{"_id":"5a19bde74f1c1b86698bdd6a","slug":"111511636455-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुजुर्ग बोले, पहले मतदान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुजुर्ग बोले, पहले मतदान
Updated Sun, 26 Nov 2017 12:30 AM IST
विज्ञापन
सबसे पहले मतदान, फिर गंगा स्नान
0 बोले बुजुर्ग, आज भी पहले वोटर जैसा उत्साह, छुट्टी का दिन नहीं मतदान
इलाहाबाद। पहरुए सजग हों तो लोकतंत्र भी मजबूत होगा और इसे साबित करते हैं, लोकतंत्र के ऐसे पहरुए जिनके लिए मतदान किसी पवित्र धार्मिक अनुष्ठान से कम नहीं। निकाय चुनाव से लेकर लोकसभा के चुनाव तक में सक्रिय रूप से मतदान करने वाले और जीवन के तकरीबन आठ दशक पूरे कर चुके वरिष्ठ नागरिकों से बात हुई तो उनके मन में ऐसा ही भाव दिखा। मतदान के प्रति उनकी यह सजगता हर उम्र के मतदाताओं के लिए सीख है।
जीवन की पिच पर शतक लगा चुकीं 103 बरस की गौरी पाठशाला की वरिष्ठ शिक्षिका रहीं उर्मिला मालवीय कहती हैं, मतदान हमारा नैतिक कर्तव्य है। वोटर बनने के बाद से अब तक मतदान करना प्राथमिकता में शामिल रहा। पूरे परिवार के साथ पोलिंग बूथ तक जाना मेरे लिए किसी उत्सव से कम नहीं रहा। बिना लापरवाही मतदान केंद्र तक जरूर जाएं, तमाम कामों के बीच मतदान सबसे ज्यादा जरूरी है।
यूनानी मेडिकल कॉलेज से रिटायर बादशाही मंडी के रहने वाले 88 वर्षीय मोहम्मद फारुक बोले, मतदान जिंदगी के उसूलों में शिद्तत से शामिल है। कोशिश रही कि हमेशा पहली पंक्ति में शामिल होकर मतदान करें। मतदान वाले दिन परिवार से सभी मतदाताओं को बूथ तक भेजने केलिए प्रेरित करता रहता हूं। ध्यान रहे, यह छुट्टी का दिन नहीं है।
विज्ञापन
दारागंज निवासी वरिष्ठ साहित्यकार नरेश मिश्र तो छूटते ही बोले, मतदान के लिए हमेशा ही सजगता रही। आधी शताब्दी से ज्यादा समय तक नियमित गंगा स्नान के लिए जाता रहा हूं। इसी तरह मतदान की शुरुआत होते ही वोट डालना लक्ष्य रहा। ऐसे में मतदान वाले दिन तो पहले मतदान, फिर गंगा स्नान। लोकतंत्र के प्रति हमेशा आस्था रही है, आज 84 बरस की उम्र में भी मेरे लिए मतदान किसी अनुष्ठान की तरह ही है।
जीवन के आठ दशक पूरे कर रहे शास्त्रीनगर निवासी और आर्य समाज अतरसुइया के महामंत्री डॉ.बीपी सागर के लिए मतदान आज भी उतना ही अहम है, जितना वोटर बनने पर पहली बार मतदान करते समय था। आज भी कोशिश होती है कि तमाम काम छोड़कर सबसे पहले मतदान को जाएं। यह हमारी प्राथमिकता में शामिल होना चाहिए। पहले बूथ तक जाएं, फिर दूसरे जरूरी काम करें।
विज्ञापन
0 बोले बुजुर्ग, आज भी पहले वोटर जैसा उत्साह, छुट्टी का दिन नहीं मतदान
इलाहाबाद। पहरुए सजग हों तो लोकतंत्र भी मजबूत होगा और इसे साबित करते हैं, लोकतंत्र के ऐसे पहरुए जिनके लिए मतदान किसी पवित्र धार्मिक अनुष्ठान से कम नहीं। निकाय चुनाव से लेकर लोकसभा के चुनाव तक में सक्रिय रूप से मतदान करने वाले और जीवन के तकरीबन आठ दशक पूरे कर चुके वरिष्ठ नागरिकों से बात हुई तो उनके मन में ऐसा ही भाव दिखा। मतदान के प्रति उनकी यह सजगता हर उम्र के मतदाताओं के लिए सीख है।
जीवन की पिच पर शतक लगा चुकीं 103 बरस की गौरी पाठशाला की वरिष्ठ शिक्षिका रहीं उर्मिला मालवीय कहती हैं, मतदान हमारा नैतिक कर्तव्य है। वोटर बनने के बाद से अब तक मतदान करना प्राथमिकता में शामिल रहा। पूरे परिवार के साथ पोलिंग बूथ तक जाना मेरे लिए किसी उत्सव से कम नहीं रहा। बिना लापरवाही मतदान केंद्र तक जरूर जाएं, तमाम कामों के बीच मतदान सबसे ज्यादा जरूरी है।
विज्ञापन
यूनानी मेडिकल कॉलेज से रिटायर बादशाही मंडी के रहने वाले 88 वर्षीय मोहम्मद फारुक बोले, मतदान जिंदगी के उसूलों में शिद्तत से शामिल है। कोशिश रही कि हमेशा पहली पंक्ति में शामिल होकर मतदान करें। मतदान वाले दिन परिवार से सभी मतदाताओं को बूथ तक भेजने केलिए प्रेरित करता रहता हूं। ध्यान रहे, यह छुट्टी का दिन नहीं है।
विज्ञापन
दारागंज निवासी वरिष्ठ साहित्यकार नरेश मिश्र तो छूटते ही बोले, मतदान के लिए हमेशा ही सजगता रही। आधी शताब्दी से ज्यादा समय तक नियमित गंगा स्नान के लिए जाता रहा हूं। इसी तरह मतदान की शुरुआत होते ही वोट डालना लक्ष्य रहा। ऐसे में मतदान वाले दिन तो पहले मतदान, फिर गंगा स्नान। लोकतंत्र के प्रति हमेशा आस्था रही है, आज 84 बरस की उम्र में भी मेरे लिए मतदान किसी अनुष्ठान की तरह ही है।
जीवन के आठ दशक पूरे कर रहे शास्त्रीनगर निवासी और आर्य समाज अतरसुइया के महामंत्री डॉ.बीपी सागर के लिए मतदान आज भी उतना ही अहम है, जितना वोटर बनने पर पहली बार मतदान करते समय था। आज भी कोशिश होती है कि तमाम काम छोड़कर सबसे पहले मतदान को जाएं। यह हमारी प्राथमिकता में शामिल होना चाहिए। पहले बूथ तक जाएं, फिर दूसरे जरूरी काम करें।