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अप्राकृतिक यौनाचार के आरोप से युवक बरी
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अप्राकृतिक यौनाचार के आरोप से युवक बरी
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टांडा रामपुर के साजिद को अप्राकृतिक यौनाचार के आरोप से बरी कर दिया है और सत्र न्यायालय द्वारा सुनाई गई 10 साल के जेल की सजा रद्द कर दी है। इन पर 11 साल के बच्चे के साथ अप्राकृतिक यौनाचार का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। शिकायतकर्ता के बयान बदलने और आरोप के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं है। धारा 164 के बयान के आधार पर सजा तभी दी जानी चाहिए जब बयान के समर्थन में साक्ष्य हों। यह आदेश न्यायमूर्ति पीके श्रीवास्तव ने साजिद की अपील को स्वीकार करते हुए दिया है। अपील पर अधिवक्ता एके निगम ने बहस की। इनका कहना था कि सत्र न्यायालय ने साक्ष्यों को समझने में गलती की। विरोधाभाषी बयानों के बावजूद ठोस साक्ष्य न होने पर भी सजा सुनाई।
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अप्राकृतिक यौनाचार के आरोप से युवक बरी
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टांडा रामपुर के साजिद को अप्राकृतिक यौनाचार के आरोप से बरी कर दिया है और सत्र न्यायालय द्वारा सुनाई गई 10 साल के जेल की सजा रद्द कर दी है। इन पर 11 साल के बच्चे के साथ अप्राकृतिक यौनाचार का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। शिकायतकर्ता के बयान बदलने और आरोप के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं है। धारा 164 के बयान के आधार पर सजा तभी दी जानी चाहिए जब बयान के समर्थन में साक्ष्य हों। यह आदेश न्यायमूर्ति पीके श्रीवास्तव ने साजिद की अपील को स्वीकार करते हुए दिया है। अपील पर अधिवक्ता एके निगम ने बहस की। इनका कहना था कि सत्र न्यायालय ने साक्ष्यों को समझने में गलती की। विरोधाभाषी बयानों के बावजूद ठोस साक्ष्य न होने पर भी सजा सुनाई।