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वकालत से अच्छा कोई पेशा नहीं
अलीगढ़/ब्यूरो
Updated Wed, 20 Apr 2016 01:50 AM IST
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एसवी कॉलेज के विधि विभाग में एक विस्तार व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ प्राचार्य डॉ. एके दीक्षित ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व इसके समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मोहम्मद अली जौहर विवि, रामपुर के विधि विभाग के प्रोफेसर इस्हाक कुरैशी मौजूद थे। वक्ताओं ने इस मौके पर कहा कि वकालत से अच्छा कोई पेशा नहीं है।
इस मौके पर कुरैशी ने विधि शिक्षा आज और कल पर बदलते हुए परिवेश में अधिकार और कर्तव्यों पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व संकाय अध्यक्ष कौशल किशोर ने मौलिक अधिकारों एवं कर्तव्यों की सामंजस्यता पर जोर दिया। विभाग के पूर्व संकाय अध्यक्ष डॉ. श्री बाबू ने लोकहित वाद और उसमें समय के अनुसार उत्पन्न अच्छाई व बुराई के बारे में बताया। विभाग की अध्यक्ष डॉ. सीमा यादव ने अपने संबोधन में कहा कि वकालत के पेशे से अच्छा कोई पेशा नहीं है।
दुनिया के अधिकतर बड़े लोग विधि स्नातक हैं। इस मौके पर विद्यार्थियों ने कई सवाल पूछे। इनमें मुख्य रूप से तीन तलाक, इस्लाम बहुपत्नी प्रथा जैसे मसलों पर चर्चा हुई। इसमें प्रमोद सेनानी, सीमा भार्गव, साहिस्ता नशरीन आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संचालन डॉ. फरीद खान ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से संजू बजाज, रामानुज कौशिक, विकास शर्मा, अमित कुमार, दीपक, वर्मा, प्रभात, अनुज पाराशर, विशेष पचौरी, विमला सिंह, शबनम, यामिनी, दिव्या बंसल, पूजा, रागिनी, संचिता, मोहिनी वार्ष्णेय, प्रीति, सुरेंद्र, मनोज, पवन आदि थे।
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इस मौके पर कुरैशी ने विधि शिक्षा आज और कल पर बदलते हुए परिवेश में अधिकार और कर्तव्यों पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व संकाय अध्यक्ष कौशल किशोर ने मौलिक अधिकारों एवं कर्तव्यों की सामंजस्यता पर जोर दिया। विभाग के पूर्व संकाय अध्यक्ष डॉ. श्री बाबू ने लोकहित वाद और उसमें समय के अनुसार उत्पन्न अच्छाई व बुराई के बारे में बताया। विभाग की अध्यक्ष डॉ. सीमा यादव ने अपने संबोधन में कहा कि वकालत के पेशे से अच्छा कोई पेशा नहीं है।
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दुनिया के अधिकतर बड़े लोग विधि स्नातक हैं। इस मौके पर विद्यार्थियों ने कई सवाल पूछे। इनमें मुख्य रूप से तीन तलाक, इस्लाम बहुपत्नी प्रथा जैसे मसलों पर चर्चा हुई। इसमें प्रमोद सेनानी, सीमा भार्गव, साहिस्ता नशरीन आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संचालन डॉ. फरीद खान ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से संजू बजाज, रामानुज कौशिक, विकास शर्मा, अमित कुमार, दीपक, वर्मा, प्रभात, अनुज पाराशर, विशेष पचौरी, विमला सिंह, शबनम, यामिनी, दिव्या बंसल, पूजा, रागिनी, संचिता, मोहिनी वार्ष्णेय, प्रीति, सुरेंद्र, मनोज, पवन आदि थे।
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