{"_id":"8-32796","slug":"Allahabad-32796-8","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेलवे में फंसी होनहारों की स्कॉलरशिप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेलवे में फंसी होनहारों की स्कॉलरशिप
Allahabad
Updated Sun, 11 Aug 2013 05:34 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद (ब्यूरो)। उत्तर मध्य रेलवे के इलाहाबाद डिवीजन में कार्यरत कर्मचारियों के बच्चों की स्कॉलरशिप फंस गई है। दो साल से कर्मचारियों के बच्चों को स्कॉलरशिप नहीं मिल रही है। आरोप है कि डिवीजनल अफसरों ने वजीफे की रकम का वितरण करने के लिए दोनों वर्ष आवेदन मंगाए लेकिन इसका निस्तारण नहीं किया। दूसरी ओर रेलवे प्रशासन का दावा है कि जल्द ही इस प्रकरण को सुलझा लिया जाएगा।
कर्मचारियों के बच्चों को उच्च शिक्षा खासतौर पर बीटेक, एमबीए, बीसीए, एमसीए जैसी तकनीकी शिक्षा के लिए रेलवे की ओर से प्रति वर्ष पांच हजार रुपये का वजीफा दिया जाता है। यह रकम स्टॉफ वेलफेयर फंड से दी जाती है। नियमानुसार वेलफेयर फंड में उपलब्ध रकम से जितने बच्चों को वजीफा दिया जा सकता है। आवेदकों की संख्या ज्यादा होने पर योग्यता के आधार पर इनकी छंटनी की जाती है। वजीफे के लिए डिवीजन में करीब 375 बच्चों के आवेदन आए हैं। एनसीआरएमयू के मंडल मंत्री एसएन ठाकुर का कहना है कि दो साल से बच्चों को वजीफा नहीं दिया जा रहा है। आवेदकों की फाइलों को वेलफेयर कमेटी आठ महीने पहले छांट चुकी है। अलग-अलग स्तरों पर भी इसकी जांच हो चुकी है। इसके बाद भी वजीफा रोकना समझ से परे है।
दूसरी ओर एनसीआर के सीपीआरओ संदीप माथुर का कहना है कि आवेदन पत्रों की जांच के लिए कमेटी का गठन किया जा चुका है। कमेटी जल्द ही इस पर फैसला करेगी। इसके बाद आवेदकों को स्कॉलरशिप की रकम बांट दी जाएगी। मंडल मंत्री का आरोप है कि जांच कमेटी आवेदनों का अंतिम चयन भी कर चुकी है। इस फाइल पर केवल अफसरों के दस्तखत होने हैं। इसमें भी महीनों का वक्त लगाया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कर्मचारियों के बच्चों को उच्च शिक्षा खासतौर पर बीटेक, एमबीए, बीसीए, एमसीए जैसी तकनीकी शिक्षा के लिए रेलवे की ओर से प्रति वर्ष पांच हजार रुपये का वजीफा दिया जाता है। यह रकम स्टॉफ वेलफेयर फंड से दी जाती है। नियमानुसार वेलफेयर फंड में उपलब्ध रकम से जितने बच्चों को वजीफा दिया जा सकता है। आवेदकों की संख्या ज्यादा होने पर योग्यता के आधार पर इनकी छंटनी की जाती है। वजीफे के लिए डिवीजन में करीब 375 बच्चों के आवेदन आए हैं। एनसीआरएमयू के मंडल मंत्री एसएन ठाकुर का कहना है कि दो साल से बच्चों को वजीफा नहीं दिया जा रहा है। आवेदकों की फाइलों को वेलफेयर कमेटी आठ महीने पहले छांट चुकी है। अलग-अलग स्तरों पर भी इसकी जांच हो चुकी है। इसके बाद भी वजीफा रोकना समझ से परे है।
विज्ञापन
दूसरी ओर एनसीआर के सीपीआरओ संदीप माथुर का कहना है कि आवेदन पत्रों की जांच के लिए कमेटी का गठन किया जा चुका है। कमेटी जल्द ही इस पर फैसला करेगी। इसके बाद आवेदकों को स्कॉलरशिप की रकम बांट दी जाएगी। मंडल मंत्री का आरोप है कि जांच कमेटी आवेदनों का अंतिम चयन भी कर चुकी है। इस फाइल पर केवल अफसरों के दस्तखत होने हैं। इसमें भी महीनों का वक्त लगाया जा रहा है।
विज्ञापन