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इलाहाबाद हाईकोर्ट के 75 अधिवक्ता सीनियर एडवोकेट नामित
Sun, 19 May 2019 01:01 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 19 May 2019 01:01 AM IST
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Allahabad High Court
- फोटो : PTI
इलाहाबाद हाईकोर्ट के 75 वकीलों को वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया गया है। यह पहला मौका है जब इतनी बड़ी संख्या में एक साथ सीनियर एडवोकेट नामित किए गए हैं। हाईकोर्ट द्वारा स्थापित प्रक्रिया के तहत सीनियर एडवोकेट बनने के लिए आए आवेदनों की स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा जांच के बाद कुल 78 वकीलों को सीनियर बनाए जाने योग्य पाया गया। इन नामों पर हाईकोर्ट जजों की बैठक में विचार किया गया। जजों द्वारा मतदान के माध्यम से कुल 75 वकीलों को सीनियर एडवोकेट (वरिष्ठ अधिवक्ता) नामित किया गया।
वरिष्ठ अधिवक्ता बनाए जाने हेतु हाईकोर्ट ने जुलाई 2018 में वकीलों से आवेदन मांगे थे। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्राप्त आवेदनों की जांच कर शार्ट लिस्टिंग की गई। इस काम के लिए गठित कमेटी मुख्य न्यायाधीश के निर्देशन में बनी कमेटी में प्रदेश के महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह और हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रविकांत भी शामिल थे। कमेटी ने प्राप्त आवेदनों में से 78 वकीलों को सीनियर एडवोकेट बनाए जाने के योग्य पाया। इन नामों को हाईकोर्ट जजों की फुलकोर्ट के समक्ष रखा गया। फुलकोर्ट में सभी जज शामिल होते हैं। फुलकोर्ट की मंजूरी मिल जाने के बाद जल्दी ही वरिष्ठ अधिवक्ता बनाए जाने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं की सूची में 75 नए नामों के शामिल हो जाने से इलाहाबाद हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ताओं का सबसे बड़ा कुनबा बन गया है। मौजूदा समय में हाईकोर्ट में कुल 85 वरिष्ठ अधिवक्ता हैं जिनमें से 65 इलाहाबाद हाईकोर्ट में और 20 लखनऊ खंडपीठ में हैं। 75 नाम और शामिल होने से वरिष्ठ अधिवक्ताओं की कुल संख्या 160 हो जाएगी जो सभी उच्च न्यायालयों में सबसे बड़ी संख्या है।
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कठिन है सीनियर बनने की प्रक्रिया
सीनियर एडवोकेट बनाए जाने की प्रक्रिया कठिन है। इसके लिए योग्यता के कड़े मापदंड रखे गए हैं। एडवोकेट्स एक्ट के अनुसार कोई अधिवक्ता अपनी उम्र से सीनियर एडवोकेट नहीं होता है बल्कि यह एक प्रक्रिया है जिसे पूरा करने के बाद सीनियर तगमा मिलता है। किसी वकील को सीनियर एडवोकेट बनाए जाने में लगभग वही मापदंड लागू होते हैं जो जज बनाए जाने हैं। वकील की प्रैक्टिस, आयकर रिटर्न का रिकार्ड, उसके द्वारा किए गए मुकदमों की संख्या और गुणवत्ता, लॉ जर्नल में प्रकाशित हुए मुकदमों के अलावा अधिवक्ता के चरित्र और आचरण पर भी विचार करने के बाद निर्णय लिया जाता है।
बदल जाती है ड्रेस, बढ़ता है सम्मान
