अयोध्या में फिर कानून तोड़े जाने की आशंकाः इरफान हबीब
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अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए शिलाएं एकत्र किए जाने से देश के इतिहासकार बेहद चिंतित हैं। उन्हें यह चिंता सता रही है कि राजनीतिक लाभ के लिए लोगों की धार्मिक भावनाएं भड़काकर एक बार फिर बाबरी मस्जिद (विवादित स्मारक) को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। इतिहासकारों ने केंद्र एवं राज्य सरकार से अयोध्या में (विवादित स्मारक) एवं कानून की रक्षा करने की मांग की है। इस आशय का प्रस्ताव पश्चिम बंगाल के मालदा में आयोजित इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस में पारित किया गया है। 76वें हिस्ट्री कांग्रेस का आयोजन 27 से 29 दिसंबर के बीच हुआ था।
इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस के उपाध्यक्ष एवं प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने बताया कि बाबरी मस्जिद का निर्माण सन् 1528 में हुआ था। यह जौनपुर के शर्की आर्किटेक्चर का इकलौता नमूना है। इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस ने 1984 में इसके संरक्षण की आवाज उठाई थी। बावजूद इसके ध्यान नहीं दिया गया और वर्ष 1992 में इसे ढहा दिया गया। जिसका पूरे देश में विरोध हुआ था। अब अयोध्या में शिलाएं जमा किए जाने से एक बार फिर कानून टूटने की आशंका है।
इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस के सचिव प्रो. इसरत आलम ने बताया कि हिस्ट्री कांग्रेस में ऐतिहासिक महत्व के स्मारकों के साथ छेड़छाड़ के विरुद्ध भी प्रस्ताव पारित किया गया। उन्होंने बताया कि सिकंदरा में अकबर की कब्र है। वहां फ्लाई ओवर बनवा दिया गया। हुमायूं के मकबरे का रेनोवेशन प्राइवेट एजेंसी से कराया गया और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के मानक का ध्यान नहीं रखा गया।
इसी तरह ताजमहल के पास शमशान गृह बन जाने से उसे नुकसान हो रहा है। चमगादड़ अजंता की कलाकृतियों को नुकसान पहुंचा रहे है। हिस्ट्री कांग्रेस में इतिहास के पाठ्यक्रमों से छेड़छाड़ एवं यूजीसी के देश के विश्वविद्यालयों के लिए एक समान पाठ्यक्रम के फैसले पर भी आपत्ति दर्ज की गई। कांग्रेस में प्रो. के पटैया, प्रो. इरफान हबीब, प्रो शिरीन मूसवी, प्रो. प्रभात पटनायक, प्रो. ए कौल (अमेरिका), प्रो. सुशील चौधरी, प्रो. इंदू बागड़, प्रो. सीपीएन सिंह, प्रो. उमेश सिंह, डॉ. गुलफिशां खान आदि शामिल हुए।