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जिसे खोजा गली गली वो एसआरएन में मिला
Updated Thu, 15 Jun 2017 01:23 AM IST
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दिल्ली के लिए विशेष
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जिसे खोजा गली गली, वो एसआरएन में मिला
0 दिल्ली से आए भाई ने संजय को देखकर फिर लगाया गले
0 एंबुलेंस से ले जाया गया दिल्ली, वहां कराएंगे उपचार
इलाहाबाद (ब्यूरो)। दिल्ली से करीब चार महीने पहले गायब हुए संजय सेठी की हालत देख उसका भाई रो पड़ा। अपने को संयत कर बस वह यही बोल पाया कि जिसे वे गली-गली खोजते रहे, वह यहां एसआरएन अस्पताल में भर्ती मिला। उसे गले से लगाकर भाई नवीन रोया फिर एंबुलेंस से संजय को दिल्ली ले जाया गया।
दिल्ली के तिलकनगर से आए नवीन सेठी के मुताबिक चार महीने पहले उसका भाई संजय सेठी अचानक गायब हो गया। कुछ महीने पहले टिटनेस की चपेट में आकर उसकी मानसिक हालत बिगड़ गई। वह कब और कैसे यहां आ गया, फिलहाल पता नहीं चला। दस दिन पहले वह कहीं से घूमते हुए एसआरएन अस्पताल पहुंच गया। वहां उसकी हालत देख वार्ड ब्वाय राजकुमार ने उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया। वह नियमित संजय की देखभाल करता और दवाओं का भी इंतजाम करता। राजकुमार की मेहनत रंग लाई। तीन दिन पहले वह कुछ बोलने लायक हुआ तो राजकुमार ने उसका पता और परिवार के बारे में पूछताछ की। फोन नंबर मिलते ही उसने दिल्ली के तिलकनगर थाने में फोन कर संजय के बारे में जानकारी दी। वहां से पुलिस ने उसके घरवालों को सूचना दी तो संजय का भाई नवीन आया और उसे यहां से दिल्ली ले गया। उसने राजकुमार की मानवीय संवेदना को सलाम करते हुए धन्यवाद भी दिया। एसआरएन में दिन भर राजुकमार की ही चर्चा होती रही।
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जिसे खोजा गली गली, वो एसआरएन में मिला
0 दिल्ली से आए भाई ने संजय को देखकर फिर लगाया गले
0 एंबुलेंस से ले जाया गया दिल्ली, वहां कराएंगे उपचार
इलाहाबाद (ब्यूरो)। दिल्ली से करीब चार महीने पहले गायब हुए संजय सेठी की हालत देख उसका भाई रो पड़ा। अपने को संयत कर बस वह यही बोल पाया कि जिसे वे गली-गली खोजते रहे, वह यहां एसआरएन अस्पताल में भर्ती मिला। उसे गले से लगाकर भाई नवीन रोया फिर एंबुलेंस से संजय को दिल्ली ले जाया गया।
दिल्ली के तिलकनगर से आए नवीन सेठी के मुताबिक चार महीने पहले उसका भाई संजय सेठी अचानक गायब हो गया। कुछ महीने पहले टिटनेस की चपेट में आकर उसकी मानसिक हालत बिगड़ गई। वह कब और कैसे यहां आ गया, फिलहाल पता नहीं चला। दस दिन पहले वह कहीं से घूमते हुए एसआरएन अस्पताल पहुंच गया। वहां उसकी हालत देख वार्ड ब्वाय राजकुमार ने उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया। वह नियमित संजय की देखभाल करता और दवाओं का भी इंतजाम करता। राजकुमार की मेहनत रंग लाई। तीन दिन पहले वह कुछ बोलने लायक हुआ तो राजकुमार ने उसका पता और परिवार के बारे में पूछताछ की। फोन नंबर मिलते ही उसने दिल्ली के तिलकनगर थाने में फोन कर संजय के बारे में जानकारी दी। वहां से पुलिस ने उसके घरवालों को सूचना दी तो संजय का भाई नवीन आया और उसे यहां से दिल्ली ले गया। उसने राजकुमार की मानवीय संवेदना को सलाम करते हुए धन्यवाद भी दिया। एसआरएन में दिन भर राजुकमार की ही चर्चा होती रही।
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