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आवेदन की अंतिम तिथि को पूरी होनी चाहिए अर्हता
Updated Sun, 01 Apr 2018 01:52 AM IST
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आवेदन की अंतिम तिथि को पूरी होनी चाहिए अर्हता
शासनादेश जारी होने की तारीख पर अर्हता मांगना अनुचित
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी नियुक्ति में मांगी गई अर्हता उस नियुक्ति हेतु आवेदन की अंतिम तिथि तक पूरी होनी चाहिए, न कि नियुक्ति का शासनादेश जारी होने की तिथि पर। इस आदेश के आलोक में कोर्ट ने 16448 सहायक अध्यापक भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों के मामले को निर्णीत करने का आदेश दिया है। सुशील कुमार यादव और अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने यह आदेश दिया।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह के मुताबिक याची की नियुक्ति 16448 सहायक अध्यापक भर्ती में हुई थी। नियुक्ति के दो बाद ही उसे बीएसए की ओर से नोटिस मिला कि उसकी बीटीसी की अर्हता 16 जून 2016 को पूरी नहीं थी। जबकि इस तिथि को जारी शासनादेश में स्पष्ट है कि 16 जून को अभ्यर्थी की न्यूनतम अर्हता पूरी होनी चाहिए। याची का वेतन रोक दिया गया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
अधिवक्ता का कहना था कि शासनादेश 16 जून 2016 को जारी हुआ जबकि आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2016 थी। इससे पूर्व याची को 24 जून 2016 को बीटीसी सर्टिफिकेट मिल चुका था। इसलिए यह माना जाएगा कि आवेदन करते समय याची के पास न्यूनतम अर्हता थी। कोर्ट ने दलील स्वीकार करते हुए कहा कि याची आवेदन की अंतिम तिथि से पूर्व न्यूनतम अर्हता प्राप्त कर चुका था। बीएसए को आदेश दिया है इस निर्णय के आलोक में याची के प्रकरण पर विचार कर निर्णय लिया जाए।
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आवेदन की अंतिम तिथि को पूरी होनी चाहिए अर्हता
शासनादेश जारी होने की तारीख पर अर्हता मांगना अनुचित
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी नियुक्ति में मांगी गई अर्हता उस नियुक्ति हेतु आवेदन की अंतिम तिथि तक पूरी होनी चाहिए, न कि नियुक्ति का शासनादेश जारी होने की तिथि पर। इस आदेश के आलोक में कोर्ट ने 16448 सहायक अध्यापक भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों के मामले को निर्णीत करने का आदेश दिया है। सुशील कुमार यादव और अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने यह आदेश दिया।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह के मुताबिक याची की नियुक्ति 16448 सहायक अध्यापक भर्ती में हुई थी। नियुक्ति के दो बाद ही उसे बीएसए की ओर से नोटिस मिला कि उसकी बीटीसी की अर्हता 16 जून 2016 को पूरी नहीं थी। जबकि इस तिथि को जारी शासनादेश में स्पष्ट है कि 16 जून को अभ्यर्थी की न्यूनतम अर्हता पूरी होनी चाहिए। याची का वेतन रोक दिया गया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
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अधिवक्ता का कहना था कि शासनादेश 16 जून 2016 को जारी हुआ जबकि आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2016 थी। इससे पूर्व याची को 24 जून 2016 को बीटीसी सर्टिफिकेट मिल चुका था। इसलिए यह माना जाएगा कि आवेदन करते समय याची के पास न्यूनतम अर्हता थी। कोर्ट ने दलील स्वीकार करते हुए कहा कि याची आवेदन की अंतिम तिथि से पूर्व न्यूनतम अर्हता प्राप्त कर चुका था। बीएसए को आदेश दिया है इस निर्णय के आलोक में याची के प्रकरण पर विचार कर निर्णय लिया जाए।
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