{"_id":"5c38bc8bbdec2273467dbe41","slug":"41547222155-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट को फूलप्रेफ सुरक्षा दे सरकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट को फूलप्रेफ सुरक्षा दे सरकार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट को फूलप्रूफ सुरक्षा दे सरकार
0 सात जजों की पीठ ने सुरक्षा और सुविधाएं देने में देरी पर जताई नाराजगी
0 ग्राम अदालत गठन करने के लिए सरकार को जून तक मोहलत
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट की सुरक्षा में हीलाहवाली पर नाराज सात जजों की वृहदपीठ ने प्रदेश सरकार से हाईकोर्ट को फूलप्रूफ सुरक्षा (जीरो एरर सिक्योरिटी) देने केलिए कहा है। मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव गृह की मौजूदगी में पीठ ने साफ कहा कि एक माह के भीतर इसका खाका हाईकोर्ट की सुरक्षा मामलों की कमेटी के सामने रख दिया जाए। सरकार इसे कैसे अंजाम देगी यह वह जाने, मगर इससे अधिक समय नहीं दिया जाएगा।
मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर की अध्यक्ष में बैठी जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस सुधीर अग्रवाल, जस्टिस भारती सप्रू, जस्टिस पंकज मित्तल, जस्टिस शशिकांत और जस्टिस वीके नारायण की पीठ ने हाईकोर्ट में स्कैनर, बायोमेट्रिक कार्ड, डोर मेटल डिटेक्टर, सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। वृहदपीठ ने जिला न्यायालयों में भी सुरक्षा, मूलभूत सुविधाओं, स्टॉफ की नियुक्ति को लेकर विस्तृत आदेश दिए हैं। ग्राम अदालतों के गठन के लिए सरकार को जून तक की मोहलत दी है। सुनवाई 12 फरवरी को होगी।
तीन महीने में खराब हो गए करोड़ों के कैमरे
हाईकोर्ट में साढ़े छह करोड़ रुपये की लागत से लगाए गए सीसीटीवी कैमरे मुश्किल से तीन महीने ही काम कर सके। सुरक्षा समिति की जांच में पता चला कि दो मेगापिक्सल की जगह एक मेगापिक्सल के कैमरे लगाए गए। सिस्टम की स्टोरेज क्षमता भी कम थी। कैमरा लगाने वाले एजेंसी को रखरखाव का ठेका नहीं दिया गया, जिसकी वजह से मेनटेनेंस नहीं हो पाया। कोर्ट ने इसकी जांच कर जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई करने के लिए कहा है। जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने टिप्पणी की कि ‘सुरक्षा वैसे ही दी जा रही है जैसे कोट की बांह और पैंट को आधा काटकर कहा जाए सूट तैयार कर दिया है।’
विज्ञापन
जिला अदालतों के लिए 275 करोड़
अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कोर्ट को बताया कि जिला अदालतों में सुरक्षा तथा मूलभूत सुविधाओं के लिए 275 करोड़ रुपये का बजट है। एक करोड़ 75 लाख का काम हो चुका है। जिला अदालतों की टूटी बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जा रहा है। 18 जिलों में काम हो चुका है। 32 में काम जारी है। जेलों से वीडियो कांफ्रेंसिंग की की सुविधा सभी अदालतों को दे दी गई है। अबतक 11 लाख से अधिक रिमांड वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हो चुके हैं। पीठ ने कहा कि सरकार का आंकड़ा सात वर्षों का है इसे बहुत अधिक नहीं कहा जा सकता। जेलों में इंटरनेट और लीजलाइन की सुविधा दुरुस्त की जाए। जिला अदालतों में बिजली का स्वतंत्र फीडर लगाने का काम 31 मार्च तक पूरा हो जाएगा।
30 जून तक बन जाएंगीं ग्राम अदालतें
वृहदपीठ ने 113 प्रस्तावित ग्राम अदालतों में से अब तक सिर्फ चार अदालतें ही शुरू हो पाने पर हैरानी जताई। कोर्ट ने कहा कि 2008 में कानून बन गया। देश के अन्य राज्यों में ग्राम अदालतें काम कर रही हैं। इस पर मुख्य सचिव अनूप पांडेय ने आश्वासन दिया कि 30 जून 2019 तक सभी ग्राम अदालतें काम करने लगेंगी। अब तक 26 सरकारी और तीन प्राइवेट भवन इस कार्य के लिए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि सरकार जो भवन दे रही है, वह ठीक नहीं हैं। मुख्य सचिव ने कहा वह इसकी समीक्षा कर रहे हैं।
कामर्शियल कोर्ट जजों के पास काम नहीं
वृहदपीठ ने कहा कि कामर्शियल कोर्ट का गठन कर दिया गया है। इनमें पीठासीन अधिकारियों की भी नियुक्ति हो गई है मगर सरकार ने बिल्डिंग नहीं दी है। बैठने का इंतजाम नहीं होने से इनके पास काम नहीं है। मुख्य सचिव ने आश्वासन दिया है, सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है। वाहन पार्किंग के लिए 12 मंजिला भवन बनाया जा रहा है, जिसमें 3400 पार्किंग स्टॉल और 1500 अधिवक्ता चैंबर होंगे। 690 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट होगा। कोर्ट ने मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में एस्कलेटर, लिफ्ट आदि की सुविधाएं देने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
