{"_id":"595fdc124f1c1bd42e8b4693","slug":"why-gst-now-charge-the-service","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीएसटी में अब सर्विस चार्ज क्यों..?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीएसटी में अब सर्विस चार्ज क्यों..?
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Sat, 08 Jul 2017 12:55 AM IST
विज्ञापन
gst in uttarakhand
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जीएसटी लागू होने के बाद कोई दूसरा कर नहीं वसूला जा सकता है, केवल आयकर को छोड़ कर। इसके बावजूद कुछ रेस्टोरेंट और होटलों में अभी तक सर्विस चार्ज वसूला जा रहा है।
रेस्टोरेंट की सेवाओं में सर्विस चार्ज लेने के मुद्दे पर सेंटर प्वाइंट व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष विवेक बगाई ने कहा कि लागू होने के बाद केवल जीएसटी के तहत या जीएसटी में लागू समाधान योजना के तहत टैक्स लिया जा सकता है। उनके मेजबान रेस्टोरेंट में जीएसटी का 18 फीसदी का टैक्स स्लैब लागू है, जबकि चिक फिश रेस्टोरेंट जीएसटी समाधान योजना के तहत केवल पांच फीसदी के टैक्स के दायरे में है। इसके अलावा जो ग्राहक सर्विस से संतुष्ट हैं वह सर्विस चार्ज दे रहे हैं। जो नहीं देना चाहते, उनसे कोई चार्ज नहीं लिया जाता है।
20 फरवरी 2017 को जारी सीरियल नंबर 361 के तहत डीएसओ आफिस से सर्विस चार्ज के संबंध में पत्र आया था। जिसमें स्पष्ट था जो सर्विस चार्ज देना चाहे वह दे जो न चाहे वह न दे। ये चार्ज अनिवार्य नहीं है। मीनू में इसकी जानकारी दी जा रही है।
विज्ञापन
जीएसटी के नोडल अधिकारी आरएस विद्यार्थी ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद सर्विस चार्ज नहीं लिया जा सकता है। अगर कहीं ऐसा हो रहा है तो उसे बंद कराया जाएगा। इधर, सीए एसोसिएशन के अध्यक्ष अवन कुमार सिंह ने कहा कि सर्विस चार्ज कानूनी रूप से लागू नहीं है, लेकिन ग्राहक अगर चाहें तो दे अन्यथा न दे। अभी तक इसको खत्म करने का कोई आदेश नहीं है।
जीएसटी रजिस्ट्रेशन ने बढ़ाई कमाई
जीएसटी लागू होने के बाद रजिस्ट्र्रेशन कराने, डिजीटल हस्ताक्षर और अंगूठा निशान जीएसटी पोर्टल एकाउंट पर अपलोड करने के नाम पर जम कर कुछ स्थानों पर जायज से ज्यादा फीस लेने की शिकायतें आने लगी हैं। हालांकि अभी तक वाणिज्य कर विभाग के पास लिखित रूप से इसकी शिकायत नहीं आई है। रजिस्ट्रेशन के नाम पर एक से डेढ़ हजार रुपये, डिजीटल हस्ताक्षर और अंगूठा निशान अपलोड कराने पर 800 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। जिससे व्यापारियों को मजबूरी में ये खर्च वहन करना पड़ रहा है। सीए एसोसिएशन के अध्यक्ष सीए अवन कुमार सिंह ने बताया कि वाणिज्य कर विभाग के गंभीरपुरा कार्यालय में चालू हेल्प डेस्क में व्यापारियों को सभी सुविधाएं नि:शुल्क दी जा रही हैं। इसके अलावा जो भी लोग वकील, सीए और अन्य लोगों से इस संबंध में सेवाएं ले रहे हैं वह मांगी गई फीस दे रहे हैं। प्रोफेशनल की फीस तय नहीं होती है।
मदद कर रहे मोबाइल एप्स
