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केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की हड़ताल से बैंक समेत दर्जन भर विभागों में काम ठप
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मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करते यूपी बैंक एम्पलाइज यूनियन के पदाधिकारी व कर्मचारी।
- फोटो : CITY OFFICE
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केंद्र सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के विरोध में केंद्रीय ट्रेड यूनियन, स्वतंत्र फेडरेशन, विभागीय राज्य कर्मचारी एसोसिएशन तथा असंगठित क्षेत्र के किसान, मजदूर, छात्र, महिला एवं नौजवानों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के चलते बैंक, बीमा, विकास भवन, कृषि, सिंचाई, वन, पीडब्लूडी समेत दर्जन भर विभागों में कामकाज ठप रहा। हालांकि कलक्ट्रेट समेत अन्य विभागों में सामान्य दिनों की तरह कामकाज हुआ। बैंककर्मियों ने जिला पंचायत स्थित सिंडीकेट बैंक शाखा पर प्रदर्शन किया।
इसके बाद राज्य कर्मचारी महासंघ समेत अन्य संगठनों के साझा मंच की कलक्ट्रेट पर हुई आम सभा में शामिल हुए। अंत में एडीएम सिटी को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दिया गया। बीमाकर्मी, डाक, बीएसएनएल, आयकर विभाग के कर्मचारियों ने अपने-अपने कार्यालयों में प्रदर्शन किया। रेलवे की एनसीआरएमयू एवं एनसीआरईएस के पदाधिकारियों ने जंक्शन स्टेशन पर गोष्ठी कर केंद्र सरकार को जमकर कोसा।
यह रही प्रमुख मांगेें
- सप्ताह में 5 दिवसीय बैंकिंग की व्यवस्था।
-बैंकों में रिक्त पदों पर कर्मचारियों की पर्याप्त भर्ती।
-बैंकिंग सुधारों एवं बैंकों के अवांछित विलय पर रोक।
-बैंकों के निजीकरण के प्रयास बंद किये जाये।
-कारपोरेट घरानों से एनपीए वसूली के कठोर उपाय।
-वेतन पुनरीक्षण एवं संबंधित मुद्दों को शीघ्र निपटाया जाये।
अन्य कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
-पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली।
-सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों का निजीकरण हो बंद।
-विभागों के रिक्त पदों पर भर्ती।
-न्यूनतम वेतन व्यवस्था लागू की जाय।
क्या बोले कर्मचारी नेता
- सार्वजनिक क्षेत्रों का बड़े पैमाने पर विलय किया जा रहा है, जबकि प्राइवेट बैंकों को खोलने के लिए लाइसेंस देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। पिछले 5 वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की 3400 से अधिक शाखाएं या तो बंद कर दी गईं या फिर विलय कर दी गई।
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वीके शर्मा, जिला मंत्री यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन
- पुरानी पेंशन नीति को खत्म कर दिया है। विभागों में काफी पद खाली पड़े हैं, उन्हें नहीं भरा जा रहा है। न्यूनतम वेतन लागू नहीं किया जा रहा है। कई अन्य समस्याओं से कर्मचारी वर्ग परेशान है।
डा राकेश सक्सेना, अध्यक्ष साझा मंच
-दवाओं पर जीएसटी समाप्त की जाए। दवाई उद्योग के लिए एक यूनीफार्म कोड लागू किया जाए। दवा उद्योग के सेल्स प्रतिनिधियों का शोषण बंद हो व बिक्री टारगेट के आधार पर उनको नौकरी से न निकाला जाए।
