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न्यायालय ने अभियुक्त की सजा की खत्म
अमर उजाला/ ब्यूरो
Updated Sat, 23 Jul 2016 01:38 AM IST
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अपर सत्र न्यायाधीश पंचम सुरेंद्र मोहन सहाय के न्यायालय में जेएम सादाबाद न्यायालय के एक फौजदारी मामले की सुनवाई हुई। न्यायालय ने अवर न्यायालय के निर्णय में कुछ अहम बदलाव किए हैं।
दरअसल, अवर न्यायालय में विचाराधीन वाद में आरोप है कि दो जनवरी 1989 की सुबह मई रोड और खंदौली के बीच कंजौली के क्षेत्र में अभियुक्त नानकचंद्र द्वारा ट्रैक्टर फोर्ड को तेजी और लापरवाही से चलाते हुए मैसी ट्रैक्टर में टक्कर मार दी गई, जिससे वादी के पिता को गंभीर चोटें आईं और बाद में उनकी मौत हो गई। अवर न्यायालय से पिछले दिनों इस मामले में आदेश हो चुका है, जिसके विरुद्ध अपील में नानकचंद्र निवासी भरतिया थाना बल्देव मथुरा की ओर से अपील की गई।
न्यायालय ने अपने संशोधित निर्णय में कहा कि धारा 279, 337 और 304 ए में अभियुक्त को दोषी माना, लेकिन धारा 279 में तीन माह के साधारण कारावास और धारा 337 में तीन माह के साधारण कारावास एवं धारा 304 ए में एक वर्ष के साधारण कारावास के दंड को समाप्त कर दिया।
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जुर्माने की बावत अवर न्यायालय ने पारित आदेश 28 अप्रैल, 2010 की पुष्टि की। न्यायालय ने परिवीक्षा अधिनियम की धारा चार का लाभ देते हुए दोषी अभियुक्त नानकचंद्र को दो वर्ष के लिए सदाचरण की परिवीक्षा पर इस निर्देश के साथ छोडे़ जाने का आदेश दिए कि वह दो वर्ष जिला परिवीक्षा न्यायालय हाथरस के समक्ष निर्देश के क्रम में उपस्थित होते रहेंगे।
अवर न्यायालय के समक्ष अपीलार्थी अपना अच्छा व्यवहार और सदाचरण बनाए रखने के संबंध में दो प्रतिभूगण 25-25 हजार रुपये के दाखिल करेंगे।
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दरअसल, अवर न्यायालय में विचाराधीन वाद में आरोप है कि दो जनवरी 1989 की सुबह मई रोड और खंदौली के बीच कंजौली के क्षेत्र में अभियुक्त नानकचंद्र द्वारा ट्रैक्टर फोर्ड को तेजी और लापरवाही से चलाते हुए मैसी ट्रैक्टर में टक्कर मार दी गई, जिससे वादी के पिता को गंभीर चोटें आईं और बाद में उनकी मौत हो गई। अवर न्यायालय से पिछले दिनों इस मामले में आदेश हो चुका है, जिसके विरुद्ध अपील में नानकचंद्र निवासी भरतिया थाना बल्देव मथुरा की ओर से अपील की गई।
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न्यायालय ने अपने संशोधित निर्णय में कहा कि धारा 279, 337 और 304 ए में अभियुक्त को दोषी माना, लेकिन धारा 279 में तीन माह के साधारण कारावास और धारा 337 में तीन माह के साधारण कारावास एवं धारा 304 ए में एक वर्ष के साधारण कारावास के दंड को समाप्त कर दिया।
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जुर्माने की बावत अवर न्यायालय ने पारित आदेश 28 अप्रैल, 2010 की पुष्टि की। न्यायालय ने परिवीक्षा अधिनियम की धारा चार का लाभ देते हुए दोषी अभियुक्त नानकचंद्र को दो वर्ष के लिए सदाचरण की परिवीक्षा पर इस निर्देश के साथ छोडे़ जाने का आदेश दिए कि वह दो वर्ष जिला परिवीक्षा न्यायालय हाथरस के समक्ष निर्देश के क्रम में उपस्थित होते रहेंगे।
अवर न्यायालय के समक्ष अपीलार्थी अपना अच्छा व्यवहार और सदाचरण बनाए रखने के संबंध में दो प्रतिभूगण 25-25 हजार रुपये के दाखिल करेंगे।