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Prayagraj News: पांच गोशालाओं में 1195 गोवंश, फिर भी खेतों में फसल चौपट
Tue, 18 Aug 2026 01:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Tue, 18 Aug 2026 01:59 AM IST
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गोवंशों के संरक्षण के लिए सरकारी स्तर पर इंतजाम और खर्च के बावजूद लावारिस गोवंश किसानों और राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं। ब्लॉक क्षेत्र की पांच गोशालाओं में 1195 गोवंश संरक्षित हैं। इनकी देखरेख पर हर माह लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके अलावा 125 गोवंशों को क्षेत्र के 75-80 किसानों को अनुबंध पर सौंपा गया है।
किसानों को प्रत्येक गोवंश की देखरेख के लिए 50 रुपये प्रतिदिन दिए जाते हैं। इसके बावजूद लावारिस गोवंश खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद कर रहे हैं और रात में सड़कों पर झुंड बनाकर हादसों का खतरा पैदा कर रहे हैं। देवरी, मांडा खास, पियरी, ऊंचडीह और केड़वर गांव की गोशालाओं में क्रमश: करीब 317, 325, 200, 170 और 183 गोवंश हैं। गोशालाओं की देखरेख की जिम्मेदारी पंचायतीराज और पशु चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों के साथ राजस्व, कृषि विभाग के अधिकारियों और ग्राम प्रधानों को दी गई है। इसके बावजूद लावारिस गोवंशों पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है।
किसानों का कहना है कि फसल बचाने के लिए उन्हें रातभर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। गोशालाओं में संरक्षण की व्यवस्था होने के बावजूद लावारिस गोवंशों से निजात न मिलने से किसानों में नाराजगी है। समाजसेवी विपिन पांडेय, संजय शुक्ल और लालसाहब चौबे ने लावारिस गोवंशों को गोशालाओं में संरक्षित कराने और सड़कों पर उनके जमावड़े पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की है। बीडीओ अमित सिंह ने कहा कि लावारिस गोवंशों की जांच कराकर उन्हें चिह्नित किया जाएगा और गोशाला पहुंचाया जाएगा।
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किसानों को प्रत्येक गोवंश की देखरेख के लिए 50 रुपये प्रतिदिन दिए जाते हैं। इसके बावजूद लावारिस गोवंश खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद कर रहे हैं और रात में सड़कों पर झुंड बनाकर हादसों का खतरा पैदा कर रहे हैं। देवरी, मांडा खास, पियरी, ऊंचडीह और केड़वर गांव की गोशालाओं में क्रमश: करीब 317, 325, 200, 170 और 183 गोवंश हैं। गोशालाओं की देखरेख की जिम्मेदारी पंचायतीराज और पशु चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों के साथ राजस्व, कृषि विभाग के अधिकारियों और ग्राम प्रधानों को दी गई है। इसके बावजूद लावारिस गोवंशों पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है।
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किसानों का कहना है कि फसल बचाने के लिए उन्हें रातभर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। गोशालाओं में संरक्षण की व्यवस्था होने के बावजूद लावारिस गोवंशों से निजात न मिलने से किसानों में नाराजगी है। समाजसेवी विपिन पांडेय, संजय शुक्ल और लालसाहब चौबे ने लावारिस गोवंशों को गोशालाओं में संरक्षित कराने और सड़कों पर उनके जमावड़े पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की है। बीडीओ अमित सिंह ने कहा कि लावारिस गोवंशों की जांच कराकर उन्हें चिह्नित किया जाएगा और गोशाला पहुंचाया जाएगा।
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