0 सात जजों की पीठ ने सुरक्षा और सुविधाएं देने में देरी पर जताई नाराजगी
0 ग्राम अदालत गठन करने के लिए सरकार को जून तक मोहलत
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट की सुरक्षा में हीलाहवाली पर नाराज सात जजों की वृहदपीठ ने प्रदेश सरकार से हाईकोर्ट को फूलप्रूफ सुरक्षा (जीरो एरर सिक्योरिटी) देने केलिए कहा है। मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव गृह की मौजूदगी में पीठ ने साफ कहा कि एक माह के भीतर इसका खाका हाईकोर्ट की सुरक्षा मामलों की कमेटी के सामने रख दिया जाए। सरकार इसे कैसे अंजाम देगी यह वह जाने, मगर इससे अधिक समय नहीं दिया जाएगा।
मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर की अध्यक्ष में बैठी जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस सुधीर अग्रवाल, जस्टिस भारती सप्रू, जस्टिस पंकज मित्तल, जस्टिस शशिकांत और जस्टिस वीके नारायण की पीठ ने हाईकोर्ट में स्कैनर, बायोमेट्रिक कार्ड, डोर मेटल डिटेक्टर, सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। वृहदपीठ ने जिला न्यायालयों में भी सुरक्षा, मूलभूत सुविधाओं, स्टॉफ की नियुक्ति को लेकर विस्तृत आदेश दिए हैं। ग्राम अदालतों के गठन के लिए सरकार को जून तक की मोहलत दी है। सुनवाई 12 फरवरी को होगी।
विज्ञापन
तीन महीने में खराब हो गए करोड़ों के कैमरे
हाईकोर्ट में साढ़े छह करोड़ रुपये की लागत से लगाए गए सीसीटीवी कैमरे मुश्किल से तीन महीने ही काम कर सके। सुरक्षा समिति की जांच में पता चला कि दो मेगापिक्सल की जगह एक मेगापिक्सल के कैमरे लगाए गए। सिस्टम की स्टोरेज क्षमता भी कम थी। कैमरा लगाने वाले एजेंसी को रखरखाव का ठेका नहीं दिया गया, जिसकी वजह से मेनटेनेंस नहीं हो पाया। कोर्ट ने इसकी जांच कर जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई करने के लिए कहा है। जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने टिप्पणी की कि ‘सुरक्षा वैसे ही दी जा रही है जैसे कोट की बांह और पैंट को आधा काटकर कहा जाए सूट तैयार कर दिया है।’
विज्ञापन
जिला अदालतों के लिए 275 करोड़
अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कोर्ट को बताया कि जिला अदालतों में सुरक्षा तथा मूलभूत सुविधाओं के लिए 275 करोड़ रुपये का बजट है। एक करोड़ 75 लाख का काम हो चुका है। जिला अदालतों की टूटी बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जा रहा है। 18 जिलों में काम हो चुका है। 32 में काम जारी है। जेलों से वीडियो कांफ्रेंसिंग की की सुविधा सभी अदालतों को दे दी गई है। अबतक 11 लाख से अधिक रिमांड वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हो चुके हैं। पीठ ने कहा कि सरकार का आंकड़ा सात वर्षों का है इसे बहुत अधिक नहीं कहा जा सकता। जेलों में इंटरनेट और लीजलाइन की सुविधा दुरुस्त की जाए। जिला अदालतों में बिजली का स्वतंत्र फीडर लगाने का काम 31 मार्च तक पूरा हो जाएगा।
30 जून तक बन जाएंगीं ग्राम अदालतें
वृहदपीठ ने 113 प्रस्तावित ग्राम अदालतों में से अब तक सिर्फ चार अदालतें ही शुरू हो पाने पर हैरानी जताई। कोर्ट ने कहा कि 2008 में कानून बन गया। देश के अन्य राज्यों में ग्राम अदालतें काम कर रही हैं। इस पर मुख्य सचिव अनूप पांडेय ने आश्वासन दिया कि 30 जून 2019 तक सभी ग्राम अदालतें काम करने लगेंगी। अब तक 26 सरकारी और तीन प्राइवेट भवन इस कार्य के लिए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि सरकार जो भवन दे रही है, वह ठीक नहीं हैं। मुख्य सचिव ने कहा वह इसकी समीक्षा कर रहे हैं।
कामर्शियल कोर्ट जजों के पास काम नहीं
वृहदपीठ ने कहा कि कामर्शियल कोर्ट का गठन कर दिया गया है। इनमें पीठासीन अधिकारियों की भी नियुक्ति हो गई है मगर सरकार ने बिल्डिंग नहीं दी है। बैठने का इंतजाम नहीं होने से इनके पास काम नहीं है। मुख्य सचिव ने आश्वासन दिया है, सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है। वाहन पार्किंग के लिए 12 मंजिला भवन बनाया जा रहा है, जिसमें 3400 पार्किंग स्टॉल और 1500 अधिवक्ता चैंबर होंगे। 690 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट होगा। कोर्ट ने मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में एस्कलेटर, लिफ्ट आदि की सुविधाएं देने का निर्देश दिया है।