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छोटे चौधरी की सपा पर ‘मेहरबानी’ के लगाए जा रहे मायने
मनोज माहेश्वरी
Updated Thu, 30 Jun 2016 01:40 AM IST
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चौ. अजित सिंह
- फोटो : महीपाल सिंह
रालोद मुखिया ने भले ही चुनावी गठबंधन को लेकर सस्पेंस बरकार रखा है, पर जिस तरह सपा के प्रति उनका नरम रवैया दिख रहा है, उससे कयास लग रहा है कि भविष्य में उनकी पार्टी का इससे चुनावी समझौता हो सकता है।
इसकी बानगी यहां रालोद के सम्मेलन में भी देखने को मिली। अपने पूरे भाषण में छोटे चौधरी ने प्रदेश सरकार के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा। पत्रकार वार्ता में भी वह अखिलेश सरकार का बचाव करते रहे।
बुधवार को यहां रालोद के अति पिछड़ा, किसान-मजदूर सम्मेलन में रालोद मुखिया अजित सिंह ने केंद्र और मोदी सरकार के खिलाफ जमकर हमला बोला। उन्होंने सारी समस्याओं का ठीकरा मोदी सरकार के सिर फोड़ा। छोटे चौधरी के आने से पहले मंच से प्रदेश सरकार के खिलाफ भाषणबाजी हो रही थी, लेकिन छोटे चौधरी ने अखिलेश सरकार को एक तरह से अभयदान ही दिया।
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उन्होंने मंच से दो साल के मोदी सरकार के कार्यकाल का जिक्र किया। भाजपा को भारतीय जुमला पार्टी बताया, लेकिन चार साल के अखिलेश सरकार के कार्यकाल का जिक्र तक नहीं किया।
किसानों की बर्बादी का जिम्मेदार भी उन्होंने केंद्र सरकार को ही ठहराया। पत्रकारों से वार्ता में भी वह अखिलेश सरकार या सपा के खिलाफ कुछ भी कहने से बचते रहे। मथुरा कांड और प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था भी छोटे चौधरी ने कुछ नहीं कहा।
वह अखिलेश सरकार का बचाव ही करते दिखे। विस चुनाव में समझौते पर उन्होेंने अपनी पार्टी की स्थिति स्पष्ट नहीं की। वह यही कहते रहे कि उनकी किसी पार्टी के किसी नेता से चुनावी गठबंधन को लेकर बात नहीं हुई है लेकिन उनके रुख से साफ नजर अ रहा था कि सपा के प्रति छोटे चौधरी का रवैया नरम है।
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इसकी बानगी यहां रालोद के सम्मेलन में भी देखने को मिली। अपने पूरे भाषण में छोटे चौधरी ने प्रदेश सरकार के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा। पत्रकार वार्ता में भी वह अखिलेश सरकार का बचाव करते रहे।
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बुधवार को यहां रालोद के अति पिछड़ा, किसान-मजदूर सम्मेलन में रालोद मुखिया अजित सिंह ने केंद्र और मोदी सरकार के खिलाफ जमकर हमला बोला। उन्होंने सारी समस्याओं का ठीकरा मोदी सरकार के सिर फोड़ा। छोटे चौधरी के आने से पहले मंच से प्रदेश सरकार के खिलाफ भाषणबाजी हो रही थी, लेकिन छोटे चौधरी ने अखिलेश सरकार को एक तरह से अभयदान ही दिया।
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उन्होंने मंच से दो साल के मोदी सरकार के कार्यकाल का जिक्र किया। भाजपा को भारतीय जुमला पार्टी बताया, लेकिन चार साल के अखिलेश सरकार के कार्यकाल का जिक्र तक नहीं किया।
किसानों की बर्बादी का जिम्मेदार भी उन्होंने केंद्र सरकार को ही ठहराया। पत्रकारों से वार्ता में भी वह अखिलेश सरकार या सपा के खिलाफ कुछ भी कहने से बचते रहे। मथुरा कांड और प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था भी छोटे चौधरी ने कुछ नहीं कहा।
वह अखिलेश सरकार का बचाव ही करते दिखे। विस चुनाव में समझौते पर उन्होेंने अपनी पार्टी की स्थिति स्पष्ट नहीं की। वह यही कहते रहे कि उनकी किसी पार्टी के किसी नेता से चुनावी गठबंधन को लेकर बात नहीं हुई है लेकिन उनके रुख से साफ नजर अ रहा था कि सपा के प्रति छोटे चौधरी का रवैया नरम है।