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अलीगढ़: पाकिस्तानी चाची-भतीजी को जल्द मिलेगी भारतीय नागरिकता, अराजकता के कारण छोड़ आईं थीं पाकिस्तान

Sat, 16 Sep 2023 03:43 AM IST
चमन शर्मा रिंकू शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
रिंकू शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sat, 16 Sep 2023 03:43 AM IST
सार

27 सितंबर 2013 को पाकिस्तान से भारत आईं सिमरन ने जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह को बताया कि पाकिस्तान में हिंदू बहन-बेटियों के साथ अत्याचार एवं अराजकता हो रही है। इन घटनाओं ने इतना भयभीत कर दिया था कि वह पाकिस्तान से सीधे अलीगढ़ में अपने बाबा-दादी के पास आ गईं।

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Pakistani aunt and niece will soon get Indian citizenship
सिमरन से बातचीत करते अलीगढ़ डीएम इंद्र विक्रम सिंह - फोटो : सूचना विभाग

विस्तार

पाकिस्तानी सिमरन और उनकी चाची बरजी बाई को जल्द भारतीय नागरिकता मिल सकती है। वर्ष 2013 से दोनों यहां पर बिना भारतीय नागरिकता के निवास कर रही हैं। दरअसल, केंद्र व प्रदेश सरकार ने बांग्लादेश, अफगानिस्तान व पाकिस्तान से आए लोगों के नागरिकता संबंधी आवेदनों में कमियों को दूर कराकर उनका जल्द निस्तारण के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को जिलाधिकारी ने अपने कार्यालय में सिमरन और बरजी बाई को शपथ दिलाई और नागरिकता से जुड़ी फाइल शासन को भेज दी है। 

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डीएम से नागरिकता पर बात करते सिमरन और परिजन
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इसलिए छोड़ा पाकिस्तान
पश्चिमी पाकिस्तान के बलूचिस्तान में वर्ष 1953 में जन्मे एवं वर्तमान में नई बस्ती, थाना बन्नादेवी निवासी रमेशलाल ने बताया कि उनकी पत्नी लाजवंती पाकिस्तान के सिंध इलाके की रहने वाली हैं। उनका विवाह वर्ष 1972 में हुआ था। वहां भी वह किराना की दुकान चलाते थे। उस समय बलूचिस्तान में अराजकता का माहौल था। हिंदू परिवारों को बेहद कष्टदायक हालात में रहना पड़ रहा था। इसको लेकर वर्ष 2005 में वहां के नवाब की हत्या के बाद रोजाना बमबारी और अराजकता से घबराकर उन्होंने वर्ष 1968 से अलीगढ़ में रहकर किराना का काम करने वाले अपने भाई बच्चाराम से संपर्क किया और उन्हीं की प्रेरणा से 2005 में अलीगढ़ आ गए। 
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यहां उन्होंने हाथरस अड्डे, मदार गेट जैन मंदिर के पास पूजा जनरल स्टोर के नाम से दुकान खोली जो आज भी चल रही है। रमेशलाल ने बताया कि पाकिस्तानी नागरिक होने के नाते वह और उनका परिवार एलटीवी यानि लांग टर्म वीजा के जरिये अलीगढ़ में रह रहा था। रमेशलाल ने बताया कि उन्होंने अपना, पत्नी लाजवंती, पुत्र कैलाश, बेटी पूजा की नागरिकता के लिए वर्ष 2015 में आवेदन किया था। रमेशलाल का एक बेटा हरेशलाल वर्तमान में बलूचिस्तान में ही रह रहा है। जबकि एक अन्य बेटा शंकरलाल एवं बहू वर्जनाबाई वर्ष 2013 में अलीगढ़ आ गए थे। उन्होंने भी नागरिकता के लिए आवेदन किया है। 

भारतीय नागरिकता के लिए ऑनलाइन आवेदन 

पाकिस्तान से आकर अलीगढ़ शहर के अलग-अलग स्थानों पर रहने वाली बरजी बाई उर्फ ज्योति पत्नी शंकर लाल एवं सिमरन कुमारी पुत्री हरीशलाल ने भारतीय नागरिकता के लिए ऑनलाइन आवेदन कर रखा है। अभी यह आवेदन प्रदेश स्तर पर अटके हुए हैं। इनकी जांच में खामियां मिली हैं। इसको लेकर शासन ने पाकिस्तानी नागरिकों के आवेदन में जो कमियां थीं उन्हें तत्काल दूर कराते हुए रिपोर्ट मांगी थी। इनके अलावा, शहर में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के कई नागरिकों ने भी भारतीय नागरिकता पाने के लिए आवेदन कर रखा है। फिलहाल, वह लांग टर्म वीजा पर रह रहे हैं। 

एएमयू से बीडीएस की पढ़ाई कर रही हैं सिमरन  
27 सितंबर 2013 को पाकिस्तान से भारत आईं सिमरन ने जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह को बताया कि पाकिस्तान में हिंदू बहन-बेटियों के साथ अत्याचार एवं अराजकता हो रही है। इन घटनाओं ने इतना भयभीत कर दिया था कि वह पाकिस्तान से सीधे अलीगढ़ में अपने बाबा-दादी के पास आ गईं। भारत और पाकिस्तान के माहौल में जमीन आसमान का अंतर है। सिमरन ने बताया कि वह इस समय एएमयू से बीडीएस (बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी) की पढ़ाई कर रही हैं। भारतीय नागरिकता के लिए वर्ष 2019 में आवेदन किया था। अभी पाकिस्तान के सिंध प्रांत के जाफराबाद में माता-पिता, दो भाई एवं बुआ रह रही हैं। वह भी भारत आना चाहते हैं। इसके बाद जिलाधिकारी ने सिमरन से कागज पर उर्दू में नाम लिखवाकर उसकी शैक्षिक योग्यता को भी परखा और शाबासी भी दी। 

शहर में निवास कर रहे पाकिस्तानी नागरिकों ने नागरिकता के लिए आवेदन कर रखा है। इस संबंध में प्रदेश एवं केंद्रीय स्तर से निर्णय होना है। शासन के निर्देश के आधार पर जांच एवं आपत्तियों का निस्तारण कराकर संशोधित जानकारी एवं भारतीय नागरिकता देने की संस्तुति के साथ विस्तृत रिपोर्ट भेजी जा रही है। उम्मीद है कि जल्द सिमरन एवं उसकी चाची बरजी बाई की नागरिकता पर निर्णय ले लिया जाएगा।  - इंद्र विक्रम सिंह, जिलाधिकारी

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