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AMU: यूनिवर्सिटी से कब्जा मुक्त कराई 100 करोड़ की जमीन मामले की होगी एसआईटी जांच, शासन ने मांगी रिपोर्ट

Fri, 13 Feb 2026 02:08 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Fri, 13 Feb 2026 02:08 PM IST
सार

100 करोड़ रुपये मूल्य की इस बेशकीमती जमीन को 30 अप्रैल 2025 में एएमयू से कब्जा मुक्त कराए जाने के बाद अब इस मामले में शासन के प्रमुख सचिव ने एसआईटी जांच के निर्देश दिए हैं।

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SIT probe into land worth Rs 100 crore freed from AMU
एएमयू - फोटो : संवाद

विस्तार

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) और नगर निगम के बीच लंबे समय से चल रहे 41 बीघा जमीन के विवाद ने अब 10 महीने 12 दिन बाद नया मोड़ ले लिया है। करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की इस बेशकीमती जमीन को 30 अप्रैल 2025 में एएमयू से कब्जा मुक्त कराए जाने के बाद अब इस मामले में शासन के प्रमुख सचिव ने एसआईटी जांच के निर्देश दिए हैं। घटना के बाद एएमयू ने शासन में अपना पक्ष रखा था। शासन के रुख के बाद मंडलायुक्त कार्यालय ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की विस्तृत आख्या (रिपोर्ट) मांगी है, जिसे जल्द ही लखनऊ भेजा जाएगा।

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यह विवाद पिछले साल अप्रैल-मई में तब गरमाया था, जब जिला प्रशासन और नगर निगम ने 30 अप्रैल से 1 मई 2025 के बीच एक संयुक्त अभियान चलाकर नगला पटवारी और भमोला क्षेत्र में स्थित 41,050 वर्ग मीटर (लगभग 41 बीघा) जमीन को एएमयू के कब्जे से मुक्त कराया था। इसकी कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक है। यह जमीन नगला पटवारी, भमोला क्षेत्र में है। रिकॉर्ड के अनुसार, इस जमीन पर एएमयू का करीब 80 वर्षों (1945) से कब्जा था और यहां विश्वविद्यालय का राइडिंग क्लब (घुड़सवारी) संचालित होता था।

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एएमयू से मुक्त कराई गई जमीन के संबंध में एसआईटी जांच शासन के माध्यम से होनी है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर हमसे आख्या मांगी गई है। जिला प्रशासन को इस संबंध में आख्या देने के लिए कहा गया है। इसके मिलते पर इसे शासन को भेज दिया जाएगा।- अखिलेश यादव, अपर आयुक्त, प्रथम, अलीगढ़ मंडल

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फ्लाई ओवर के लिए पिलर लगाने को मांगी थी जमीन
इस जमीन का प्रकरण मार्च 2023 में तब चर्चा में आया जब प्रशासन ने सरकारी जमीनों का चिह्नांकन शुरू किया। नगला पटवारी से पुरानी चुंगी तक बनने वाले फ्लाईओवर के पिलर लगाने के लिए जब एएमयू से अनुमति मांगी गई, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी जमीन बताते हुए इनकार कर दिया। इसके बाद जब राजस्व विभाग ने जांच की, तो पता चला कि खतौनी में एएमयू का नाम ही दर्ज नहीं है और यह संपत्ति नगर निगम की है। इसके बाद एसडीएम कोल और नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर निगम का बोर्ड लगा दिया था। उस समय प्रशासन का दावा था कि एएमयू मालिकाना हक से जुड़ा कोई पुख्ता दस्तावेज पेश नहीं कर सका जबकि एएमयू का तर्क था कि यह जमीन भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 के तहत विधिवत प्राप्त की गई थी और बिना किसी पूर्व नोटिस के कार्रवाई की गई। अब एसआईटी जांच के माध्यम से यह स्पष्ट किया जाएगा कि दशकों तक सरकारी जमीन पर कब्जा कैसे रहा और इसमें किन अधिकारियों की लापरवाही रही।

एएमयू प्रशासन पर छात्र नेताओं ने लगाए थे आरोप
एएमयू के कब्जे वाली जमीन के अचानक जिला प्रशासन के कब्जे में चले जाने पर उस समय छात्र नेताओं और पूर्व छात्रों ने एएमयू प्रशासन की भूमिका को सवालों के घेरे में रखा। एएमयू प्रशासन पर आरोप लगाए थे कि वह अपनी संपत्ति का सही से रखरखाव और पैरोकारी नहीं कर सका। सही समय पर संपत्ति के दस्तावेज प्रशासनिक विवरण में दर्ज कराने थे, जो एएमयू नहीं कर सका। उस समय एएमयू प्रशासन ने कहा था कि हम अपना पक्ष अदालत में रखेंगे। शासन के समक्ष अपनी बात रखेंगे। इसके बाद एएमयू प्रशासन ने अदालत और शासन के समक्ष मामले की पैरोकारी की। जिसके बाद अब एसआईटी जांच हो रही है।
 

नगर निगम ने थपथपाई थी अपनी पीठ
नगर निगम ने उस समय कार्रवाई के बाद दावा किया था कि यह अब तक की सबसे अधिक मूल्य (एक अरब रुपये से अधिक) की जमीन कब्जा मुक्त कराई गई है। नगर निगम के इतिहास में यह सबसे बड़ी कार्रवाई बताई गई। तत्कालीन नगर आयुक्त विनोद कुमार ने कहा था कि यह कार्रवाई क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण करने वालों के लिए नजीर बनेगी।

यह है संबंधित जमीन
गाटा संख्या- क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

92 - 1.094
94 - 0.749
95/1- 0.449
95/2 - 0.737
96 - 0.495
98 - 0.081
90/1 - 0.500
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