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RTE: एडमिशन नहीं देने पर 191 निजी स्कूलों को नोटिस, दिए सात दिन, वरना भारी जुर्माना-कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
Sat, 04 Jul 2026 03:52 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Sat, 04 Jul 2026 03:52 PM IST
सार
शिक्षा विभाग द्वारा जारी ऑनलाइन लॉटरी के तीन चरणों के बाद भी कई स्कूलों ने आधी से अधिक आवंटित सीटें खाली रखी हैं। जीटी रोड स्थित एक स्कूल में 31 सीटें आवंटित थीं, लेकिन सिर्फ 8 बच्चों को दाखिला मिला। वहीं, रामघाट रोड स्थित एक अन्य स्कूल ने 34 में से केवल 11 बच्चों को प्रवेश दिया।
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आरटीई (प्रतीकात्मक इमेज))
- फोटो : AI
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विस्तार
शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत जरूरतमंद बच्चों के दाखिले में आनाकानी करने वाले निजी स्कूलों पर अलीगढ़ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बीएसए आलोक सिंह ने 191 निजी स्कूलों को अंतिम चेतावनी देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
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प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि अगले 7 दिनों के भीतर बच्चों का दाखिला सुनिश्चित कर स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, तो इन स्कूलों पर भारी जुर्माना लगेगा। साथ ही उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
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शिक्षा विभाग द्वारा जारी ऑनलाइन लॉटरी के तीन चरणों के बाद भी कई स्कूलों ने आधी से अधिक आवंटित सीटें खाली रखी हैं। जीटी रोड स्थित एक स्कूल में 31 सीटें आवंटित थीं, लेकिन सिर्फ 8 बच्चों को दाखिला मिला। वहीं, रामघाट रोड स्थित एक अन्य स्कूल ने 34 में से केवल 11 बच्चों को प्रवेश दिया। प्रशासन के निर्देशों और बैठकों के बावजूद स्कूलों का यह रवैया आदेशों की अवहेलना कर रहा था। अभिभावकों की शिकायतों के बाद बीएसए कार्यालय ने इसकी पड़ताल की।
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बीएसए आलोक सिंह ने कहा कि कुछ निजी स्कूल हर साल जानबूझकर ऐसे अड़ंगे लगाते हैं। यह आरटीई अधिनियम की मूल भावना के खिलाफ है। यदि अगले 7 दिनों में ये स्कूल अपनी रिपोर्ट और संतोषजनक साक्ष्य पेश नहीं करते, तो आरटीई अधिनियम की धारा 13 के तहत कार्रवाई तय है।
स्कूलों के मनमाने बहाने
जांच में स्कूलों द्वारा कई मनमाने बहाने सामने आए। कुछ स्कूलों ने कहा कि उन्हें विभाग से कोई सूची नहीं मिली या आवेदक का नाम ऑनलाइन प्रदर्शित नहीं हो रहा। अन्य स्कूलों ने बैंक खातों का विवरण और माता-पिता का विवाह प्रमाण पत्र जैसे गैर-जरूरी कागजात मांगकर अभिभावकों को परेशान किया। खुद ही बच्चों की पात्रता जांचने के लिए उनके घरों का भौतिक सत्यापन करने पहुंच गए। एक बहाना यह भी था कि आवेदक का घर स्कूल के वार्ड में नहीं आता, इसलिए दाखिला नहीं होगा।