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धांगड़ और धनगर जाति पर हाईकोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण
Updated Tue, 12 Dec 2017 01:37 AM IST
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धांगड़ या धनगर जाति पर हाईकोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण
यूपी में गलत जाति प्रमाणपत्र देने का आरोप, बढ़ सकती है सरकारी नौकरी वालों की मुश्किल
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
सूबे में अनुसूचित जाति के तहत आने वाली धांगड़ या धनगर जाति पर हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। इन जाति का जाति प्रमाणपत्र गलत तरीके से जारी करने का आरोप है। सोशल डेवलपमेंट एंड वेलफेयर सोसाइटी की जनहित याचिका में कहा गया है कि सूबे में उच्च पदों से लेकर निचले दर्जे तक तमाम लोगों इस प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी कर रहे हैं जबकि प्रदेश सरकार गलत तरीके से प्रमाणपत्र जारी कर रही है।
याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति एमके गुप्ता की पीठ ने प्रदेश और केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या इन दोनों अलग-अलग जातियों को लेकर जारी एससी प्रमाणपत्र के विवाद का मामला सरकार के समक्ष विचाराधीन है। याचिका में कहा गया है कि संविधान के तहत प्रेसीडेंसियल आर्डर में एससी प्रमाणपत्र के लिए हिंदी में धांगड़ और अंग्रेजी में धनगर लिखा जाता है। जबकि उत्तर प्रदेश में तहसीलदार प्रमाणपत्र जारी करते समय धांगड़ के बजाए धनगर का प्रमाणपत्र जारी कर रहे हैं। प्रेसिंडेंसियल आर्डर में उल्लिखित जाति से इतर तहसीलदार को अपने मन से शब्द लिखकर जाति प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार नहीं है। इस प्रकार से जारी प्रमाणपत्रों के आधार पर बहुत से लोग सरकारी नौकरी कर रहे हैं।
कोर्ट का कहना था कि प्रेसिडेंसियल आर्डर में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ का अधिकार राज्य सरकार को नहीं है। केंद्र और प्रदेश सरकार को इस संबंध में अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।
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यूपी में गलत जाति प्रमाणपत्र देने का आरोप, बढ़ सकती है सरकारी नौकरी वालों की मुश्किल
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
सूबे में अनुसूचित जाति के तहत आने वाली धांगड़ या धनगर जाति पर हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। इन जाति का जाति प्रमाणपत्र गलत तरीके से जारी करने का आरोप है। सोशल डेवलपमेंट एंड वेलफेयर सोसाइटी की जनहित याचिका में कहा गया है कि सूबे में उच्च पदों से लेकर निचले दर्जे तक तमाम लोगों इस प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी कर रहे हैं जबकि प्रदेश सरकार गलत तरीके से प्रमाणपत्र जारी कर रही है।
याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति एमके गुप्ता की पीठ ने प्रदेश और केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या इन दोनों अलग-अलग जातियों को लेकर जारी एससी प्रमाणपत्र के विवाद का मामला सरकार के समक्ष विचाराधीन है। याचिका में कहा गया है कि संविधान के तहत प्रेसीडेंसियल आर्डर में एससी प्रमाणपत्र के लिए हिंदी में धांगड़ और अंग्रेजी में धनगर लिखा जाता है। जबकि उत्तर प्रदेश में तहसीलदार प्रमाणपत्र जारी करते समय धांगड़ के बजाए धनगर का प्रमाणपत्र जारी कर रहे हैं। प्रेसिंडेंसियल आर्डर में उल्लिखित जाति से इतर तहसीलदार को अपने मन से शब्द लिखकर जाति प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार नहीं है। इस प्रकार से जारी प्रमाणपत्रों के आधार पर बहुत से लोग सरकारी नौकरी कर रहे हैं।
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कोर्ट का कहना था कि प्रेसिडेंसियल आर्डर में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ का अधिकार राज्य सरकार को नहीं है। केंद्र और प्रदेश सरकार को इस संबंध में अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।
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