कामरेड बलवीर सिंह, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड मेडिकल एंड सेल्स रिप्रजेंटेटिव एसोसिएशन
साझा मंच की सभा में मौजूद प्रमुख पदाधिकारी
-सचिन जैन, आरपी शर्मा, बलवीर सिंह, सुहेब शेरवानी, एनके पचौरी, शमीम अख्तर, वीके शर्मा, सुरेंद्र सिंह, डा कमलानंद, रमेश, वीरेंद्र सिंह, कमलेश चौहान, सुनील, इदरीस मोहम्मद, ललित शर्मा, राजकुमार शर्मा, मो. अमजद, अरुण पाठक, सुनील महरोत्रा, डीसी वार्ष्णेय, प्रदीप शर्मा, सुखवीर सिंह, प्रेमपाल सिंह, पुष्पेंद्र सिंह, राकेश शर्मा, राजेश गौड़, ममतेश चौहान, यज्ञवती, चमन राना, पीडी शर्मा, आरके शर्मा, विवेक यादव, जगमोहन शर्मा, सुस्मिता कुलश्रेष्ठ, सुमित भटनागर, जाहिद, अनवर, शबाब अली, अजयपाल सिंह, रामबाबू गुप्ता, एहसान बेग, प्रवीन कौशिक, राजेश कुमार, अजय कपूर, जाहिद कमाल, विजयलाल, कुसुम, शारदा, संगीता, रिहान अहमद, नजर हैदर, सईद अकमल, मो. आरिफ अली खान, राजकुमार, रामगोपाल आदि।
दवा प्रतिनिधियों का शोषण हो बंद
अलीगढ़। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड मेडिकल एंड सेल्स रिप्रजेंटेटिव एसोसिएशन के तत्वावधान में ट्रेड यूनियनों के साझा मंच के आह्वान पर बुधवार को हड़ताल रखी। सभी दवा कंपनियों के सेल्स प्रतिनिधि कलक्ट्रेट पर पहुंचे तथा सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की। इस मौके पर अरुण फौजी, राजकुमार शर्मा आदि उपस्थित थे।
इन विभागों के कर्मचारी हुए हड़ताल में शामिल
बिजली, बीमा, आयकर, डाक, पीडब्लूडी, सिंचाई, कृषि, वन, उद्यान, दवा उद्योग, एएमयू कर्मचारी, विकास भवन के सभी 20 विभाग, ग्रामीण सफाई कर्मचारी, आंगनबाड़ी, शिक्षा प्रेरक संगठन, मेडिकल रिप्रजेंटेटिव तथा केंद्रीय ट्रेड यूनियन इंटक, सीटू, इंटक से संबद्ध श्रमिक संगठनों के सदस्य समेत 18 वित्तीय क्षेत्र की यूनियनें, बैंकिंग क्षेत्र की आल इंडिया बैंक एंप्लाइज एसोसिएशन, बैंक एंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया, इंडियन नैशनल बैंक एंप्लाइज फेडरेशन, आल इंडिया बैंक आफिसर्स एसोसिएशन तथा इंडियन नेशनल बैंक आफिसर्स कांग्रेस के अधिकारी व कर्मचारी।
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इसके बाद राज्य कर्मचारी महासंघ समेत अन्य संगठनों के साझा मंच की कलक्ट्रेट पर हुई आम सभा में शामिल हुए। अंत में एडीएम सिटी को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दिया गया। बीमाकर्मी, डाक, बीएसएनएल, आयकर विभाग के कर्मचारियों ने अपने-अपने कार्यालयों में प्रदर्शन किया। रेलवे की एनसीआरएमयू एवं एनसीआरईएस के पदाधिकारियों ने जंक्शन स्टेशन पर गोष्ठी कर केंद्र सरकार को जमकर कोसा।
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यह रही प्रमुख मांगेें
- सप्ताह में 5 दिवसीय बैंकिंग की व्यवस्था।
-बैंकों में रिक्त पदों पर कर्मचारियों की पर्याप्त भर्ती।
-बैंकिंग सुधारों एवं बैंकों के अवांछित विलय पर रोक।
-बैंकों के निजीकरण के प्रयास बंद किये जाये।
-कारपोरेट घरानों से एनपीए वसूली के कठोर उपाय।
-वेतन पुनरीक्षण एवं संबंधित मुद्दों को शीघ्र निपटाया जाये।
अन्य कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
-पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली।
-सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों का निजीकरण हो बंद।
