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मुनीर का गुर्गा शादाब गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 11 May 2016 02:16 AM IST
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शादाब
- फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
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डीएसपी तंजील अहमद हत्याकांड के बाद से कुख्यात शार्प शूटर मुनीर के पीछे लगी एसटीएफ ने उसकी ‘किलिंग मशीन ए कंपनी’ के गुर्गे शादाब को मंगलवार को शहर से दबोच लिया। शादाब आलमगीर हत्याकांड में मुनीर के साथ-साथ फरार था और इस पर मुनीर के साथ पांच हजार का इनाम घोषित था। हालांकि शादाब को मुनीर के बारे में कोई सूचना नहीं है। फिर भी इससे मिले अन्य कनेक्शनों की मदद से टीम अब मुनीर को दबोचने में तैयारी में लग गई है।
इंस्पेक्टर सिविल लाइंस सूर्यकांत द्विवेदी के अनुसार शादाब आलम पुत्र अयूब आला निवासी अयूब नगर बिलरियागंज आजमगढ़ 18 सितंबर 2015 को एएमयू में मौलाना आजाद लाइब्रेरी के पास हुई डीएसडब्ल्यू छात्र आलमगीर की हत्या में मुनीर के साथ-साथ फरार था। तभी से उसकी तलाश थी। एसटीएफ की इकाई मुनीर को लेकर शादाब पर काम कर रही थी। इसी दौरान एसटीएफ को सूचना मिली, जिसके आधार पर घेराबंदी कर शादाब को एएमयू से सटी ठंडी सड़क से दबोच लिया गया।
पुलिस पूछताछ में शादाब ने स्वीकारा है कि वह एएमयू में प्लस टू में दाखिल हुआ था। बीकॉम द्वितीय वर्ष में रहते 2014 में आतिफ व तल्हा पर फायरिंग में निलंबित हो गया। इसके बाद वह आलमगीर हत्याकांड में उसका नाम आया तो वह मुंबई चला गया था। जहां उसने बहन के घर के अलावा अन्य रिश्तेदारियों में फरारी काटी। शादाब की मानें तो वह आलमगीर की हत्या में मौके पर नहीं था। बस मुनीर आदि से संपर्क में जरूर था। 2014 से उसकी मुनीर से मुलाकात तक नहीं हुई। शादाब के पिता दुबई में नौकरी करते हैं, जबकि एक बड़ा भाई आजमगढ़ में कपड़े का व्यापार करता है। पढ़ने-लिखने के लिए परिवार ने उसे एएमयू भेजा, मगर यहां अपराधी बनकर रह गया।
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इंस्पेक्टर सिविल लाइंस सूर्यकांत द्विवेदी के अनुसार शादाब आलम पुत्र अयूब आला निवासी अयूब नगर बिलरियागंज आजमगढ़ 18 सितंबर 2015 को एएमयू में मौलाना आजाद लाइब्रेरी के पास हुई डीएसडब्ल्यू छात्र आलमगीर की हत्या में मुनीर के साथ-साथ फरार था। तभी से उसकी तलाश थी। एसटीएफ की इकाई मुनीर को लेकर शादाब पर काम कर रही थी। इसी दौरान एसटीएफ को सूचना मिली, जिसके आधार पर घेराबंदी कर शादाब को एएमयू से सटी ठंडी सड़क से दबोच लिया गया।
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पुलिस पूछताछ में शादाब ने स्वीकारा है कि वह एएमयू में प्लस टू में दाखिल हुआ था। बीकॉम द्वितीय वर्ष में रहते 2014 में आतिफ व तल्हा पर फायरिंग में निलंबित हो गया। इसके बाद वह आलमगीर हत्याकांड में उसका नाम आया तो वह मुंबई चला गया था। जहां उसने बहन के घर के अलावा अन्य रिश्तेदारियों में फरारी काटी। शादाब की मानें तो वह आलमगीर की हत्या में मौके पर नहीं था। बस मुनीर आदि से संपर्क में जरूर था। 2014 से उसकी मुनीर से मुलाकात तक नहीं हुई। शादाब के पिता दुबई में नौकरी करते हैं, जबकि एक बड़ा भाई आजमगढ़ में कपड़े का व्यापार करता है। पढ़ने-लिखने के लिए परिवार ने उसे एएमयू भेजा, मगर यहां अपराधी बनकर रह गया।
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