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बासौड़ा कल, शीतला माता की होगी पूजा
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अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़।
होली के बाद मनाया जाने वाला बासौड़ा का त्योहार कल (बृहस्पतिवार) को है। महिलाएं घर में सुख-समृद्धि और रोग-कष्ट निवारण के लिए शीतला माता की पूजा अर्चना करेंगी। घर में एक दिन पहले बनाए हुए भोजन का भोग लगाएंगी और प्रसादी ग्रहण करेंगी। वहीं शीतला सप्तमी वाले लोगों के लिए शनिवार और शीतला अष्टमी वाले श्रद्धालुओं के लिए रविवार को ही पूजा पाठ करना शुभ रहेगा।
श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि बासौड़े का त्योहार होली के सात-आठ दिन बाद या होली के बाद पहले सोमवार अथवा बृहस्पतिवार को मनाया जाता है। बासौड़ा पूजन के लिए महिलाएं एक दिन पूर्व भोजन बनाती हैं। इसके बाद अगली दिन शीतला माता की पूजा अर्चना करती हैं।
उन्होंने बताया कि पूजन के लिए एक थाली में सभी बनाए हुए पकवान, रबड़ी, रोटी, चावल, मूंग की छिलके वाली दाल, हल्दी, धूपबत्ती, एक गुलरी की माला को लेकर मंदिर पर जाते हैं। थाली में यथासंभव दक्षिणा रखकर पूजा अर्चना करती हैं। पूजा के बाद भैरों की सवारी कुत्ते को भी प्रसादी खिलाई जाती है। उन्होंने बताया कि एक मान्यता यह भी हैं कि इस दिन के बाद भोजन बासी होना प्रारंभ हो जाता है।
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होली के बाद मनाया जाने वाला बासौड़ा का त्योहार कल (बृहस्पतिवार) को है। महिलाएं घर में सुख-समृद्धि और रोग-कष्ट निवारण के लिए शीतला माता की पूजा अर्चना करेंगी। घर में एक दिन पहले बनाए हुए भोजन का भोग लगाएंगी और प्रसादी ग्रहण करेंगी। वहीं शीतला सप्तमी वाले लोगों के लिए शनिवार और शीतला अष्टमी वाले श्रद्धालुओं के लिए रविवार को ही पूजा पाठ करना शुभ रहेगा।
श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि बासौड़े का त्योहार होली के सात-आठ दिन बाद या होली के बाद पहले सोमवार अथवा बृहस्पतिवार को मनाया जाता है। बासौड़ा पूजन के लिए महिलाएं एक दिन पूर्व भोजन बनाती हैं। इसके बाद अगली दिन शीतला माता की पूजा अर्चना करती हैं।
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उन्होंने बताया कि पूजन के लिए एक थाली में सभी बनाए हुए पकवान, रबड़ी, रोटी, चावल, मूंग की छिलके वाली दाल, हल्दी, धूपबत्ती, एक गुलरी की माला को लेकर मंदिर पर जाते हैं। थाली में यथासंभव दक्षिणा रखकर पूजा अर्चना करती हैं। पूजा के बाद भैरों की सवारी कुत्ते को भी प्रसादी खिलाई जाती है। उन्होंने बताया कि एक मान्यता यह भी हैं कि इस दिन के बाद भोजन बासी होना प्रारंभ हो जाता है।
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