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नहीं मिली थी लाश: 17 साल बाद आया फैसला, हत्या के अंदेशे में अपहरण के छह आरोपी कोर्ट से बरी
Sat, 04 Apr 2026 02:22 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Sat, 04 Apr 2026 02:22 PM IST
सार
हेमा सिंह के चाचा ऊदल सिंह की ओर से दर्ज कराया गया था। जिसमें आरोप था कि 25 नवंबर 2009 की दोपहर नामजद उनके घर आए और उनके भतीजे हेमा सिंह को बाइकों पर अपने साथ ले गए। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा।
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कोर्ट
- फोटो : प्रतीकात्मक
विस्तार
अलीगढ़ में खैर के गांव बरका से 17 वर्ष पहले युवक हेमा सिंह के गायब होने के बाद हत्या के अंदेशे पर अपहरण का आरोप अदालत में साबित न हो सका और छह आरोपी बरी कर दिए गए। अपर सत्र न्यायालय ने अपहरण के बाद हत्या का कोई चश्मदीद साक्षी न होने व शव या हत्या से जुड़ा कोई साक्ष्य न बरामद होने के आधार पर यह फैसला सुनाया है। बरी किए गए आरोपियों में एक अलीगढ़ व एक नोएडा कारागार में निरुद्ध है।
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बचाव पक्ष के अनुसार यह अपराध न्यायालय के आदेश पर हेमा सिंह के चाचा ऊदल सिंह की ओर से दर्ज कराया गया था। जिसमें आरोप था कि 25 नवंबर 2009 की दोपहर नामजद उनके घर आए और उनके भतीजे हेमा सिंह को बाइकों पर अपने साथ ले गए। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। अंदेशा है कि नामजदों ने उनके भतीजे की हत्या न कर दी हो। मामले में पुलिस ने पहले गुमशुदगी तो दर्ज कर ली। मगर बाद में अपहरण दर्ज नहीं किया। इसके चलते न्यायालय की शरण ली।
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कोर्ट के आदेश पर अपराध दर्ज कर पुलिस ने विवेचना करते हुए क्रमवार गौमत खैर के छोटे, टैटीगांव खैर के ऋषि चौहान, सोफा की नगरिया के पवन, रेसरी चंडौस के रामू, विष्णु व मान सिंह को गिरफ्तार किया। पुलिस विवेचना में आरेापियों के बयानों से उजागर किया कि मान सिंह के कहने पर ऋषि व पवन ने योजना बनाकर हेमा सिंह की अगवा कर गोली मारकर हत्या की। बाद में उसके शव के टुकड़े कर शव को नहर में बहा दिया गया।
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विवेचना में यह भी उजागर हुआ कि हेमा सिंह पर पवन व ऋषि के साथ खैर थाने में हमले का एक अपराध भी दर्ज हुआ था। यह उनके साथ उठता बैठता था। इसीलिए आरोपी उसे बहाने से बुलाकर लाए थे। इसी आधार पर चार्जशीट दायर की गई। न्यायालय में सत्र परीक्षण में साक्ष्यों व गवाही में न तो यह साबित हो सका कि किसी ने आरोपियों को हेमा की हत्या करते देखा हो। न पुलिस हत्या से संबंधित कोई साक्ष्य या हेमा का कोई सामान बरामद करन साबित कर सकी। परिवार की गवाही में भी कोई साक्ष्य नहीं आया। इस आधार पर सभी आरोपियों को बरी कर दिया। बता दें कि पवन अलीगढ़ व ऋषि नोएडा जेल में निरुद्ध हैं। इनमें ऋषि पर अन्य कई अपराध दर्ज हैं।