अगर आप छोटे कारोबारी हैं और जीएसटी के अनुसार माल का इनवाइस (बिल जिसकी तीन प्रतियां होंगी) निकालने में असुविधा हो रही है, तो एप डाउनलोड कर उसमें विवरण भरें। इसके बाद एप सभी गणनाएं स्वयं करके आपका इनवाइस तैयार कर देगा। इस संबंध में वरिष्ठ चार्टर्ड एकाउंटेंट राजीव वार्ष्णेय कहते हैं कि अभी कुछ दिनों बाद जीएसटी की आधिकारिक वेबसाइट से भी एप डाउनलोड किए जा सकेंगे। अभी जो एप हैं वह निजी तौर पर जारी किए गए हैं। सरकार की ओर से जारी होने वाले एप थोड़ा हैवी होंगे और उनके लिए अच्छी स्पीड के फोन जरूरी होंगे।
विज्ञापन
रेस्टोरेंट की सेवाओं में सर्विस चार्ज लेने के मुद्दे पर सेंटर प्वाइंट व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष विवेक बगाई ने कहा कि लागू होने के बाद केवल जीएसटी के तहत या जीएसटी में लागू समाधान योजना के तहत टैक्स लिया जा सकता है। उनके मेजबान रेस्टोरेंट में जीएसटी का 18 फीसदी का टैक्स स्लैब लागू है, जबकि चिक फिश रेस्टोरेंट जीएसटी समाधान योजना के तहत केवल पांच फीसदी के टैक्स के दायरे में है। इसके अलावा जो ग्राहक सर्विस से संतुष्ट हैं वह सर्विस चार्ज दे रहे हैं। जो नहीं देना चाहते, उनसे कोई चार्ज नहीं लिया जाता है।
विज्ञापन
20 फरवरी 2017 को जारी सीरियल नंबर 361 के तहत डीएसओ आफिस से सर्विस चार्ज के संबंध में पत्र आया था। जिसमें स्पष्ट था जो सर्विस चार्ज देना चाहे वह दे जो न चाहे वह न दे। ये चार्ज अनिवार्य नहीं है। मीनू में इसकी जानकारी दी जा रही है।
विज्ञापन
जीएसटी के नोडल अधिकारी आरएस विद्यार्थी ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद सर्विस चार्ज नहीं लिया जा सकता है। अगर कहीं ऐसा हो रहा है तो उसे बंद कराया जाएगा। इधर, सीए एसोसिएशन के अध्यक्ष अवन कुमार सिंह ने कहा कि सर्विस चार्ज कानूनी रूप से लागू नहीं है, लेकिन ग्राहक अगर चाहें तो दे अन्यथा न दे। अभी तक इसको खत्म करने का कोई आदेश नहीं है।
जीएसटी रजिस्ट्रेशन ने बढ़ाई कमाई
जीएसटी लागू होने के बाद रजिस्ट्र्रेशन कराने, डिजीटल हस्ताक्षर और अंगूठा निशान जीएसटी पोर्टल एकाउंट पर अपलोड करने के नाम पर जम कर कुछ स्थानों पर जायज से ज्यादा फीस लेने की शिकायतें आने लगी हैं। हालांकि अभी तक वाणिज्य कर विभाग के पास लिखित रूप से इसकी शिकायत नहीं आई है। रजिस्ट्रेशन के नाम पर एक से डेढ़ हजार रुपये, डिजीटल हस्ताक्षर और अंगूठा निशान अपलोड कराने पर 800 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। जिससे व्यापारियों को मजबूरी में ये खर्च वहन करना पड़ रहा है। सीए एसोसिएशन के अध्यक्ष सीए अवन कुमार सिंह ने बताया कि वाणिज्य कर विभाग के गंभीरपुरा कार्यालय में चालू हेल्प डेस्क में व्यापारियों को सभी सुविधाएं नि:शुल्क दी जा रही हैं। इसके अलावा जो भी लोग वकील, सीए और अन्य लोगों से इस संबंध में सेवाएं ले रहे हैं वह मांगी गई फीस दे रहे हैं। प्रोफेशनल की फीस तय नहीं होती है।
मदद कर रहे मोबाइल एप्स
अगर आप छोटे कारोबारी हैं और जीएसटी के अनुसार माल का इनवाइस (बिल जिसकी तीन प्रतियां होंगी) निकालने में असुविधा हो रही है, तो एप डाउनलोड कर उसमें विवरण भरें। इसके बाद एप सभी गणनाएं स्वयं करके आपका इनवाइस तैयार कर देगा। इस संबंध में वरिष्ठ चार्टर्ड एकाउंटेंट राजीव वार्ष्णेय कहते हैं कि अभी कुछ दिनों बाद जीएसटी की आधिकारिक वेबसाइट से भी एप डाउनलोड किए जा सकेंगे। अभी जो एप हैं वह निजी तौर पर जारी किए गए हैं। सरकार की ओर से जारी होने वाले एप थोड़ा हैवी होंगे और उनके लिए अच्छी स्पीड के फोन जरूरी होंगे।