{"_id":"5b217f514f1c1b2b428b4b0f","slug":"the-foundation-of-idgah-laid-with-silver-corners","type":"story","status":"publish","title_hn":"चांदी की कन्नी से रखी ईदगाह की बुनियाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चांदी की कन्नी से रखी ईदगाह की बुनियाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Thu, 14 Jun 2018 02:41 AM IST
विज्ञापन
ईदगाह का मुख्य द्वारा।
- फोटो : अमर उजाला
-
- 1
-
Link Copied
इकराम वारिस
जिस ईदगाह में रोजे रखने के बाद ईद की नमाज पढ़ेंगे, उसमें ज्यादातर लोगों को ईदगाह के इतिहास के बारे मालूम नहीं होगा। ईदगाह की बुनियाद चांदी की कन्नी से रखी गई थी। बाद में कन्नी की बोली लगी, जिसकी हाजी कय्यूम ने 8101 रुपये में बोली लगाई।
10 तोले की कन्नी
ईदगाह की बुनियाद 10 तोले की कन्नी से 15 जुलाई वर्ष 1984 में मौलाना अहमद उल्ला खां ने रखी थी। यह कन्नी नबिया ब्राइट वाले ने अपने बेटे अख्तर आजाद के हाथों से नई ईदगाह कमेटी को सौंपी थी। कन्नी की कीमत 300 रुपये थी। इसके बाद कन्नी की बोली लगाई गई। हाजी कय्यूम ने 8101 रुपये की ऊंची बोली लगाकर कन्नी ले ली। यह कन्नी आज भी उनके पास मौजूद है।
हिंदुओं ने दिए आठ हजार रुपये
यूं तो हाजी कय्यूम ने बोली लगा दी, लेकिन उनकी जेब में सिर्फ 100 रुपये ही थे। फौरन वह जहां से माल लाते थे, वहां पहुंच गए। दोनों कंपनी संचालक हिंदू थे। उनसे चार-चार हजार रुपये ले आए। बाद में जब हिंदू मालिकों को इसकी जानकारी हुई, तब उन्होंने पैसे लेने से मना कर दिया, लेकिन हाजी कय्यूम ने उन्हें प्यार से मना कर दिया।
विज्ञापन
कोई भी करा सकता है ईदगाह की तामीर
ईदगाह कमेटी के सदर हाजी सिराजउद्दीन बताते हैं कि जामा मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान मुफ्ती अब्दुल कय्यूम ने कहा कि नई ईदगाह बननी है। किसी से भी कह दिया जाए, तो अकेले ही कोई ईदगाह बनवा सकता है, लेकिन मैं चाहता हूं कि इसमें सबकी भागीदारी हो। सब अपने हिसाब से मदद करें। फिर क्या था, टोलियों में लोगों ने मजदूरी की और 40 दिन में ईदगाह बनकर तैयार हो गई। हालांकि, बाद में फिनीशिंग की गई।
विज्ञापन
जिस ईदगाह में रोजे रखने के बाद ईद की नमाज पढ़ेंगे, उसमें ज्यादातर लोगों को ईदगाह के इतिहास के बारे मालूम नहीं होगा। ईदगाह की बुनियाद चांदी की कन्नी से रखी गई थी। बाद में कन्नी की बोली लगी, जिसकी हाजी कय्यूम ने 8101 रुपये में बोली लगाई।
10 तोले की कन्नी
ईदगाह की बुनियाद 10 तोले की कन्नी से 15 जुलाई वर्ष 1984 में मौलाना अहमद उल्ला खां ने रखी थी। यह कन्नी नबिया ब्राइट वाले ने अपने बेटे अख्तर आजाद के हाथों से नई ईदगाह कमेटी को सौंपी थी। कन्नी की कीमत 300 रुपये थी। इसके बाद कन्नी की बोली लगाई गई। हाजी कय्यूम ने 8101 रुपये की ऊंची बोली लगाकर कन्नी ले ली। यह कन्नी आज भी उनके पास मौजूद है।
विज्ञापन
हिंदुओं ने दिए आठ हजार रुपये
यूं तो हाजी कय्यूम ने बोली लगा दी, लेकिन उनकी जेब में सिर्फ 100 रुपये ही थे। फौरन वह जहां से माल लाते थे, वहां पहुंच गए। दोनों कंपनी संचालक हिंदू थे। उनसे चार-चार हजार रुपये ले आए। बाद में जब हिंदू मालिकों को इसकी जानकारी हुई, तब उन्होंने पैसे लेने से मना कर दिया, लेकिन हाजी कय्यूम ने उन्हें प्यार से मना कर दिया।
विज्ञापन
कोई भी करा सकता है ईदगाह की तामीर
ईदगाह कमेटी के सदर हाजी सिराजउद्दीन बताते हैं कि जामा मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान मुफ्ती अब्दुल कय्यूम ने कहा कि नई ईदगाह बननी है। किसी से भी कह दिया जाए, तो अकेले ही कोई ईदगाह बनवा सकता है, लेकिन मैं चाहता हूं कि इसमें सबकी भागीदारी हो। सब अपने हिसाब से मदद करें। फिर क्या था, टोलियों में लोगों ने मजदूरी की और 40 दिन में ईदगाह बनकर तैयार हो गई। हालांकि, बाद में फिनीशिंग की गई।