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मायूस होने की जरूरत नहीं, जमाना बदलेगा

Mon, 16 Oct 2017 01:30 AM IST
अमर उजाला, अलीगढ़
अमर उजाला, अलीगढ़ Updated Mon, 16 Oct 2017 01:30 AM IST
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No need to be depressed, time will change
एल्यूमनाइज मीट में मंचासीन प्रो. ताहिर महमूद, एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर व अन्य। - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. ताहिर महमूद ने दुनिया भर में फैले एएमयू के पूर्व छात्रों एवं छात्राओं से कहा कि वर्तमान हालात से किसी को मायूस होने की जरूरत नहीं है। यह वक्ती बात है, जमाना बदलेगा। 
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प्रो. महमूद रविवार को एएमयू के ऐतिहासिक कैनेडी हॉल में एएमयू के पूर्व छात्रों के सम्मेलन (एल्यूमनाई मीट) के  उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इसमें भारत सहित दुनिया के कई देशों के पूर्व छात्र शामिल हुए। सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप मामले को लेकर उन्होंने इशारे-इशारे में कहा कि सबको पता है कि एएमयू को किसने बनवाया और किसके लिए बनवाया गया। 
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1968 में उस वक्त की हुकूमत ने मुल्क की सबसे बड़ी अदालत से फैसला ले लिया कि ये मुसलमानों द्वारा कायम नहीं की गई है। यह वैसी ही बात है कि हिंदुस्तान की आजादी 1857 से लेकर 1947 तक लड़ने वाले लोगों की वजह से नहीं बल्कि ब्रिटिश पार्लियामेंट के एक्ट से मिली है। अपने संबोधन के दौरान प्रो. महमूद ने राहत इंदौरी का शेर ‘जो आज साहिबे मसनद है, कल नहीं होंगे, किराएदार हैं जाती मकान थोड़ी है, सभी का खून शामिल यहां की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़े ही हैं’ सुनाते हुए कहा कि इस हकीकत पर ईमान रखिए कि हिंदुस्तान हमारा मुल्क है। यहां किसी के एहसान से नहीं रह रहे है। जिनको जाना था, 1947 में पाकिस्तान चले गये। हम अपनी च्वॉयस से यहां रह रहे हैं। हमारे बुजुर्गों की हड्डियां दफन है इस मिट्टी में। किसकी मजाल है कि कह दे कि यह हमारा मुल्क नहीं है। उन्होंने एएमयू छात्रों का आह्वान किया कि अल्लाह, अपनी हकीकत और इस इदारे (एएमयू) के कर्ज को कभी भी मत भूलना। उन्होंने कहा कि उनकी चार पीढ़ियां एएमयू से शिक्षा ग्रहण कर चुकी है। वह स्वयं वीसी प्रो. तारिक मंसूर के वालिद के शार्गिद थे। प्रो. तारिक मंसूर के वीसी बनने से मिल्लत को बड़ी उम्मीद है। उन्होंने अपनी पुस्तकें वीसी एवं मौलाना आजाद लाइब्रेरी को भेंट की।  
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कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि यह इस महान संस्था के लिए गौरव का विषय है कि इसके पूर्व छात्र जो अमेरिका, पश्चिम देशों, मध्य पूर्व, मारीशस आदि देशों में फैले हुए हैं, आज भी अपनी संस्था से जुड़े हैं और इसकी उन्नति में योगदान भी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुहम्मडन एंग्लो ओरियंटल कॉलेज से एएमयू बनने तक के सफर में पूर्व छात्रों की अहम भूमिका रही है। दुबई ब्लू स्टार के सीईओ दाउद बिन उजैर ने अपने जीवन के अनुभवों को छात्रों के साथ बांटा। उन्होंने कहा कि उनके वालिद गणित विभाग में प्रोफेसर थे और उनकी परवरिश भी परिसर में ही हुई। 


 मिनत्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमरीश किंघे ने कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि उन्होंने स्कूल से लेकर बीटेक तक की शिक्षा इस संस्था से हासिल की है। वह आज जिस मुकाम पर पहुंचे है, उसमें एएमयू का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्हें गूगल व मिनत्रा द्वारा नौकरी आफर की गई। 2010 बैच के आईएएस अधिकारी अबु इमरान ने कहा कि सर सैयद की यह सोच थी कि धार्मिक मतभेदों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। इस मौके पर सोशल नेटवर्क वेबसाइट अलीग कनेक्ट का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर एफएस शीरानी ने किया और धन्यवाद ज्ञापन एल्यूमनाई अफेयर्स कमेटी के चेयरमैन प्रो. सुहैल साबिर ने किया।
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