कटऑफ में बदलाव और प्रश्नपत्र आउट होने को लेकर विवादों में रही भर्ती
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
परिषदीय विद्यालयों के लिए छह जनवरी 2019 को हुई 69000 प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा लगातार विवादों में रही। परीक्षा के बीच में नया कटऑफ तय करने और परीक्षा से पहले लिखित परीक्षा के प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के चलते परीक्षार्थियों ने महीने भर से अधिक समय तक सचिव परीक्षा नियामक कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। परीक्षार्थी लिखित परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र आउट होने के साक्ष्य के साथ सरकार पर लगातार दबाव बनाते रहे परंतु उनकी सुनवाई नहीं हुई। सरकार और सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से मामले में कोई सुनवाई नहीं होने के बाद परीक्षार्थी कोर्ट चले गए।
परीक्षा का प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने को लेकर परीक्षार्थियों की ओर से दाखिल याचिका पर भी कोर्ट ने सरकार से सवाल किया कि आखिर में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र छात्रों के पास कैसे पहुंच गए। इस मामले को लेकर परीक्षार्थियों की ओर से लंबे समय तक सचिव परीक्षा नियामक कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया गया। परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र आउट होने के सवाल पर सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी अनिल भूषण चतुर्वेदी ने कहा था कि प्रश्नपत्र आउट नहीं हुआ।
परीक्षा के एक दिन बाद बदल दिया कटऑफ
प्रदेश सरकार ने 2018 में परिषदीय विद्यालयों के लिए 68500 शिक्षकों की भर्ती में तय मानक को बदलते हुए पूर्व में तय कटऑफ अनारक्षित के लिए 45 और आरक्षित वर्ग के 40 को बदलते हुए अनारक्षित के लिए 65 और आरक्षित के लिए 60 फीसदी कर दिया था। आयोग की ओर से कटऑफ के मानक में बदलाव परीक्षा तिथि छह जनवरी के बाद सात जनवरी को किया गया था। इस मामले में शिक्षामित्रों की ओर से कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष वसीम अहमद का कहना है कि सरकार जब तक पुराने कटऑफ की व्यवस्था को लागू नहीं करेगी, टीईटी पास शिक्षामित्रों को लाभ नहीं मिलेगा।