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जय जवान, देश महान, कह रहा है पूरा हिंदुस्तान
अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Fri, 30 Sep 2016 01:46 AM IST
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जय जवान, देश महान, कह रहा है पूरा हिंदुस्तान
- फोटो : Rupesh
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पाक अधिकृत कश्मीर में घुसकर भारतीय सेना ने जिस तरह आतंकी कैंपों को नेस्तनाबूद किया है, उससे जनता में हर्ष की लहर है। गुरुवार को शहर में विभिन्न संगठनों ने सेना की कार्रवाई का स्वागत करते हुए मिष्ठान वितरण किया और आतिशबाजी कर जश्न मनाया। सांसद सतीश गौतम ने सेना की कार्रवाई के लिए सरकार के हाथ मजबूत करने की अपील की है। कारगिल में शहीद हुए सैनिकों के परिजनों, पूर्व सैनिकों और सांसद आदि ने भारतीय सैन्य कार्रवाई का स्वागत किया है।
खूब चलाई आतिशबाजी, मिष्ठान बांटा
अलीगढ़। महानगर हिंदू जागरण मंच के सदस्यों ने अध्यक्ष सोनू सविता के नेतृत्व में पुराना रोडवेज बस स्टैंड पर भारी आतिशबाजी की और मिठाईयां बांट कर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। वक्ताओं ने कहा कि देश के वीर कमांडों द्वारा वीरतापूर्वक कार्रवाई कर आतंकवादी कैंपों को ध्वस्त किया गया हैं। इसमें 35 से अधिक आतंकी मारे गए हैं। यह देश के इतिहास की अविस्मरणीय घटना है। मनीष गुप्ता, विमल वार्ष्णेय, अमित राजा, योगेश वार्ष्णेय, नीरज पंडित, दीपक वार्ष्णेय, यतेंद्र वार्ष्णेय आदि मौजूद थे।
भारतीय सेना में लंबे समय तक अपनी सेवाएं दे चुके और 1971 की भारत-पाक जंग में मोर्चे पर लड़ चुके एएमयू के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) जमीरउद्दीन शाह ने भारतीय सेना की पीओके में की गई कार्रवाई को वक्त की जरूरत बताया। ‘अमर उजाला’ के साथ विशेष बातचीत के दौरान उन्होंने इस कार्रवाई का महत्व, इसके अर्थ और उपयोगिता पर बात की। साथ ही पाकिस्तान के साथ 1971 में हुए युद्ध के समय के अनुभव भी साझा किए।
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सर्जिकल स्ट्राइक पर एएमयू वीसी लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) शाह से विशेष बातचीत
अमर उजाला - पीओके में सेना ने जो सर्जिकल स्ट्राइक की है उसे आप किस तरह देखते हैं?
शाह- देखिए एलओसी पर इस तरह की कार्रवाइयां चलती रहती हैं, लेकिन ताजा कार्रवाई एक बड़ी और अहम कार्रवाई है। कोई भी स्वाभिमानी राष्ट्र ऐसा ही कदम उठाएगा, जैसा कि भारतीय सेना ने उठाया है। यह वक्त की जरूरत थी।
अमर उजाला- पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के उल्लंघन की बात संयुक्त राष्ट्र में उठा रहा है। क्या असर होगा?
शाह- वह इसको लेकर यूएन गए हैं, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता। यह एलओसी है। (नियंत्रण रेखा) यह अंतरराष्ट्रीय बार्डर है ही नहीं। न हम इसे अंतरराष्ट्रीय बार्डर मानते हैं। इसलिए दुनिया की पंचायत में उनका दावा खोखला है।
अमर उजाला- क्या पीओके में भारतीय सेना और आगे बढे़गी?
