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अलीगढ़ः ई-स्कूटी पर लीथियम का ब्रेक, दस हजार तक बढ़े दाम
Sat, 26 Mar 2022 08:51 PM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क,राजा तिवारी, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क,राजा तिवारी, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Sat, 26 Mar 2022 08:51 PM IST
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एक साल में लीथियम के दाम चार गुना तक बढ़ने से ई-स्कूटी करीब दस हजार रुपये महंगी हो चुकी है। अब थोक में कच्चा तेल महंगा होने से माल भाड़ा बढ़ गया है, ऐसे में ई-स्कूटी के दामों में फिर से 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। वहीं, रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से ई-वाहनों में लगने वाली लीथियम बैटरियों की आपूर्ति भी प्रभावित हो गई है। इस वजह से वाहन विक्रेता लोगों की डिमांड पूरी नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि उनके पास वाहन तो हैं लेकिन उसकी बैट्रियां नहीं हैं।
लीथियम आयन पर जारी एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक साल में लीथियम के दाम चार गुना से अधिक बढ़ गए हैं। इस वजह से पिछले एक साल में दो पहिया ई-वाहनों पर दो बार में लगभग दस हजार रुपये बढ़ चुके हैं। इसके अलावा, थोक डीजल महंगा होने से मालभाड़ा महंगा हुआ है। डीलरों का मानना है कि इससे एक लाख रुपये वाले ई-वाहन पर सीधे 14 हजार रुपये बढ़ने वाले हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। सप्लाई चेन टूटने से कुछ ब्रांडेड ई-वाहन निर्माता कंपनियों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। लीथियम बैटरी की मैन्यूफैक्चरिंग भी प्रभावित है। चूंकि, सप्लाई चेन में यूक्रेन प्रमुख रूप से शामिल था। अब युद्ध के समाप्त होने के बाद ही लीथियम सप्लाई सामान्य होने की बात कही जा रही है।
यूक्रेन इसलिए है खास
यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में लीथियम का स्रोत लीथियम ऑक्साइड 50 लाख टन मौजूद है। दुनियाभर के देशों की नजरें यूक्रेन के इस खजाने पर हैं। चीन और ऑस्ट्रेलिया के निवेशक पहले से कतार में लगे हैं। भारत में अधिकांश सप्लाई चीन से ही हो रही है। इस बाजार में चीन का दबदबा है। जानकारों के मुताबिक दुनिया में इस्तेमाल होने वाली दस में से चार लीथियम बैट्रियों का इस्तेमाल चीन में होता है। 77 फीसदी लीथियम बैटरी का उत्पादन चीन में होता है।
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- रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से लीथियम बैटरियों की सप्लाई प्रभावित है। हमारे पास ई-स्कूटी पहले तैयार होकर आ रही हैं, जबकि उनकी बैट्रियां काफी दिनों बाद आती हैं। इस वजह से लोगों की डिमांड पूरी नहीं कर पा रहे हैं। - दीपक अग्रवाल, शिव सागर ऑटोमोबाइल्स, जीटी रोड।
- एक साल में दो बार में ई-स्कूटी पर लगभग दस हजार रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि कच्चा तेल महंगा होने से अब ई-स्कूटी और महंगी होंगी। जानकारों के अनुसार प्रत्येक वाहन पर 14 प्रतिशत दाम बढ़ेंगे। एक लाख की स्कूटी पर 14 हजार रुपये बढ़ जाएंगे। -पुष्पेंद्र दौहरे, हैरी मोटर्स।
- 2030 तक लीथियम की डिमांड 40 गुना बढ़ जाएगी। यूक्रेन लीथियम सप्लाई चेन में शामिल है। यूक्रेन-रूस युद्ध की वजह से बाजार में लीथियम बैटरी की उपलब्धता पर असर पड़ा है। युद्ध समाप्त होने पर ही हालात सामान्य होने की संभावना है। -प्रो. रिहान, इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग विभाग, एएमयू।
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लीथियम आयन पर जारी एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक साल में लीथियम के दाम चार गुना से अधिक बढ़ गए हैं। इस वजह से पिछले एक साल में दो पहिया ई-वाहनों पर दो बार में लगभग दस हजार रुपये बढ़ चुके हैं। इसके अलावा, थोक डीजल महंगा होने से मालभाड़ा महंगा हुआ है। डीलरों का मानना है कि इससे एक लाख रुपये वाले ई-वाहन पर सीधे 14 हजार रुपये बढ़ने वाले हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। सप्लाई चेन टूटने से कुछ ब्रांडेड ई-वाहन निर्माता कंपनियों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। लीथियम बैटरी की मैन्यूफैक्चरिंग भी प्रभावित है। चूंकि, सप्लाई चेन में यूक्रेन प्रमुख रूप से शामिल था। अब युद्ध के समाप्त होने के बाद ही लीथियम सप्लाई सामान्य होने की बात कही जा रही है।
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यूक्रेन इसलिए है खास
यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में लीथियम का स्रोत लीथियम ऑक्साइड 50 लाख टन मौजूद है। दुनियाभर के देशों की नजरें यूक्रेन के इस खजाने पर हैं। चीन और ऑस्ट्रेलिया के निवेशक पहले से कतार में लगे हैं। भारत में अधिकांश सप्लाई चीन से ही हो रही है। इस बाजार में चीन का दबदबा है। जानकारों के मुताबिक दुनिया में इस्तेमाल होने वाली दस में से चार लीथियम बैट्रियों का इस्तेमाल चीन में होता है। 77 फीसदी लीथियम बैटरी का उत्पादन चीन में होता है।
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- रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से लीथियम बैटरियों की सप्लाई प्रभावित है। हमारे पास ई-स्कूटी पहले तैयार होकर आ रही हैं, जबकि उनकी बैट्रियां काफी दिनों बाद आती हैं। इस वजह से लोगों की डिमांड पूरी नहीं कर पा रहे हैं। - दीपक अग्रवाल, शिव सागर ऑटोमोबाइल्स, जीटी रोड।
- एक साल में दो बार में ई-स्कूटी पर लगभग दस हजार रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि कच्चा तेल महंगा होने से अब ई-स्कूटी और महंगी होंगी। जानकारों के अनुसार प्रत्येक वाहन पर 14 प्रतिशत दाम बढ़ेंगे। एक लाख की स्कूटी पर 14 हजार रुपये बढ़ जाएंगे। -पुष्पेंद्र दौहरे, हैरी मोटर्स।
- 2030 तक लीथियम की डिमांड 40 गुना बढ़ जाएगी। यूक्रेन लीथियम सप्लाई चेन में शामिल है। यूक्रेन-रूस युद्ध की वजह से बाजार में लीथियम बैटरी की उपलब्धता पर असर पड़ा है। युद्ध समाप्त होने पर ही हालात सामान्य होने की संभावना है। -प्रो. रिहान, इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग विभाग, एएमयू।