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Aligarh: प्यार के लिए पति की हत्या में पत्नी-ममेरे साले को उम्रकैद, मां के खिलाफ बेटे की गवाही बनी सजा का आधार

Tue, 16 Dec 2025 01:13 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Tue, 16 Dec 2025 01:13 PM IST
सार

रवेंद्र की शादी को 14 वर्ष हुए थे। उस पर चार बच्चे थे। पत्नी छोटे दोनों बच्चों को लेकर अपनी ननिहाल में किराये पर रहती थी। ससुराल कभी कभार आती थी। मां के खिलाफ बेटे ने गवाही दी कि मां के मामा से संबंध थे। उन संबंधों व मुआवजे में मिली रकम को हड़पने के लिए रवेंद्र की हत्या की गई।

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Wife and cousin get life imprisonment for husband murder
सजा होने के बाद अदालत से जेल जाते हुए महिला और युवक - फोटो : संवाद

विस्तार

अलीगढ़ के इगलास में एक दशक पहले संपत्ति व प्यार की खातिर पति रवेंद्र की हत्या की दोषी पत्नी लतेश व ममेरे साले संदीप (कथित प्रेमी) को उम्रकैद से दंडित किया गया है। साथ में 35-35 हजार रुपये अर्थदंड भी नियत किया गया है। यह निर्णय एडीजे प्रथम प्रतिभा सक्सेना की अदालत से सुनाया गया है।

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अभियोजन पक्ष के अनुसार यह रिपोर्ट दो जनवरी 2015 को इगलास थाने में बुलंदशहर सिकंदराबाद के तालबपुर कनकपुर के सुरेश ने दर्ज कराई थी। इसमें बताया गया कि उसका छोटा भाई रवेंद्र उर्फ रवली 28 दिसंबर 2014 को अपनी पत्नी लतेश व ममेरे साले शिवपुरी इगलास के संदीप संग अपने दो छोटे बच्चों सुमित व चंचल को लेकर इगलास गया था। उसके पास एक लाख रुपये था। अगले दिन लतेश दोनों बच्चों को लेकर गांव वापस आ गई, लेकिन उसका भाई नहीं आया।
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जब लतेश से पूछा तो उसने बताया कि किसी काम से रुक गए हैं। आ जाएंगे। अगले दिन भी रवेंद्र के न आने पर उसकी खोज शुरू की गई। एक जनवरी को इगलास जाकर पुलिस को जानकारी दी गई। काफी खोजने पर जब कुछ पता नहीं चला तब पुलिस को तहरीर देकर संदीप, लतेश व अपने गांव के एक अन्य व्यक्ति पर रुपये हड़पने की नीयत से रवेंद्र को गायब करने का अंदेशा जताकर आरोप लगाया।
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तीन जनवरी की सुबह रवेंद्र का बोरे में बंद शव इगलास मंडी के पीछे खाली खेत से बरामद किया। साथ में लतेश व संदीप को भी पकड़ लिया। दोनों से पूछताछ में रवेंद्र की हत्या कर शव छिपाना उजागर हुआ। रिपोर्ट में जो एक अन्य व्यक्ति नामजद किया था, उसकी भूमिका उजागर न होने पर पुलिस विवेचना में लतेश व संदीप के खिलाफ चार्जशीट दी गई। इसी चार्जशीट पर सत्र परीक्षण में साक्ष्यों व गवाही के आधार पर लतेश व संदीप को दोषी करार देकर सजा सुनाई है।

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मां के खिलाफ बेटे की गवाही बनी सजा का आधार

अभियोजन पक्ष के अनुसार इस घटना में कुल छह गवाह पेश किए गए। इनमें वादी मृतक का बड़ा भाई, घटना के समय मां-पिता के साथ रहा नौ वर्ष का बेटा सुमित के अलावा चार पुलिस के गवाह व चिकित्सक रहे। वादी ने गवाही दी कि उन दोनों भाइयों के हिस्से में गांव में 33 बीघा जमीन थी। इसमें से रवेंद्र की भूमि सरकारी अधिग्रहण में चली गई थी। इसके बदले उसे करीब 30 लाख रुपया मिला। इस रकम से उसने अपनी पत्नी के कहने पर उसके ननिहाल इगलास में एक प्लॉट पत्नी के नाम से खरीदा था।

रवेंद्र की शादी को 14 वर्ष हुए थे। उस पर चार बच्चे थे। पत्नी छोटे दोनों बच्चों को लेकर अपनी ननिहाल में किराये पर रहती थी। ससुराल कभी कभार आती थी। उसने गवाही दी कि लतेश के संदीप से संबंध थे। उन संबंधों व मुआवजे में मिली रकम को हड़पने के लिए ये हत्या की गई। वहीं बेटे संदीप ने बताया कि वह खुद से बड़ी बहन चंचल के साथ इगलास में मामा के पास किराये पर रहते थे। बगल के प्लॉट में संदीप मामा झोपड़ी में रहते थे।

घटना वाली रात मां व संदीप मामा ने पापा को लोहे की वजनी वस्तु से पीटा था व गर्दन काटी थी। मां ने भी उनको पीटा था। जब उसने अपनी आंखों से यह सब देखा तो उसे भी धमका दिया। बाद में एक कार में कुछ नकाबपोश लोग आए और शव ले गए। इसके बाद मां व संदीप मामा झोपड़ी में एक साथ सोये थे। दोनों गवाही सजा का आधार मानी गईं। अब चारों बच्चे ताऊ के पास रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।

अभियोजन ने की थी मृत्यु दंड की मांग

अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी मेपे सिंह के अनुसार उन्होंने अदालत में इसे गंभीर अपराध करार देते हुए दोनों के लिए मृत्यु दंड की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने इसे गंभीर अपराध तो माना, लेकिन दोनों को आजीवन कारावास की कठोरतम सजा से दंडित किया है।

कोर्ट की टिप्पणी
यह गंभीर व घृणित प्रकृति का व समाज विरोधी अपराध है। यदि पति पत्नी के पवित्र रिश्ते में स्वार्थ, लालच व कपट जैसे दुर्गुणों का समावेश हो जाएगा तो दांपत्य जीवन की आधारशिला ही नष्ट हो जाएगी। यदि अभियुक्ता लतेश के प्रति उदारतापूर्ण दृष्टिकोण अपनाया गया तो इससे समाज में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। वैवाहिक संस्था से समाज व पीढि़यों का विश्वास भी डगमगा जाएगा। दांपत्य रिश्ता एक दूसरे के प्रति समर्पण, त्याग व प्रेम का परिचायक होना चाहिए। लतेश सरीखी अभियुक्ता समाज में अन्य महिलाओं के लिए मानसिक विकार का कारण उत्पन्न करेंगी। इसी तरह संदीप भी किसी दया या सहानुभूति का पात्र नहीं है।

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