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ये कैसा तलाक, बीवी को पता नहीं...?
कौशल कुमार ओझा
Updated Thu, 10 Nov 2016 01:49 AM IST
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शहजाद फात्मा के सामान को ट्रैक्टर पर लादते एएमयू कर्मी।
- फोटो : amar Ujala
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तलाक, तलाक, तलाक को लेकर पूरे देश में हंगामा मचा हुआ है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भी एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। चार बच्चों की एक मां पिछले 13 सालों से दर-दर की ठोकरें खा रही है।
एएमयू प्रशासन का कहना है कि महिला को उसके पति ने तलाक दे दिया है। जबकि पीड़ित महिला का दावा है कि उसे आज तक नहीं पता कि उसके पति ने उसे कब तलाक दिया...? वह एएमयू प्रशासन के दावे को झूठा करार दे रही है। पति के गायब होने के बाद महिला को एएमयू की ओर से गुजर बसर करने के लिए फूटी कौड़ी तक नहीं दी गई।
आइए कहानी को समझने के लिए आप को 13 साल पीछे लिए चलते हैं। 13 साल पहले एएमयू प्रॉक्टर ऑफिस में सुरक्षा सहायक पद पर तैनात जैनुल आबदीन गायब है। वह अपनी पत्नी एवं चार बच्चों के साथ एएमयू कैंपस स्थित इमादुल मुल्क रोड के ई-14 क्वार्टर में रहता था।
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पत्नी शहजाद फात्मा का कहना है कि काफी खोजबीन के बाद जब उनका कोई सुराग नहीं लगा, तो नवंबर 2005 थाना सिविल लाइन में गुमशुदगी दर्ज कराने की तहरीर दी। इस बीच बार-बार आग्रह के बावजूद एएमयू प्रशासन से उन्हें कोई सहायता नहीं दी।
आरोप है कि उल्टा परेशान किया। जब उनके पति गायब हुए तो उनके चारों बच्चे छोटे-छोटे थे। तमाम तरह की कठिनाइयां सहकर बच्चों की परवरिश की और शिक्षा दिलाई। अब एएमयू प्रशासन ने जबरन उन्हें घर से निकाल दिया।
इधर, एएमयू के प्रापर्टी आफिसर मो. आरिफ का कहना है कि शहजाद फात्मा को उनके पति जैनुल आबदीन ने तलाक दिया था। उसकी कापी एएमयू प्रशासन को सौंपी थी और यह भी कहा था कि शहजाद फात्मा से अब कोई रिश्ता नहीं है। आप क्वार्टर खाली करा सकते हैं। शहजाद फात्मा का कहना है कि उन्हें पता नहीं कि उनके पति ने उन्हें कब दिया...? वह शिया हैं और तलाक पर पत्नी एवं गवाह के हस्ताक्षर होते हैं।
एएमयू के अधिकारी जिस कागज की बात कर रहे हैं, वह फर्जी है। प्रापर्टी ऑफिसर का यह भी कहना है कि जैनुल आबदीन बहुत दिनों तक बिना अवकाश अनुपस्थित रहे थे। इसलिए उनकी नौकरी सीज कर दी गई थी। बहरहाल जो भी हो, 58 वर्ष की शहजाद फात्मा न्याय के लिए 13 साल से दर-दर की ठोकरें खा रही हैं। पति के गायब होने के बाद एएमयू के किसी अधिकारी ने यह नहीं सोचा कि अकेली महिला आखिर कैसे चार बच्चों का भरण-पोषण करेगी...?
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एएमयू प्रशासन का कहना है कि महिला को उसके पति ने तलाक दे दिया है। जबकि पीड़ित महिला का दावा है कि उसे आज तक नहीं पता कि उसके पति ने उसे कब तलाक दिया...? वह एएमयू प्रशासन के दावे को झूठा करार दे रही है। पति के गायब होने के बाद महिला को एएमयू की ओर से गुजर बसर करने के लिए फूटी कौड़ी तक नहीं दी गई।
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आइए कहानी को समझने के लिए आप को 13 साल पीछे लिए चलते हैं। 13 साल पहले एएमयू प्रॉक्टर ऑफिस में सुरक्षा सहायक पद पर तैनात जैनुल आबदीन गायब है। वह अपनी पत्नी एवं चार बच्चों के साथ एएमयू कैंपस स्थित इमादुल मुल्क रोड के ई-14 क्वार्टर में रहता था।
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पत्नी शहजाद फात्मा का कहना है कि काफी खोजबीन के बाद जब उनका कोई सुराग नहीं लगा, तो नवंबर 2005 थाना सिविल लाइन में गुमशुदगी दर्ज कराने की तहरीर दी। इस बीच बार-बार आग्रह के बावजूद एएमयू प्रशासन से उन्हें कोई सहायता नहीं दी।
आरोप है कि उल्टा परेशान किया। जब उनके पति गायब हुए तो उनके चारों बच्चे छोटे-छोटे थे। तमाम तरह की कठिनाइयां सहकर बच्चों की परवरिश की और शिक्षा दिलाई। अब एएमयू प्रशासन ने जबरन उन्हें घर से निकाल दिया।
इधर, एएमयू के प्रापर्टी आफिसर मो. आरिफ का कहना है कि शहजाद फात्मा को उनके पति जैनुल आबदीन ने तलाक दिया था। उसकी कापी एएमयू प्रशासन को सौंपी थी और यह भी कहा था कि शहजाद फात्मा से अब कोई रिश्ता नहीं है। आप क्वार्टर खाली करा सकते हैं। शहजाद फात्मा का कहना है कि उन्हें पता नहीं कि उनके पति ने उन्हें कब दिया...? वह शिया हैं और तलाक पर पत्नी एवं गवाह के हस्ताक्षर होते हैं।
एएमयू के अधिकारी जिस कागज की बात कर रहे हैं, वह फर्जी है। प्रापर्टी ऑफिसर का यह भी कहना है कि जैनुल आबदीन बहुत दिनों तक बिना अवकाश अनुपस्थित रहे थे। इसलिए उनकी नौकरी सीज कर दी गई थी। बहरहाल जो भी हो, 58 वर्ष की शहजाद फात्मा न्याय के लिए 13 साल से दर-दर की ठोकरें खा रही हैं। पति के गायब होने के बाद एएमयू के किसी अधिकारी ने यह नहीं सोचा कि अकेली महिला आखिर कैसे चार बच्चों का भरण-पोषण करेगी...?