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अब मुस्लिमों ने भी लगाए मकान बिकाऊ के बोर्ड
अमर उजाला/ ब्यूरो
Updated Sun, 24 Jul 2016 02:17 AM IST
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अब मुस्लिमों ने भी लगाए मकान बिकाऊ के बोर्ड
- फोटो : महीपाल सिंह
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बाबरी मंडी बजरिया के हिंदुओं द्वारा खुद के पलायन व मकान बेचने की अनुमति मांगे जाने के ऐलान के बाद अब इलाके का मुस्लिम समाज भी इसी राह पर चल पड़ा है।
शनिवार को बाबरी मंडी से सटे सराय काले खां चौक के मुस्लिम परिवारों ने खुद को असुरक्षित बताते हुए अपने मकानों पर मकान बिकाऊ के बोर्ड टांग दिए और कहा कि उन्हें इस तरह के बलवों की आड़ में हमेशा पुलिस उत्पीड़ित करती है। इसलिए अब यहां रहना बेहद मुश्किल है।
चौक के अंदर सुबह से ही इस बात को लेकर लोगों में चर्चा शुरू हो गई कि आखिर कब तक हम लोग उत्पीड़न झेलते रहेंगे। हालांकि कुछ घरों पर ताले लगे थे। यह वे घर थे, जिनमें इस बवाल के नामजद आरोपी हैं। इन मकानों समेतकुछ अन्य घरों पर मकान बिकाऊ है के बोर्ड टांग दिए गए।
यहां राशिद पहलवान, वकील खान आदि का कहना था कि हमारे घरों की बाउंड्री इतनी ऊंची हैं, कि हम वहां से बजरिया में पत्थर फेंकना तो दूर देख तक नहीं सकते। इसके बाद भी हमें आरोपी बनाया गया है। बात अगर बजरिया से अंदर आने की करें तो हमारे बच्चे महिलाएं किस तरह से दहशत के साये में रहते हैं, यह हम ही जानते हैं। जब भी विवाद होगा, पुलिस हमको परेशान करेगी। ऐसे में यहां रहना बेहद मुश्किल है।
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शनिवार को बाबरी मंडी से सटे सराय काले खां चौक के मुस्लिम परिवारों ने खुद को असुरक्षित बताते हुए अपने मकानों पर मकान बिकाऊ के बोर्ड टांग दिए और कहा कि उन्हें इस तरह के बलवों की आड़ में हमेशा पुलिस उत्पीड़ित करती है। इसलिए अब यहां रहना बेहद मुश्किल है।
चौक के अंदर सुबह से ही इस बात को लेकर लोगों में चर्चा शुरू हो गई कि आखिर कब तक हम लोग उत्पीड़न झेलते रहेंगे। हालांकि कुछ घरों पर ताले लगे थे। यह वे घर थे, जिनमें इस बवाल के नामजद आरोपी हैं। इन मकानों समेतकुछ अन्य घरों पर मकान बिकाऊ है के बोर्ड टांग दिए गए।
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यहां राशिद पहलवान, वकील खान आदि का कहना था कि हमारे घरों की बाउंड्री इतनी ऊंची हैं, कि हम वहां से बजरिया में पत्थर फेंकना तो दूर देख तक नहीं सकते। इसके बाद भी हमें आरोपी बनाया गया है। बात अगर बजरिया से अंदर आने की करें तो हमारे बच्चे महिलाएं किस तरह से दहशत के साये में रहते हैं, यह हम ही जानते हैं। जब भी विवाद होगा, पुलिस हमको परेशान करेगी। ऐसे में यहां रहना बेहद मुश्किल है।
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