-विभागों के रिक्त पदों पर भर्ती।
-न्यूनतम वेतन व्यवस्था लागू की जाय।
क्या बोले कर्मचारी नेता
- सार्वजनिक क्षेत्रों का बड़े पैमाने पर विलय किया जा रहा है, जबकि प्राइवेट बैंकों को खोलने के लिए लाइसेंस देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। पिछले 5 वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की 3400 से अधिक शाखाएं या तो बंद कर दी गईं या फिर विलय कर दी गई।
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वीके शर्मा, जिला मंत्री यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन
- पुरानी पेंशन नीति को खत्म कर दिया है। विभागों में काफी पद खाली पड़े हैं, उन्हें नहीं भरा जा रहा है। न्यूनतम वेतन लागू नहीं किया जा रहा है। कई अन्य समस्याओं से कर्मचारी वर्ग परेशान है।
डा राकेश सक्सेना, अध्यक्ष साझा मंच
-दवाओं पर जीएसटी समाप्त की जाए। दवाई उद्योग के लिए एक यूनीफार्म कोड लागू किया जाए। दवा उद्योग के सेल्स प्रतिनिधियों का शोषण बंद हो व बिक्री टारगेट के आधार पर उनको नौकरी से न निकाला जाए।
कामरेड बलवीर सिंह, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड मेडिकल एंड सेल्स रिप्रजेंटेटिव एसोसिएशन
साझा मंच की सभा में मौजूद प्रमुख पदाधिकारी
-सचिन जैन, आरपी शर्मा, बलवीर सिंह, सुहेब शेरवानी, एनके पचौरी, शमीम अख्तर, वीके शर्मा, सुरेंद्र सिंह, डा कमलानंद, रमेश, वीरेंद्र सिंह, कमलेश चौहान, सुनील, इदरीस मोहम्मद, ललित शर्मा, राजकुमार शर्मा, मो. अमजद, अरुण पाठक, सुनील महरोत्रा, डीसी वार्ष्णेय, प्रदीप शर्मा, सुखवीर सिंह, प्रेमपाल सिंह, पुष्पेंद्र सिंह, राकेश शर्मा, राजेश गौड़, ममतेश चौहान, यज्ञवती, चमन राना, पीडी शर्मा, आरके शर्मा, विवेक यादव, जगमोहन शर्मा, सुस्मिता कुलश्रेष्ठ, सुमित भटनागर, जाहिद, अनवर, शबाब अली, अजयपाल सिंह, रामबाबू गुप्ता, एहसान बेग, प्रवीन कौशिक, राजेश कुमार, अजय कपूर, जाहिद कमाल, विजयलाल, कुसुम, शारदा, संगीता, रिहान अहमद, नजर हैदर, सईद अकमल, मो. आरिफ अली खान, राजकुमार, रामगोपाल आदि।
दवा प्रतिनिधियों का शोषण हो बंद
अलीगढ़। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड मेडिकल एंड सेल्स रिप्रजेंटेटिव एसोसिएशन के तत्वावधान में ट्रेड यूनियनों के साझा मंच के आह्वान पर बुधवार को हड़ताल रखी। सभी दवा कंपनियों के सेल्स प्रतिनिधि कलक्ट्रेट पर पहुंचे तथा सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की। इस मौके पर अरुण फौजी, राजकुमार शर्मा आदि उपस्थित थे।
इन विभागों के कर्मचारी हुए हड़ताल में शामिल
बिजली, बीमा, आयकर, डाक, पीडब्लूडी, सिंचाई, कृषि, वन, उद्यान, दवा उद्योग, एएमयू कर्मचारी, विकास भवन के सभी 20 विभाग, ग्रामीण सफाई कर्मचारी, आंगनबाड़ी, शिक्षा प्रेरक संगठन, मेडिकल रिप्रजेंटेटिव तथा केंद्रीय ट्रेड यूनियन इंटक, सीटू, इंटक से संबद्ध श्रमिक संगठनों के सदस्य समेत 18 वित्तीय क्षेत्र की यूनियनें, बैंकिंग क्षेत्र की आल इंडिया बैंक एंप्लाइज एसोसिएशन, बैंक एंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया, इंडियन नैशनल बैंक एंप्लाइज फेडरेशन, आल इंडिया बैंक आफिसर्स एसोसिएशन तथा इंडियन नेशनल बैंक आफिसर्स कांग्रेस के अधिकारी व कर्मचारी।