69 हजार शिक्षक भर्ती का सरगना केएल पटेल शिवकुटी थाने से वांटेड निकला
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शिक्षक भर्ती घोटाले में जेल भेजा गया सरगना केएल पटेल शिवकुटी थाने से वांटेड चल रहा था। 2019 में रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा में पेपर आउट कराने के मामले में केएल पटेल समेत कई लोगों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कराई गई थी।
केएल पटेल के साथ उसका चेला संतोष बिंद को भी वांटेड किया गया था। हालांकि इस मामले में दोनों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी। रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा में नकल का भंडाफोड़ एसटीएफ ने किया था। जांच में पता चला है कि पटेल ने करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर ली है। इसकी भी जांच शुरू कर दी गई।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य और स्कूल प्रबंधक केएल पटेल इतना शातिर शख्स है कि महज कुछ सालों में उसने कई करोड़ की संपत्ति अर्जित कर ली। एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि वह रेलवे, क्लर्क, शिक्षक, लेखपाल आदि भर्तियों में सेंधमारी करता था। 2019 में एसटीएफ ने रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षाओं में नकल और पेपर आउट का खुलासा किया था।
इसमें तकरीबन आधा दर्जन लोग पकड़े गए थे। उनसे पूछताछ में खुलासा हुआ था कि गिरोह का सरगना केएल पटेल है। पुलिस ने केएल पटेल और उसके चेले संतोष बिंद को उस मामले में वांटेड कर दिया था। संतोष बिंद वही शख्स है जिसे की एल पटेल के साथ 69000 शिक्षक भर्ती में जेल भेजा गया है। पुलिस के खुलासे में पता चला कि कल पटेल ने भर्ती परीक्षाओं में सेल लगाकर करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर ली है। पटेल की संपत्तियों की भी जांच की जा रही है।
एक और भाजपा नेता का नाम आया, एसटीएफ करेगी जांच
शिक्षक भर्ती घोटाले में एक और भाजपा नेता का नाम सामने आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक इलाहाबाद विश्वविद्यालय से छात्र राजनीति करने वाला नेता इन दिनों भाजपा की राजनीति कर रहा है। केएल पटेल के इस गिरोह से भाजपा नेता भी जुड़ा हुआ है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि अभी जांच काफी प्रारंभिक अवस्था में है। कॉल डिटेल्स तथा अन्य सबूतों के आधार पर जांच की जा रही है।पेपर आउट कराता था चंद्रमा, मायापति लाता था कैंडिडेट
केएल पटेल ने अपने गिरोह में सबका काम बांट रखा था। पेपर आउट कराने में सबसे बड़ी भूमिका भाजपा नेता चंद्रमा यादव की रहती थी। उसके कॉलेज में जिस भी परीक्षा का सेंटर जाता था, उस परीक्षा का पेपर आउट होना तय माना जाता है। भदोही का मायापति दुबे चंद्रमा से पेपर लेकर पटेल को देता था।इसके बाद उस पेपर को कैंडीडेट्स में बांट दिया जाता था। गिरोह के अन्य लोगों को सिर्फ और सिर्फ यह कहा जाता था कि वह कैंडिडेट लाएं। जो जितना अधिक कैंडिडेट लाता था उसे उतना अधिक पैसा मिलता था। चंद्रमा यादव को टेट परीक्षा में नकल कराने और पेपर आउट कराने के मामले में एसटीएफ ने जेल भेज दिया था।