिल क्षतिग्रस्त
धमाके के बाद पहली मंजिल की छत का बड़ा हिस्सा पीछे गली में गिर पड़ा। मलबा सीधे एक बाइक पर गिरा। बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
सिलेंडर धमाके इतने जोरदार थे कि मकान का अगला हिस्सा भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मकान के अगले हिस्से की खिड़कियां उखड़कर सड़क पर आ गिरीं।
नुकसान इतना ज्यादा था कि लोगों को घर के आसपास फटकने तक नहीं दिया गया। घर को गिराने पर भी विचार किया जा रहा है। परिवार के सदस्य घर में जाना चाहते थे लेकिन पुलिस ने उनको रोक दिया।
गली इतनी संकरी थी कि नगर निगम के कर्मचारियों को मलबे को हटाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। छत के हिस्से को तोड़ा गया और मलबे को हाथ में उठाकर बाहर लाया गया। नगर निगम की छोटी जेसीबी भी गली तक नहीं पहुंच सकी।