सीनियर एडवोकेट बनने के बाद वकील का सम्मान पहले के मुकाबले और बढ़ जाता है। उनकी ड्रेस भी जजों की तरह हो जजों की तरह हो जाती है तथा अदालत में बहस के लिए सीनियर एडवोकेट को वकालत नामा दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होती है। अदालतें भी सीनियर एडवोकेट से बड़े मुकदमों की सहयोग की अपेक्षा करती हैं।
इन वकीलों के नामों पर किया गया विचार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की फुलकोर्ट ने जिन 78 वकीलों के नामों पर विचार किया उनके नाम इस प्रकार हैं। इन सभी के गाउन व कोर्ट अब न्यायाधीशों की तरह अजीत कुमार सिंह, अखिलेश कुमार कालरा, अमित बोस, अमित सक्सेना, अमरेंद्र नाथ सिंह, अनिल किशोर शर्मा, अनिल श्रीवास्तव, अनिल तिवारी, अनूप त्रिवेदी, एपी सिंह, अरुण कुमार गुप्ता, अशोक कुमार गौर, अतुल दयाल, ब्रजेश दत्त पांडेय, बृजेश सहाय, चंद्रभूषण पांडेय, चंद्रकांत पारिख, दयाशंकर मिश्र, देशदीपक चोपड़ा, धर्मेंद्र सिंघल, दिलीप कुमार, दिनेश कुमार गोस्वामी, दिनेश कुमार पाठक, डा. हर्षवीर प्रताप शर्मा, ज्ञान प्रकाश, आईके चतुर्वेदी, कृपाशंकर सिंह, कुंवर मुकुल राकेश, मंगला प्रसाद राय, मानिक सिन्हा, मनीष गोयल, मनीष कुमार, मनीष तिवारी, मुकेश प्रसाद, नंदित कुमार श्रीवास्तव, नजरुल इस्लाम जाफरी, नीरज त्रिपाठी, नियाज अहमद खान, प्रदीप चंद्रा, प्रदीप कुमार, प्रमोद जैन, प्रेम प्रकाश यादव, राहुल श्रीपत, राकेश पांडेय, रमेश कुमार सिंह, रमेश उपाध्याय, डा. रामसूरत पांडे, रविशंकर प्रसाद, रमेश चंद्र सिंह, आरपी अग्रवाल, सगीर अहमद, समीर शर्मा, सुमित गोपाल, संदीप दीक्षित, संजय भसीन, संजीव सिंह, सैयद फरमान अहमद नकवी, शैलेंद्र, शक्ति स्वरूप निगम, शंभू चोपड़ा, शिवनाथ सिंह, सुदीप सेठ, सूर्यभान पांडेय, तरुण गुलाटी, उदय करन सक्सेना, उपेंद्र नाथ मिश्र, विजय गौतम, विजय कुमार सिंह, विनय कुमार खरे, विनय सरन, विनोद कांत, विनोद कुमार सिंह, वीडी ओझा, विष्णु गुप्ता, विवेकराज सिंह, विवेक शांडिल्य और जफरयाब जिलानी शामिल हैं। इनमें से तीन वकीलों को छोड़कर शेष सभी 75 वकीलों के नाम पर मुहर लग गई है।
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वरिष्ठ अधिवक्ता बनाए जाने हेतु हाईकोर्ट ने जुलाई 2018 में वकीलों से आवेदन मांगे थे। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्राप्त आवेदनों की जांच कर शार्ट लिस्टिंग की गई। इस काम के लिए गठित कमेटी मुख्य न्यायाधीश के निर्देशन में बनी कमेटी में प्रदेश के महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह और हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रविकांत भी शामिल थे। कमेटी ने प्राप्त आवेदनों में से 78 वकीलों को सीनियर एडवोकेट बनाए जाने के योग्य पाया। इन नामों को हाईकोर्ट जजों की फुलकोर्ट के समक्ष रखा गया। फुलकोर्ट में सभी जज शामिल होते हैं। फुलकोर्ट की मंजूरी मिल जाने के बाद जल्दी ही वरिष्ठ अधिवक्ता बनाए जाने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
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हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं की सूची में 75 नए नामों के शामिल हो जाने से इलाहाबाद हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ताओं का सबसे बड़ा कुनबा बन गया है। मौजूदा समय में हाईकोर्ट में कुल 85 वरिष्ठ अधिवक्ता हैं जिनमें से 65 इलाहाबाद हाईकोर्ट में और 20 लखनऊ खंडपीठ में हैं। 75 नाम और शामिल होने से वरिष्ठ अधिवक्ताओं की कुल संख्या 160 हो जाएगी जो सभी उच्च न्यायालयों में सबसे बड़ी संख्या है।