शाह- मुझे ऐसा नहीं लगता। क्योंकि जो हमारा मकसद था वह पूरा हुआ। हमने पहले ही कहा था कि हमले का समय और ठिकाना हम तय करेंगे। ऐसा ही हुआ। आतंक के कैंप तबाह कर दिए गए हैं। स्ट्राइक से हम जो संदेश आतंकी संगठनों को देना चाहते थे वह दे दिया। भारत की यह एक बड़ी सफलता है।
अमर उजाला- पाकिस्तान के साथ रणभूमि में आपका पहले भी सामना हुआ है। क्या अनुभव रहे हैं।
शाह- मैं घाटी में तो नहीं रहा लेकिन 1971 में लौंगेवाला में युद्ध में रहा। उनके टैंकों का मूवमेंट रहा। पूरी रात जागते हुए गुजरी। बाद में हमें एयर सपोर्ट मिला और दुश्मन को धूल चटा दी थी।
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खूब चलाई आतिशबाजी, मिष्ठान बांटा
अलीगढ़। महानगर हिंदू जागरण मंच के सदस्यों ने अध्यक्ष सोनू सविता के नेतृत्व में पुराना रोडवेज बस स्टैंड पर भारी आतिशबाजी की और मिठाईयां बांट कर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। वक्ताओं ने कहा कि देश के वीर कमांडों द्वारा वीरतापूर्वक कार्रवाई कर आतंकवादी कैंपों को ध्वस्त किया गया हैं। इसमें 35 से अधिक आतंकी मारे गए हैं। यह देश के इतिहास की अविस्मरणीय घटना है। मनीष गुप्ता, विमल वार्ष्णेय, अमित राजा, योगेश वार्ष्णेय, नीरज पंडित, दीपक वार्ष्णेय, यतेंद्र वार्ष्णेय आदि मौजूद थे।
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भारतीय सेना में लंबे समय तक अपनी सेवाएं दे चुके और 1971 की भारत-पाक जंग में मोर्चे पर लड़ चुके एएमयू के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) जमीरउद्दीन शाह ने भारतीय सेना की पीओके में की गई कार्रवाई को वक्त की जरूरत बताया। ‘अमर उजाला’ के साथ विशेष बातचीत के दौरान उन्होंने इस कार्रवाई का महत्व, इसके अर्थ और उपयोगिता पर बात की। साथ ही पाकिस्तान के साथ 1971 में हुए युद्ध के समय के अनुभव भी साझा किए।
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सर्जिकल स्ट्राइक पर एएमयू वीसी लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) शाह से विशेष बातचीत
अमर उजाला - पीओके में सेना ने जो सर्जिकल स्ट्राइक की है उसे आप किस तरह देखते हैं?
शाह- देखिए एलओसी पर इस तरह की कार्रवाइयां चलती रहती हैं, लेकिन ताजा कार्रवाई एक बड़ी और अहम कार्रवाई है। कोई भी स्वाभिमानी राष्ट्र ऐसा ही कदम उठाएगा, जैसा कि भारतीय सेना ने उठाया है। यह वक्त की जरूरत थी।
अमर उजाला- पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के उल्लंघन की बात संयुक्त राष्ट्र में उठा रहा है। क्या असर होगा?
शाह- वह इसको लेकर यूएन गए हैं, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता। यह एलओसी है। (नियंत्रण रेखा) यह अंतरराष्ट्रीय बार्डर है ही नहीं। न हम इसे अंतरराष्ट्रीय बार्डर मानते हैं। इसलिए दुनिया की पंचायत में उनका दावा खोखला है।
अमर उजाला- क्या पीओके में भारतीय सेना और आगे बढे़गी?
शाह- मुझे ऐसा नहीं लगता। क्योंकि जो हमारा मकसद था वह पूरा हुआ। हमने पहले ही कहा था कि हमले का समय और ठिकाना हम तय करेंगे। ऐसा ही हुआ। आतंक के कैंप तबाह कर दिए गए हैं। स्ट्राइक से हम जो संदेश आतंकी संगठनों को देना चाहते थे वह दे दिया। भारत की यह एक बड़ी सफलता है।
अमर उजाला- पाकिस्तान के साथ रणभूमि में आपका पहले भी सामना हुआ है। क्या अनुभव रहे हैं।
शाह- मैं घाटी में तो नहीं रहा लेकिन 1971 में लौंगेवाला में युद्ध में रहा। उनके टैंकों का मूवमेंट रहा। पूरी रात जागते हुए गुजरी। बाद में हमें एयर सपोर्ट मिला और दुश्मन को धूल चटा दी थी।