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अनुग्रह के नेतृत्व में वीसी को बनाया बंधक
Allahabad
Updated Sat, 31 Aug 2013 05:35 AM IST
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इलाहाबाद(ब्यूरो)। कार्यपरिषद सदस्य तथा विधायक अनुग्रह नारायण सिंह के नेतृत्व में छात्रों ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एके सिंह को परिसर स्थिति उनके कक्ष में शुक्र्रवार को घंटों बंधक बनाए रखा। कार्यपरिषद की बैठक में छात्रनेताओं को गुंडा कहे जाने पर छात्रों में काफी गुस्सा था तथा उन्होंने कुलपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अफसरों के आग्रह पर अनुग्रह ने किसी तरह से छात्रों को मनाया। इसके बाद भारी फोर्स की मौजूदगी में कुलपति को बाहर निकाला गया। इसके बाद भी कुलपति कार्यालय पर छात्रों का धरना-प्रदर्शन जारी रहा।
अमरनाथ झा हास्टल में रैगिंग के आरोप में 10 छात्रों को विश्वविद्यालय से एक साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है। इनके अलावा कुलपति से हाथापाई, उनके कार्यालय में तोड़फोड़, मारपीट आदि के मामले में चार अन्य छात्र भी निष्कासित किए गए हैं। कार्यपरिषद की बैठक में डीन साइंस प्रोफेसर माता अंबर तिवारी और विधायक अनुग्रह नारायण ने यह मुद्दा उठाया। सदस्यों ने छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के मामले में पक्षपात का भी आरोप लगाया। सदस्यों का कहना था कि कुलपति कार्यालय में तोड़फोड़ करने वालों को निष्कासित कर दिया गया लेकिन कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर एनआर फारूकी की अध्यक्षता में हो रही बैठक में बिना अनुमति घुसने तथा सहायक कुलसचिव एके सिंह को धमकाने के मामले में छात्रसंघ महामंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उल्टे जेल से परीक्षा देने पहुंचे महामंत्री से कुलपति ने बुलाकर वार्ता की। सदस्यों का कहना था कि इस तरह की दोहरी नीति नहीं चलेगी। इस पर कुलपति की सदस्यों से काफी बहस हुई। सदस्यों का कहना है कि कुलपति ने नोकझोंक के बीच छात्र नेताओं के लिए कहा कि वे गुंडा हैं। इस पर विधायक अनुग्रह नारायण भड़क गए और उन्होंने बैठक का बहिष्कार कर दिया। निष्कासन वापस लेने तथा छात्रसंघ चुनाव की तिथि घोषित करने की मांग को लेकर छात्र पहले से ही कुलपति कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे थे। बैठक से बाहर निकलकर अनुग्रह नारायण भी उनके साथ धरने पर बैठ गए। इसके बाद कई अन्य सदस्य भी बैठक से बाहर निकल गए, उन्हें भी छात्रों ने रोक लिया। विधायक ने छात्रों को काफी समझाया। बताया कि इनमें से अधिकतर सदस्य उनके साथ हैं। इस पर छात्रों ने उन्हें जाने दिया लेकिन कुलपति को बंधक बनाए रखा। छात्रों ने सीनेट हाल को चारो तरफ से घेर रखा था। छात्रों ने कुलपति तथा अन्य अफसरों के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। इस दौरान हुई सभा में अनुग्रह ने छात्रों को बैठक की गतिविधियों से अवगत कराया। तकरीबन चार बजे विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ शिक्षकों, सीओ समेत अन्य अफसरों ने अनुग्रह से कुलपति को बाहर निकल जाने के लिए दबाव बनाया। इसके बाद अनुग्रह मान गए और छात्रों को समझाया। साथ में यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई अंतिम दम तक जारी रहेगी। इस पर छात्र मान गए लेकिन उनके गुस्से को देखते हुए अफसर कुलपति को बाहर निकालने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। इसके बाद अनुग्रह छात्रों को लेकर कुछ दूरी पर बैठ गए। इसके बाद भारी फोर्स की सुरक्षा में कुलपति को बाहर निकाला गया। हालांकि इसके बाद भी कुछ छात्र कुलपति की गाड़ी के पीछे दौड़े। विभिन्न मांगों को लेकर छात्रों का क्रमिक अनशन जारी रहा। प्रदर्शन करने वालाें में निष्कासित छात्र नेता अविनाश दुबे, अजीत यादव, इमरान अंसारी के अलावा विवेकानंद पाठक, अखिलेश गुप्ता, देवमणि मिश्रा, राघवेंद्र यादव, श्याम पांडेय, विकास तिवारी, रामकृष्ण द्विवेदी आदि शामिल रहे।