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कठिन है सीनियर बनने की प्रक्रिया
सीनियर एडवोकेट बनाए जाने की प्रक्रिया कठिन है। इसके लिए योग्यता के कड़े मापदंड रखे गए हैं। एडवोकेट्स एक्ट के अनुसार कोई अधिवक्ता अपनी उम्र से सीनियर एडवोकेट नहीं होता है बल्कि यह एक प्रक्रिया है जिसे पूरा करने के बाद सीनियर तगमा मिलता है। किसी वकील को सीनियर एडवोकेट बनाए जाने में लगभग वही मापदंड लागू होते हैं जो जज बनाए जाने हैं। वकील की प्रैक्टिस, आयकर रिटर्न का रिकार्ड, उसके द्वारा किए गए मुकदमों की संख्या और गुणवत्ता, लॉ जर्नल में प्रकाशित हुए मुकदमों के अलावा अधिवक्ता के चरित्र और आचरण पर भी विचार करने के बाद निर्णय लिया जाता है।
बदल जाती है ड्रेस, बढ़ता है सम्मान
सीनियर एडवोकेट बनने के बाद वकील का सम्मान पहले के मुकाबले और बढ़ जाता है। उनकी ड्रेस भी जजों की तरह हो जजों की तरह हो जाती है तथा अदालत में बहस के लिए सीनियर एडवोकेट को वकालत नामा दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होती है। अदालतें भी सीनियर एडवोकेट से बड़े मुकदमों की सहयोग की अपेक्षा करती हैं।
इन वकीलों के नामों पर किया गया विचार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की फुलकोर्ट ने जिन 78 वकीलों के नामों पर विचार किया उनके नाम इस प्रकार हैं। इन सभी के गाउन व कोर्ट अब न्यायाधीशों की तरह अजीत कुमार सिंह, अखिलेश कुमार कालरा, अमित बोस, अमित सक्सेना, अमरेंद्र नाथ सिंह, अनिल किशोर शर्मा, अनिल श्रीवास्तव, अनिल तिवारी, अनूप त्रिवेदी, एपी सिंह, अरुण कुमार गुप्ता, अशोक कुमार गौर, अतुल दयाल, ब्रजेश दत्त पांडेय, बृजेश सहाय, चंद्रभूषण पांडेय, चंद्रकांत पारिख, दयाशंकर मिश्र, देशदीपक चोपड़ा, धर्मेंद्र सिंघल, दिलीप कुमार, दिनेश कुमार गोस्वामी, दिनेश कुमार पाठक, डा. हर्षवीर प्रताप शर्मा, ज्ञान प्रकाश, आईके चतुर्वेदी, कृपाशंकर सिंह, कुंवर मुकुल राकेश, मंगला प्रसाद राय, मानिक सिन्हा, मनीष गोयल, मनीष कुमार, मनीष तिवारी, मुकेश प्रसाद, नंदित कुमार श्रीवास्तव, नजरुल इस्लाम जाफरी, नीरज त्रिपाठी, नियाज अहमद खान, प्रदीप चंद्रा, प्रदीप कुमार, प्रमोद जैन, प्रेम प्रकाश यादव, राहुल श्रीपत, राकेश पांडेय, रमेश कुमार सिंह, रमेश उपाध्याय, डा. रामसूरत पांडे, रविशंकर प्रसाद, रमेश चंद्र सिंह, आरपी अग्रवाल, सगीर अहमद, समीर शर्मा, सुमित गोपाल, संदीप दीक्षित, संजय भसीन, संजीव सिंह, सैयद फरमान अहमद नकवी, शैलेंद्र, शक्ति स्वरूप निगम, शंभू चोपड़ा, शिवनाथ सिंह, सुदीप सेठ, सूर्यभान पांडेय, तरुण गुलाटी, उदय करन सक्सेना, उपेंद्र नाथ मिश्र, विजय गौतम, विजय कुमार सिंह, विनय कुमार खरे, विनय सरन, विनोद कांत, विनोद कुमार सिंह, वीडी ओझा, विष्णु गुप्ता, विवेकराज सिंह, विवेक शांडिल्य और जफरयाब जिलानी शामिल हैं। इनमें से तीन वकीलों को छोड़कर शेष सभी 75 वकीलों के नाम पर मुहर लग गई है।