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आयोग नहीं कर सकता पीसीएस-जे में बदलाव
Updated Sun, 21 Jan 2018 01:57 AM IST
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आयोग नहीं कर सकता पीसीएस-जे परीक्षा में बदलाव
परीक्षा में बदलाव के लिए न्यायिक सेवा नियमावली में संशोधन जरूरी
यूपीपीएसी को अब तक नहीं मिला पदों का अधियाचन, उहापोह में अफसर
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
एक तरफ पीसीएस-जे परीक्षा में बदलाव की मांग को लेकर प्रतियोगी छात्र कई दिनों से हाईकोर्ट के निकट अंबेडकर चौराहे पर क्रमिक अनशन पर बैठे हैं और वहीं उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने इसमें बदलाव से हाथ खड़े कर दिए हैं। आयोग के अफसरों कहना है कि इसके लिए न्यायिक सेवा नियमावली में संशोधन करना होगा, जो हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है। आयोग को अब तक मई में प्रस्तावित पीसीएस-जे परीक्षा के लिए पदों का अधियाचन भी नहीं मिला है। ऐसे में चर्चा शुरू हो गई है कि हाईकोर्ट इस परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले सकता है।
प्रतियोगी छात्र मांग कर रहे हैं कि पीसीएस-जे परीक्षा में अंग्रेजी की तरह हिंदी का पेपर भी शामिल किया जाए। हिंदी भाषी छात्रों के साथ भेदभाव खत्म हो और अन्य प्रदेशों की भांति यहां भी परीक्षा में शामिल होने के लिए अवसर की बाध्यता को समाप्त किया जाए। इस बाबत प्रतियोगी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सचिव, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और शासन स्तर के कुछ अफसरों को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं। आयोग के अफसरों का कहना है कि प्रतियोगी जो मांग कर रहे हैं, वह आयोग या शासन स्तर से पूरी नहीं की जा सकती है। इसके लिए न्यायिक सेवा नियमावली में संशोधन की जरूरत पड़ेगी, जो केवल हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है।
अफसरों के इस रुख के बाद फिलहाल यह तय हो गया है कि आयोग या शासन स्तर से पीसीएस-जे परीक्षा में कोई बदलाव नहीं होने जा रहा। पीएसएस-जे की परीक्षा मई में प्रस्तावित है लेकिन आयोग को अब तक रिक्त पदों का अधियाचन नहीं मिला है। अधियाचन में विलंब होने के बाद अब चर्चा शुरू हो गई है कि उच्च न्यायिक सेवा परीक्षा की तरह हाईकोर्ट इस पीसीएस-जे परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी भी अपने हाथ में ले सकता है। हालांकि इसको लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुई है। अफसर फिलहाल अधियाचन मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
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नौवें दिन भी जारी रहा अनशन
इलाहाबाद। पीसीएस-जे परीक्षा में बदलाव की मांग को लेकर प्रतियोगियों का क्रमिक अनशन लगातार नौवें दिन अंबेडकर चौराहे पर जारी रहा। इस दौरान इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कई शोधार्थियों ने मौके पर आकर प्रतियोगियों के आंदोलन को समर्थन दिया। क्रमिक अनशन में रामकरन निर्मल, आशीष पटेल, प्रमोद यादव, रजनी मद्देशिया, प्रतिभा, मधु, वंदना सिंह, देवेंद्र, पंकज, प्रवेश, आशीष त्रिपाठी, नीरज गोस्वामी, गौरव सिंह, मनोज बघेल आदि मौजूद रहे।
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परीक्षा में बदलाव के लिए न्यायिक सेवा नियमावली में संशोधन जरूरी
यूपीपीएसी को अब तक नहीं मिला पदों का अधियाचन, उहापोह में अफसर
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
एक तरफ पीसीएस-जे परीक्षा में बदलाव की मांग को लेकर प्रतियोगी छात्र कई दिनों से हाईकोर्ट के निकट अंबेडकर चौराहे पर क्रमिक अनशन पर बैठे हैं और वहीं उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने इसमें बदलाव से हाथ खड़े कर दिए हैं। आयोग के अफसरों कहना है कि इसके लिए न्यायिक सेवा नियमावली में संशोधन करना होगा, जो हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है। आयोग को अब तक मई में प्रस्तावित पीसीएस-जे परीक्षा के लिए पदों का अधियाचन भी नहीं मिला है। ऐसे में चर्चा शुरू हो गई है कि हाईकोर्ट इस परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले सकता है।
प्रतियोगी छात्र मांग कर रहे हैं कि पीसीएस-जे परीक्षा में अंग्रेजी की तरह हिंदी का पेपर भी शामिल किया जाए। हिंदी भाषी छात्रों के साथ भेदभाव खत्म हो और अन्य प्रदेशों की भांति यहां भी परीक्षा में शामिल होने के लिए अवसर की बाध्यता को समाप्त किया जाए। इस बाबत प्रतियोगी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सचिव, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और शासन स्तर के कुछ अफसरों को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं। आयोग के अफसरों का कहना है कि प्रतियोगी जो मांग कर रहे हैं, वह आयोग या शासन स्तर से पूरी नहीं की जा सकती है। इसके लिए न्यायिक सेवा नियमावली में संशोधन की जरूरत पड़ेगी, जो केवल हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है।
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अफसरों के इस रुख के बाद फिलहाल यह तय हो गया है कि आयोग या शासन स्तर से पीसीएस-जे परीक्षा में कोई बदलाव नहीं होने जा रहा। पीएसएस-जे की परीक्षा मई में प्रस्तावित है लेकिन आयोग को अब तक रिक्त पदों का अधियाचन नहीं मिला है। अधियाचन में विलंब होने के बाद अब चर्चा शुरू हो गई है कि उच्च न्यायिक सेवा परीक्षा की तरह हाईकोर्ट इस पीसीएस-जे परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी भी अपने हाथ में ले सकता है। हालांकि इसको लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुई है। अफसर फिलहाल अधियाचन मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
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नौवें दिन भी जारी रहा अनशन
इलाहाबाद। पीसीएस-जे परीक्षा में बदलाव की मांग को लेकर प्रतियोगियों का क्रमिक अनशन लगातार नौवें दिन अंबेडकर चौराहे पर जारी रहा। इस दौरान इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कई शोधार्थियों ने मौके पर आकर प्रतियोगियों के आंदोलन को समर्थन दिया। क्रमिक अनशन में रामकरन निर्मल, आशीष पटेल, प्रमोद यादव, रजनी मद्देशिया, प्रतिभा, मधु, वंदना सिंह, देवेंद्र, पंकज, प्रवेश, आशीष त्रिपाठी, नीरज गोस्वामी, गौरव सिंह, मनोज बघेल आदि मौजूद रहे।