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बैंक ऑफ इंडिया पर दो लाख रुनपये हर्जाना
Updated Sat, 05 Aug 2017 09:56 PM IST
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बैंक ऑफ इंडिया पर दो लाख रुपये हर्जाना
डीआरटी में फर्जी कागजात लगाने पर हुई कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
ऋण वसूली अधिकरण (डीआरटी) बैंक ऑफ इंडिया की इलाहाबाद सिविल लाइंस शाखा पर दो लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। डीआरटी ने बैंक के दो अधिकारियों एजाज सैय्यद हुसैन और दिनेश सिंह के खिलाफ विभागीय जांच करने के भी आदेश दिए हैं। कूटरचित कागजात तैयार करने में इनकी भूमिका बताई जा रही है।
इसके साथ ही पीठासीन अधिकारी विनय कुमार गोयल ने मेसर्स अमर स्टोर वर्क्स और संजय कुमार निषाद के खिलाफ बैंक के नोटिस और बंधक संपत्ति की नीलामी की कार्रवाई को रद्द कर दिया है। अधिकरण ने बैंक को छूट दी है कि वह सरफेसी एक्ट के तहत नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है। बैंक को मुकदमे का खर्च भी देना होगा। हर्जाने की राशि नेशनल डिफेंस खाते में जमा करने का आदेश दिया है। बैंक अधिकारियों ने बंधक संपत्ति की नीलामी कराने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराए और अधिकरण में कहा कि पुराने कागजात खो गए हैं इसलिए नया दस्तावेज तैयार किया गया है। उनका झूठ पकड़ा गया और पता चला कि ऐसा कोई दस्तावेज पूर्व में था ही नहीं।
अधिकरण का कहना है कि ऋण वसूली के पहले दीवानी मुकदमा दाखिल करना पड़ता था जिसमें काफी समय लगता था और खर्च भी अधिक होता था। इससे बैंक को नुकसान होता था। सरकार ने नए कानून बनाकर बैंकों को व्यापक अधिकार दिए हैं। इससे कम समय में ऋण वसूली हो सकती है। बैंक अधिकारियों ने अपनी गलती सुधारने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए। ऐसा करना देश के विरुद्ध अपराध है। इससे बैंक की साख को भी धक्का लगा है। अधिकरण ने बैंक के सीएमडी को दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
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डीआरटी में फर्जी कागजात लगाने पर हुई कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
ऋण वसूली अधिकरण (डीआरटी) बैंक ऑफ इंडिया की इलाहाबाद सिविल लाइंस शाखा पर दो लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। डीआरटी ने बैंक के दो अधिकारियों एजाज सैय्यद हुसैन और दिनेश सिंह के खिलाफ विभागीय जांच करने के भी आदेश दिए हैं। कूटरचित कागजात तैयार करने में इनकी भूमिका बताई जा रही है।
इसके साथ ही पीठासीन अधिकारी विनय कुमार गोयल ने मेसर्स अमर स्टोर वर्क्स और संजय कुमार निषाद के खिलाफ बैंक के नोटिस और बंधक संपत्ति की नीलामी की कार्रवाई को रद्द कर दिया है। अधिकरण ने बैंक को छूट दी है कि वह सरफेसी एक्ट के तहत नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है। बैंक को मुकदमे का खर्च भी देना होगा। हर्जाने की राशि नेशनल डिफेंस खाते में जमा करने का आदेश दिया है। बैंक अधिकारियों ने बंधक संपत्ति की नीलामी कराने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराए और अधिकरण में कहा कि पुराने कागजात खो गए हैं इसलिए नया दस्तावेज तैयार किया गया है। उनका झूठ पकड़ा गया और पता चला कि ऐसा कोई दस्तावेज पूर्व में था ही नहीं।
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अधिकरण का कहना है कि ऋण वसूली के पहले दीवानी मुकदमा दाखिल करना पड़ता था जिसमें काफी समय लगता था और खर्च भी अधिक होता था। इससे बैंक को नुकसान होता था। सरकार ने नए कानून बनाकर बैंकों को व्यापक अधिकार दिए हैं। इससे कम समय में ऋण वसूली हो सकती है। बैंक अधिकारियों ने अपनी गलती सुधारने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए। ऐसा करना देश के विरुद्ध अपराध है। इससे बैंक की साख को भी धक्का लगा है। अधिकरण ने बैंक के सीएमडी को दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
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