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अक्षम संविदा चालक को नहीं कर सकते हैं बाहर
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कानपुर के लिए खास
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अक्षम संविदा चालक को नहीं कर सकते बाहर
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सड़क परिवहन निगम के स्थायी और संविदा कर्मचारी में भेद नहीं है। धारा-47 में दोनों को समान अधिकार प्राप्त हैं। नौ साल की सेवा के बाद संविदा पर तैनात चालक को अक्षम होने पर सेवा से निकाला नहीं जा सकता है। उसको वैकल्पिक नियुक्ति देने से इंकार नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि परिवहन निगम एक मॉडल नियोक्ता है, इसलिए मजबूर कर्मचारी को संविदा खत्म कर बाहर नहीं निकाला जा सकता है। न्यायमूर्ति डीके सिंह ने बांदा के सुरेश सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याची 10 जून 2005 में दुघर्टना में घायल होने के बाद अक्षम हो गया। मेडिकल बोर्ड की जांच में उसे अनफिट पाया गया। इसके बाद निगम ने उसेे गैरहाजिर रहने के आधार पर बर्खास्त कर दिया था, जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी।
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अक्षम संविदा चालक को नहीं कर सकते बाहर
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सड़क परिवहन निगम के स्थायी और संविदा कर्मचारी में भेद नहीं है। धारा-47 में दोनों को समान अधिकार प्राप्त हैं। नौ साल की सेवा के बाद संविदा पर तैनात चालक को अक्षम होने पर सेवा से निकाला नहीं जा सकता है। उसको वैकल्पिक नियुक्ति देने से इंकार नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि परिवहन निगम एक मॉडल नियोक्ता है, इसलिए मजबूर कर्मचारी को संविदा खत्म कर बाहर नहीं निकाला जा सकता है। न्यायमूर्ति डीके सिंह ने बांदा के सुरेश सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याची 10 जून 2005 में दुघर्टना में घायल होने के बाद अक्षम हो गया। मेडिकल बोर्ड की जांच में उसे अनफिट पाया गया। इसके बाद निगम ने उसेे गैरहाजिर रहने के आधार पर बर्खास्त कर दिया था, जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी।