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रामघाट रोडः एस्टीमेट पर एस्टीमेट, तो काम क्यों न हो लेट
अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Fri, 08 Sep 2017 02:15 AM IST
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बदहाल पड़ी तालानगरी की सड़क। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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दीया तले अंधेरा कहावत का साक्षात उदाहरण देखना है, तो रामघाट रोड पर पीएसी के पास सीसी रोड से हरदुआगंज बंबा तक की तीन किमी लंबी जर्जर सड़क को देख लीजिए।
यह वह सड़क है, जहां से भाजपा के शीर्ष नेताओं में शुमार राजस्थान के राज्यपाल एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह गुजरते हैं। हाल ही में अतरौली विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने प्रदेश सरकार के शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह का आना जाना रहता है तो उनसे मिलने प्रभारी मंत्री सुरेश राणा समेत समय-समय पर भाजपा की योगी सरकार के मंत्री एवं अन्य बड़े बड़े अफसर गुजरते हैं।
इस गड्ढा युक्त सड़क पर दौड़ते हुए इनकी आलीशान कारें पावरफुुल सॉकरों की वजह से भले ही ज्यादा न उछलती हो, पर डगमगाती जरूर हैं। फिर भी इनकी निगाहें इनायत न होना आश्चर्य नहीं तो क्या है।
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यह सड़क इस कदर अभिशप्त है कि इसकी दुर्दशा को न तो 100 दिन में योगी सरकार का गड्ढा मुक्त सड़क अभियान सुधार सका और न ही लोक निर्माण विभाग के एस्टीमेट। हर बार महंगाई के साथ सुरसा के मुंह की तरह बढ़ रहा एस्टीमेट छह माह में दो करोड़ तक पहुंच चुका है।
एक दर्जन बार भेजे गए रिमाइंडरों में हर बार नव निर्माण की लागत बढ़कर शासन तक पहुंच रही है लेकिन नहीं मिल सका है बजट का एक भी धेला। बताते चलें कि पीडब्लूडी अफसरों ने इस सड़क के नए सिरे से निर्माण के लिए छह माह पूर्व 1.60 करोड़ का एस्टीमेट भेजा था। यह लागत हाल ही में भेजे गए एस्टीमेट के बाद करीब दो करोड़ पहुंच गई है।
नव निर्माण आवश्यक
पीडब्लूडी के एक आला अफसर के अनुसार यह तीन किलोमीटर लंबी सड़क पूरी तरह जर्जर हो गई है। इसकी तीनों लेयर बुरी तरह उखड़ चुकी हैं। इस वजह से इसकी मरम्मत संभव नहीं है। इसे दुरुस्त कराने के लिए नव निर्माण ही एकमात्र विकल्प है।
डिवाइडर निर्माण ने निकाला रहा-सहा दम
तालसपुर से हरदुआगंज तक की गड्ढायुक्त सड़क की हालत तो जर्जर है। लेकिन हाल ही में हुए डिवाइडर निर्माण ने रही सही कसर पूरी कर दी है। डिवाइडर निर्माण के दौरान हुई टूटफूट से यह सड़क भयावह रूप में आ गई है। जो रोजाना यहां से गुजरने वाले हजारों वाहनों को नुकसान पहुंचाने के साथ तमाम दुर्घटनाओं का सबब बनते हुए मृत्यु दूत के रूप में राहगीर एवं वाहन स्वामियों के आंख की किरकिरी बनी हुई है।
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यह वह सड़क है, जहां से भाजपा के शीर्ष नेताओं में शुमार राजस्थान के राज्यपाल एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह गुजरते हैं। हाल ही में अतरौली विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने प्रदेश सरकार के शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह का आना जाना रहता है तो उनसे मिलने प्रभारी मंत्री सुरेश राणा समेत समय-समय पर भाजपा की योगी सरकार के मंत्री एवं अन्य बड़े बड़े अफसर गुजरते हैं।
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इस गड्ढा युक्त सड़क पर दौड़ते हुए इनकी आलीशान कारें पावरफुुल सॉकरों की वजह से भले ही ज्यादा न उछलती हो, पर डगमगाती जरूर हैं। फिर भी इनकी निगाहें इनायत न होना आश्चर्य नहीं तो क्या है।
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यह सड़क इस कदर अभिशप्त है कि इसकी दुर्दशा को न तो 100 दिन में योगी सरकार का गड्ढा मुक्त सड़क अभियान सुधार सका और न ही लोक निर्माण विभाग के एस्टीमेट। हर बार महंगाई के साथ सुरसा के मुंह की तरह बढ़ रहा एस्टीमेट छह माह में दो करोड़ तक पहुंच चुका है।
एक दर्जन बार भेजे गए रिमाइंडरों में हर बार नव निर्माण की लागत बढ़कर शासन तक पहुंच रही है लेकिन नहीं मिल सका है बजट का एक भी धेला। बताते चलें कि पीडब्लूडी अफसरों ने इस सड़क के नए सिरे से निर्माण के लिए छह माह पूर्व 1.60 करोड़ का एस्टीमेट भेजा था। यह लागत हाल ही में भेजे गए एस्टीमेट के बाद करीब दो करोड़ पहुंच गई है।
नव निर्माण आवश्यक
पीडब्लूडी के एक आला अफसर के अनुसार यह तीन किलोमीटर लंबी सड़क पूरी तरह जर्जर हो गई है। इसकी तीनों लेयर बुरी तरह उखड़ चुकी हैं। इस वजह से इसकी मरम्मत संभव नहीं है। इसे दुरुस्त कराने के लिए नव निर्माण ही एकमात्र विकल्प है।
डिवाइडर निर्माण ने निकाला रहा-सहा दम
तालसपुर से हरदुआगंज तक की गड्ढायुक्त सड़क की हालत तो जर्जर है। लेकिन हाल ही में हुए डिवाइडर निर्माण ने रही सही कसर पूरी कर दी है। डिवाइडर निर्माण के दौरान हुई टूटफूट से यह सड़क भयावह रूप में आ गई है। जो रोजाना यहां से गुजरने वाले हजारों वाहनों को नुकसान पहुंचाने के साथ तमाम दुर्घटनाओं का सबब बनते हुए मृत्यु दूत के रूप में राहगीर एवं वाहन स्वामियों के आंख की किरकिरी बनी हुई है।