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अमरनाथ झा हास्टल में रैगिंग के आरोप में 10 छात्रों को विश्वविद्यालय से एक साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है। इनके अलावा कुलपति से हाथापाई, उनके कार्यालय में तोड़फोड़, मारपीट आदि के मामले में चार अन्य छात्र भी निष्कासित किए गए हैं। कार्यपरिषद की बैठक में डीन साइंस प्रोफेसर माता अंबर तिवारी और विधायक अनुग्रह नारायण ने यह मुद्दा उठाया। सदस्यों ने छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के मामले में पक्षपात का भी आरोप लगाया। सदस्यों का कहना था कि कुलपति कार्यालय में तोड़फोड़ करने वालों को निष्कासित कर दिया गया लेकिन कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर एनआर फारूकी की अध्यक्षता में हो रही बैठक में बिना अनुमति घुसने तथा सहायक कुलसचिव एके सिंह को धमकाने के मामले में छात्रसंघ महामंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उल्टे जेल से परीक्षा देने पहुंचे महामंत्री से कुलपति ने बुलाकर वार्ता की। सदस्यों का कहना था कि इस तरह की दोहरी नीति नहीं चलेगी। इस पर कुलपति की सदस्यों से काफी बहस हुई। सदस्यों का कहना है कि कुलपति ने नोकझोंक के बीच छात्र नेताओं के लिए कहा कि वे गुंडा हैं। इस पर विधायक अनुग्रह नारायण भड़क गए और उन्होंने बैठक का बहिष्कार कर दिया। निष्कासन वापस लेने तथा छात्रसंघ चुनाव की तिथि घोषित करने की मांग को लेकर छात्र पहले से ही कुलपति कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे थे। बैठक से बाहर निकलकर अनुग्रह नारायण भी उनके साथ धरने पर बैठ गए। इसके बाद कई अन्य सदस्य भी बैठक से बाहर निकल गए, उन्हें भी छात्रों ने रोक लिया। विधायक ने छात्रों को काफी समझाया। बताया कि इनमें से अधिकतर सदस्य उनके साथ हैं। इस पर छात्रों ने उन्हें जाने दिया लेकिन कुलपति को बंधक बनाए रखा। छात्रों ने सीनेट हाल को चारो तरफ से घेर रखा था। छात्रों ने कुलपति तथा अन्य अफसरों के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। इस दौरान हुई सभा में अनुग्रह ने छात्रों को बैठक की गतिविधियों से अवगत कराया। तकरीबन चार बजे विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ शिक्षकों, सीओ समेत अन्य अफसरों ने अनुग्रह से कुलपति को बाहर निकल जाने के लिए दबाव बनाया। इसके बाद अनुग्रह मान गए और छात्रों को समझाया। साथ में यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई अंतिम दम तक जारी रहेगी। इस पर छात्र मान गए लेकिन उनके गुस्से को देखते हुए अफसर कुलपति को बाहर निकालने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। इसके बाद अनुग्रह छात्रों को लेकर कुछ दूरी पर बैठ गए। इसके बाद भारी फोर्स की सुरक्षा में कुलपति को बाहर निकाला गया। हालांकि इसके बाद भी कुछ छात्र कुलपति की गाड़ी के पीछे दौड़े। विभिन्न मांगों को लेकर छात्रों का क्रमिक अनशन जारी रहा। प्रदर्शन करने वालाें में निष्कासित छात्र नेता अविनाश दुबे, अजीत यादव, इमरान अंसारी के अलावा विवेकानंद पाठक, अखिलेश गुप्ता, देवमणि मिश्रा, राघवेंद्र यादव, श्याम पांडेय, विकास तिवारी, रामकृष्ण द्विवेदी आदि शामिल रहे।
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