रो-रोकर कह रहे परिजन: कानपुर में नौकरी करने की बात बता पहुंच गए पंजाब, नहीं आए वापिस, आई मौत की खबर
एंबुलेंस के जरिए अलीगढ़ और हाथरस के शवों को भेजने की व्यवस्था की है। तीन शव तीन एंबुलेंस से हरदुआगंज के सफेदपुरा गांव पहुंचेंगे।
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मुक्तसर पंजाब में पटाखा फैक्टरी में हुए हादसे में मारे गए युवकों ने परिजनों को कानपुर में काम करने की बात बता रखी थी। 30 मई दोपहर हादसे की जानकारी मिली तो उन्हें एक बार तो यकीन नहीं हुआ, वह कहते रहे उनके बेटे तो कानपुर में काम करते हैं। बाद में वह पंजाब के लिए रवाना हो गए।
सफेदपुरा निवासी मृतक दानवीर (19) के पिता बनवारी लाल को 10 - 12 वर्षों से पैरों की बीमारी है और ठीक से चल भी नहीं पाते। तीन बेटियों के बीच इकलौता बेटा दानवीर ही परिवार का सहारा था और उसी की कमाई से घर का खर्च चलता था। दो बेटियों की शादी हो चुकी है। दानवीर तीसरे नंबर का था। वह अपनी छोटी बहन आरती की शादी करने की तैयारी कर रहा था।
बनवारी लाल ने बताया कि होली के बाद दानवीर कानपुर में काम करने की बात कहकर गया था। पटाखा फैक्टरी की बात बताता तो वह उसे मना कर देते, इसलिए उसने झूठ बोला और दोस्तों के संग पंजाब चला गया। पांच दिन पहले दानवीर का फोन आया था, तब भी उसने मां संतोषी को कानपुर की एक फैक्टरी में 12 हजार मासिक वेतन पर नौकरी करने की बात बताई थी। वह बोले उनके बुढ़ापे की लाठी भी टूट गई। अब घर का खर्च कैसे चलेगा।
फैक्टरी संचालक ने रोका था वेतन, आश्वासन पर दोबारा चले गए थे दोनों भाई
इस हादसे में सफेदपुरा निवासी राहुल की भी मौत हुई है। राहुल और उसके बड़े भाई रामबहादुर दोनों वहां काम करते थे। परिजनों का आरोप है कि फैक्टरी संचालक ने इनका भुगतान रोक लिया था, जिसके बाद यह वापस लौट आए थे। भुगतान के आश्वासन पर होली पर यह फिर से पंजाब चले गए थे।
पटाखा फैक्टरी में तीन-चार साल से काम करने वाले हाथरस जनपद के गांव लिहा बाजिदपुर गांव निवासी संजय की बहन की शादी सफेदपुरा गांव में हुई है। बहन गंगा ने बताया कि ठेकेदार राजकुमार उर्फ राजू निवासी हाथरस ने संजय के भांजे रामबहादुर और उसके छोटे भाई राहुल निवासीगण सफेदपुरा को बीते साल काम करने के लिए बुलाया था, मजदूरी के करीब डेढ़ लाख रुपये रोक लिए जाने के बाद दोनों भाई पिछले साल दीपावली पर घर आ गए थे।
संजय की बहन गंगा ने बताया कि होली से पहले ठेकेदार ने पिछला पेमेंट दिलाने का भरोसा दिया था। जिसके बाद सबसे बड़ा भाई रामबहादुर होली से पहले पंजाब चला गया था। होली के बाद उससे छोटा भाई राहुल भी कानपुर में काम करने की बात कहकर निकल गया था। राहुल के पंजाब में काम करने के बारे में केवल बड़े भाई को मालूम था। तीन भाई और तीन बहनों में रामबहादुर सबसे बड़ा और राहुल दूसरे नंबर का था।
पोस्टर लगाने काम काम छोड़ पंजाब गया था नीरज
मृतक नीरज (18) पहले बचपन के दोस्त रामवीर के साथ दीवारों पर पोस्टर लगाने का काम करता था। गत 18 मई को वह इस काम को छोड़कर दानवीर के साथ पंजाब चला गया। वह भी घर कानपुर जाने की बात बताकर गया था। पिता नेत्रपाल सिंह ने बताया कि उन्हें नहीं पता था कि नीरज पंजाब में है। घर को बनाने का काम चल रहा था जिसमें नीरज ने बहुत मेहनत की थी। वह जयपुर में काम करते हैं, उन्हें नीरज के गांव में ही होने की जानकारी थी। शुक्रवार शाम छह बजे उन्हें जानकारी दी गई थी। नीरज की बहन खुशबू रो रोकर अपने भाई को याद कर रही थी।
फैक्टरी में ही रहते थे सफेदपुरा गांव के युवक
मृतक राहुल की बहन गंगा ने बताया कि बड़े भाई राम बहादुर को 12 हजार रुपए मिलते थे। उन्होंने बताया था कि रहने की व्यवस्था फैक्टरी में ही है। ऐसे में खतरे को भांपे बिना ये लोग बारूद के ढेर पर काम कर रहे थे।
जिला प्रशासन करा रहा घायलों का इलाज
इस हादसे में घायल हुए रामवीर और रामबहादुर का वहां के जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। जिला प्रशासन इनका और अन्य घायलों का इलाज करा रहे हैं। एंबुलेंस के जरिए अलीगढ़ और हाथरस के शवों को भेजने की व्यवस्था की है। तीन शव तीन एंबुलेंस से हरदुआगंज के सफेदपुरा गांव पहुंचेंगे।
रविववार तड़के तक शव पहुंचने की संभवना
इस घटना की जानकारी शुक्रवार शाम पांच बजे मृतकों के परिजनों को दी गई थी। करीब एक घंटा बाद चारों परिवार के कुल छह लोग किराए की गाड़ी लेकर पंजाब रवाना हो गए थे। जो शनिवार सुबह पांच बजे वहां पहुंचे। साढ़े पांच बजे पंजाब से अलीगढ़ के लिए रवाना कर दिया गया था।