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ट्रिपलआईटी
Updated Fri, 29 Sep 2017 08:31 PM IST
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सोच बदलने से शुरू होते हैं नए काम
0 ट्रिपलआईटी में आईईईई के तीन दिवसीय सम्मेलन में वक्ताओं ने प्रस्तुत किए शोध पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियर्स (आईईईई) की ओर से तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुक्रवार को पूरी हो गई। इसमें देश भर के 80 उच्च शिक्षण संस्थानों से 320 युवा इंजीनियर्स ने भागीदारी की। अखिल भारतीय विद्यार्थी-युवा प्रोफेशनल महिला इंजीनियर्स के सम्मेलन में अंतिम दिन व्याख्यान, कार्यशाला और तकनीकी प्रतियोगिताएं हुईं। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि सोच बदलने से नए काम शुरू होते हैं।
समापन के मौके पर ट्रिपलआईटी के निदेशक प्रो. पी. नागभूषण ने इंजीनियर की एक प्रमुख व्यक्ति से तुलना करते हुए, उसे अपनी जिम्मेदारियों से अवगत कराया। उन्होंने उभरते इंजीनियर और स्थापित पेशेवरों के बीच खाई भरने की बात कही। सम्मेलन में गरिमा विशाल ने ‘सोच बदलने से काम शुरू होता है’ विषय पर अपनी बात रखी। कहा, विश्व में जो भी शोध एवं अनुसंधान कार्य हो रहे हैं, उसके पीछे वैज्ञानिकों की सोच ही है।
सुविधा त्रिपाठी ने समूह परिचर्चा में ‘नवाचार और मानवीय गतिविधियों से अग्रणी महिलाएं’ विषय पर अपनी बात रखी। डॉ माधवेंद्र मिश्र ने नवाचार में नैतिकता पर बात रखी। डॉ. अमित कुमार फॉरेसिंक वैज्ञानिक उद्यमी ने ‘डीएनए हैकिंग: सबसे बड़े साइबर हमलों के खतरों’ पर व्याख्यान दिया। मीनाक्षी इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी बंगलूरू की अधिष्ठाता (शोध एवं विकास) प्रो. झरना मजूमदार ने ‘महिला शिक्षा और अधिकारिता और जीवन का समीकरण संतुलन’ विषय पर चर्चा की। इस मौके पर अनुज जैन, डॉ. जय कुमार सिंगाराम सहित कई वैज्ञानिक शामिल रहे। डॉ. राहुल काला के निर्देशन में युवा प्रोफेशनल ने तकनीकी पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया।
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0 ट्रिपलआईटी में आईईईई के तीन दिवसीय सम्मेलन में वक्ताओं ने प्रस्तुत किए शोध पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियर्स (आईईईई) की ओर से तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुक्रवार को पूरी हो गई। इसमें देश भर के 80 उच्च शिक्षण संस्थानों से 320 युवा इंजीनियर्स ने भागीदारी की। अखिल भारतीय विद्यार्थी-युवा प्रोफेशनल महिला इंजीनियर्स के सम्मेलन में अंतिम दिन व्याख्यान, कार्यशाला और तकनीकी प्रतियोगिताएं हुईं। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि सोच बदलने से नए काम शुरू होते हैं।
समापन के मौके पर ट्रिपलआईटी के निदेशक प्रो. पी. नागभूषण ने इंजीनियर की एक प्रमुख व्यक्ति से तुलना करते हुए, उसे अपनी जिम्मेदारियों से अवगत कराया। उन्होंने उभरते इंजीनियर और स्थापित पेशेवरों के बीच खाई भरने की बात कही। सम्मेलन में गरिमा विशाल ने ‘सोच बदलने से काम शुरू होता है’ विषय पर अपनी बात रखी। कहा, विश्व में जो भी शोध एवं अनुसंधान कार्य हो रहे हैं, उसके पीछे वैज्ञानिकों की सोच ही है।
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सुविधा त्रिपाठी ने समूह परिचर्चा में ‘नवाचार और मानवीय गतिविधियों से अग्रणी महिलाएं’ विषय पर अपनी बात रखी। डॉ माधवेंद्र मिश्र ने नवाचार में नैतिकता पर बात रखी। डॉ. अमित कुमार फॉरेसिंक वैज्ञानिक उद्यमी ने ‘डीएनए हैकिंग: सबसे बड़े साइबर हमलों के खतरों’ पर व्याख्यान दिया। मीनाक्षी इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी बंगलूरू की अधिष्ठाता (शोध एवं विकास) प्रो. झरना मजूमदार ने ‘महिला शिक्षा और अधिकारिता और जीवन का समीकरण संतुलन’ विषय पर चर्चा की। इस मौके पर अनुज जैन, डॉ. जय कुमार सिंगाराम सहित कई वैज्ञानिक शामिल रहे। डॉ. राहुल काला के निर्देशन में युवा प्रोफेशनल ने तकनीकी पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया।
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