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मानदेय शिक्षिक भी प्रसूती अवकाश की हकदार
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मानदेय अध्यापिका भी प्रसूती अवकाश की हकदार
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि कोई भी अध्यापिका या कर्मचारी चाहे वह अस्थायी या मानदेय पर काम कर रही हो प्रसूती अवकाश (मैटरनिटी लीव) पाने की हकदार है। कोर्ट ने कहा कि शिक्षामित्र को अस्थायी बताकर प्रसूती अवकाश देने से इंकार करना गलत है। इससे संविधान के अनुच्छेद 42 का उल्लंघन है।
प्राथमिक विद्यालय सियरही विकास खंड नगरा बलिया प्राथमिक विद्यालय की शिक्षामित्र मनीषा सिंह की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने दिया है। याची शिक्षामित्र का कहना था कि उसने प्रसूती अवकाश के लिए खंड शिक्षा अधिकारी के समक्ष आवेदन किया था। उसका आवेदन यह कहते हुए निरस्त कर दिया गया कि याची मानदेय कर्मचारी है, इसलिए उसे अवकाश नहीं दिया जा सकता है। इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया था। कोर्ट ने सुप्रीमकोर्ट के आदेशों और अन्य न्यायिक दृष्टांतों का हवाला देते हुए कहा कि मानदेय टीचरों को प्रसूती अवकाश न देना मनमानी कार्य है और यह अनुच्छेद 42 का उल्लंघन है।
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प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि कोई भी अध्यापिका या कर्मचारी चाहे वह अस्थायी या मानदेय पर काम कर रही हो प्रसूती अवकाश (मैटरनिटी लीव) पाने की हकदार है। कोर्ट ने कहा कि शिक्षामित्र को अस्थायी बताकर प्रसूती अवकाश देने से इंकार करना गलत है। इससे संविधान के अनुच्छेद 42 का उल्लंघन है।
प्राथमिक विद्यालय सियरही विकास खंड नगरा बलिया प्राथमिक विद्यालय की शिक्षामित्र मनीषा सिंह की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने दिया है। याची शिक्षामित्र का कहना था कि उसने प्रसूती अवकाश के लिए खंड शिक्षा अधिकारी के समक्ष आवेदन किया था। उसका आवेदन यह कहते हुए निरस्त कर दिया गया कि याची मानदेय कर्मचारी है, इसलिए उसे अवकाश नहीं दिया जा सकता है। इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया था। कोर्ट ने सुप्रीमकोर्ट के आदेशों और अन्य न्यायिक दृष्टांतों का हवाला देते हुए कहा कि मानदेय टीचरों को प्रसूती अवकाश न देना मनमानी कार्य है और यह अनुच्छेद 42 का उल्लंघन है।
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