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Waste Management: एएमयू के शोध में खुली राह, अब पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना होगा कचरे का निस्तारण

Fri, 02 Jan 2026 10:16 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Fri, 02 Jan 2026 10:16 AM IST
सार

एएमयू के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में कचरा प्रबंधन को लेकर एक शोध में यह आया कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना भी कचरे का निस्तारण किया जा सकता है। 

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Waste Management from Bioreactor Landfills
बायोरिएक्टर लैंडफिल का मॉडल - फोटो : विवि

विस्तार

अब पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए कचरे का निस्तारण हो सकेगा। बायोरिएक्टर लैंडफिल प्रक्रिया से कचरे से 68 लीटर बायोगैस बनी, जबकि कच्चे कचरे से 365 लीटर बायोगैस पैदा हुई। यह खुलासा एएमयू के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में हुए शोध में हुआ है।

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विभाग के मार्गदर्शक प्रो. आसिफ अली सिद्दीकी व सह मार्गदर्शक प्रो. सुहैल अयूब के निर्देशन में यासिर सलीम सिद्दीकी ने पांच साल तक शोध किया। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एमएसडब्ल्यू) के क्षेत्र में बायोरिएक्टर लैंडफिल (बीएलएफ) को सबसे अधिक टिकाऊ और प्रभावी विकल्प माना जा रहा है।
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कचरे का पूर्व-उपचार (प्री-ट्रीटमेंट) न केवल लैंडफिल में कचरे के टिकाऊ प्रक्रिया को तेज करता है, बल्कि प्रदूषण और गैस उत्सर्जन को भी काफी हद तक कम करता है। अध्ययन के दौरान प्रतिदिन बायोगैस उत्पादन, मीथेन की मात्रा और लीचेट के भौतिक-रासायनिक गुणों का मूल्यांकन किया गया। इसमें पता चला कि विंडरो कंपोस्ट से गैस उत्पादन काफी कम हुआ, क्योंकि इसमें जैविक पदार्थों की मात्रा पहले ही घट चुकी थी। इसके विपरीत कच्चे कचरे में अधिक जैविक तत्व होने के कारण मीथेन उत्पादन और प्रदूषण क्षमता अधिक पाई गई।

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विभाग के लैब में दो एनारोबिक बायोरिएक्टर लैंडफिल विकसित किए गए। एक में कच्चा व ठोस कचरा भरा गया, जबकि दूसरे में विंडरो कंपोस्ट डाला गया, जिसे अलीगढ़ स्थित एक अपशिष्ट उपचार संयंत्र से लिया गया था। दोनों बायोरिएक्टरों को 300 दिनों तक एनारोबिक परिस्थितियों में संचालित किया गया। अध्ययन में सामने आया कि कचरे का स्थिरीकरण लगभग आधे समय में हो गया, जबकि कच्चे कचरे को स्थिर होने में अधिक समय लगा।

बायोरिएक्टर लैंडफिल से ईटीपी से निकलने वाले पानी से प्रदूषण हटाए जाते रहे हैं। पहली बार कचरे के प्रबंधन को लेकर उसका इस्तेमाल किया गया है। प्रो. आसिफ अली सिद्दीकी ने इंग्लैंड में बायोरिएक्टर लैंडफिल से कचरा प्रबंधन पर काम किया है। इसलिए देश में उन्होंने इस पर शोध कराया है। देश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एक गंभीर चुनौती है। इस तकनीक को व्यापक स्तर पर लागू किए जाने की जरूरत है।-प्रो. सुहैल अयूब, सिविल इंजीनियरिंग विभाग, एमएयू

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