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खेल-खेल में कुरान, हदीस-सलात की कहानियां

Wed, 08 Jun 2016 01:35 AM IST
आशीष निगम
आशीष निगम Updated Wed, 08 Jun 2016 01:35 AM IST
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Playfully Quran , Hadith - salat Stories
कुरान - फोटो : रुपेश
पाक कुरान, हदीस और सलात की धार्मिक घटनाएं, कुछ प्रेरणादायक रोचक कहानियां और घटनाक्रम बच्चों को सुनाएं जाएं तो शायद कभी मन लगे या कभी ना लगे। लेकिन अगर यही कहानियां एक खेल की शक्ल में समझाईं जाएं तो यकीनन उन्हें ताउम्र इसकी यादें ताजा रहेंगी। जी हां, रमजान के मुकद्दस मौके पर ऐसी ही कुछ छोटी-छोटी कहानियों के गेम बाजार में आ गए हैं।
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जिन्हें बच्चे बहुत खुशी के साथ खेलते हैं और इस्लाम की कुछ खास रवायतों से रूबरू भी होते हैं। छोटी सी उम्र में ही इन बच्चों को कुरान-ए-पाक, हदीस और सलात की कहानियों को समझने का मौका भी मिलता है। दोदपुर स्थित दारूल किताब एंड इस्लामिक स्टोर में ‘कुरान स्टोरीज फार लिटिल हार्टस’, ‘ऐ फन वे टू लर्न एबाउट द हदीस’, ‘द सलात स्टोरीज विद का गेम्स’ तीनों गेम का सेट मौजूद है। स्टोर मालिक आसिफ जफर कहते हैं 150 रुपये से 1200 रुपये तक की कीमत में अलग अलग कई तरह के गेम्स हैं जो बच्चों को खास पसंद आते हैं। इनसे बच्चों को तालीम भी मिलती है। गेम्स में कुछ छोटे छोटे खानों की मदद से कहानियों को पूरा कर खेला जाता है।
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इसी तरह से बाजार डिजीटल कुरान रीड बाई पेन, मक्का मदीना का कलर फोटो एल्बम, अलग अलग तरह की भाषाओं में पढ़े जाने वाले कुरान, कुरान के आकर्षक उपहार सेट भी हैं। रमजान के दौरान इन सब चीजों की मांग बढ़ी है। तस्बीह, मिस्वाह दातून, टोपी, इत्र और नान अल्कोहल परफ्यूम की भी मांग बढ़ी है। 
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अम्मी और अब्बू की खुशियां मांगी
साढ़े छह साल के फहीम ने सहरी में सबसे पहले खजूर खाया और उसके बाद पानी पिया। इसके बाद उसने मनपसंद खाना खाया। फहीम ने कहा कि उसकी अम्मी शाहिदा, अब्बा नसीम, दादी आमिना खान, बड़ी बहन बुआ की लड़की मेहनाज, फूफी कुलसुम रोजा रहती हैं तो उसका मन भी रोजा रखने का हुआ था। उसने अब्बा से पूछा तो उन्होंने कहा कि अगर हिम्मत ए मर्दा तो मदद ए खुदा..। बस यही लब्ज फहीम की हिम्मत बन गए। उसने पूरे दिन रोजा किया और प्यास लगने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। बच्चे की इस हिम्मत से घर वाले भी खासे प्रभावित हुए। शाम को फहीम की पसंदगी का दस्तारखान सजा और सभी ने एक साथ सहरी की। फहीम ने बताया कि उसने अल्लाह से अम्मी और अब्बू की खुशियों की दुआ मांगी है। ईमाम ने बताया कि अब फहीम की रोजा खुशाई होगी।

मम्मी ने मनपसंद डिश बनाई
सातवीं में पढ़ रही जैनब इल्मा ने बताया कि सुबह की सहरी के बाद उसे शाम तक किसी तरह की कोई उलझन नहीं हुई। पानी भी पीने की इच्छा नहीं हुई लेकिन शाम को पौने छह बजे के बाद कुछ उलझन हुई तो मम्मी ने कहा कि कुछ देर के लिए सहेलियों के साथ बाहर पार्क में टहल हो..। जैनब ने भी यही किया। वो पार्क में कुछ देर घूमी तो उसका ध्यान बंट गया। इसके कुछ देर बाद ही सहरी का वक्त हो गया। जैनब की मां ने उसके लिए मनपसंद चटपटे दही बड़े, ब्रेड पकौड़ा और जूस तैयार किया था। सहरी पूरी करने के बाद जैनब खुशी से झूम उठी कि उसका पहला रोजा बहुत अच्छे ढंग से पूरा हो गया। उसने अपनी दुआ में परिवार के लिए खुशियां मांगी। जैनब के अब्बा जीशान अहमद ने बताया कि उनकी अम्मी खुर्शिदा खातून, बेगम शाईस्ता, बड़ी बेटी अलीना, बेटे हमजा और उन्होंने खुद भी रोजा रखा था।
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