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भारत में शिक्षा के क्षेत्र में 'विश्वगुरु' के रूप में उभरने की पर्याप्त क्षमता हैः नितिन विजय
Thu, 08 Jul 2021 07:24 PM IST
प्रशांत कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Thu, 08 Jul 2021 07:24 PM IST
सार
नितिन विजय भारतीय छात्रों के आईक्यू स्तर और शिक्षा के प्रति उनके जुनून पर गर्व महसूस करते हैं। उनका मानना है कि भारतीय छात्रों के पास बेहतर वैज्ञानिक स्वभाव है और वे प्रत्यक्ष और डिजिटल बुनियादी ढांचे सहित पर्याप्त सहायता प्रदान किए जाने पर रिसर्च और इनोवेशंस के साथ दुनिया को चकित कर सकते हैं।
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नितिन विजय
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कोरोना वायरस का प्रभाव आज समूचे विश्व पर पड़ रहा है। दुनिया भर के लगभग 190 देश इसकी चपेट में आ चुके है तथा अर्थव्यवस्था बुरी तरह जूझ रही है। इस वायरस की वजह से कितने देशों में लॉकडॉउन और कफ्यू की स्थिति आ गई है। उद्योग जगत, सामाजिक आर्थिक क्षेत्र के साथ एक अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र इस वायरस से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है वो है उच्च शिक्षा का। मोशन एजुकेशन के एमडी, नितिन विजय ने कोचिंग संस्कृति पर विशेष जोर देने के साथ-साथ कोरोना प्रकोप के बाद शिक्षा क्षेत्र में बदलाव, चुनौतियों और संभावनाओं के बारे में जानकारी दी है।
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कोटा में जन्मे नितिन विजय 2003 से जेईई, एनईईटी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए युवा प्रतिभाओं को तैयार कर रहे हैं। नितिन ने अपने सपने को पूरा करने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों में नौकरियों का विकल्प छोड़कर फिजिक्स की कोचिंग देकर छात्रों की मदद करना पसंद किया।
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अब तक 2.50 लाख छात्रों ने उनकी फिजिक्स की विशेषज्ञता का लाभ उठाया है। 10 हजार से अधिक ने जेईई, एनईईटी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाई है। मोशन एजुकेशन, कोटा (राजस्थान) और 40 शहरों में 44 से अधिक फ्रेंचाइजी कार्यालय के साथ नितिन विजय और उनकी टीमें 15 से अधिक वर्षों से हजारों महत्वाकांक्षी इंजीनियरों और डॉक्टरों की सफलता की कहानी लिख रही हैं।
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नितिन विजय भारतीय छात्रों के आईक्यू स्तर और शिक्षा के प्रति उनके जुनून पर गर्व महसूस करते हैं। उनका मानना है कि भारतीय छात्रों के पास बेहतर वैज्ञानिक स्वभाव है और वे प्रत्यक्ष और डिजिटल बुनियादी ढांचे सहित पर्याप्त सहायता प्रदान किए जाने पर रिसर्च और इनोवेशंस के साथ दुनिया को चकित कर सकते हैं। उनके अनुसार, "गुणवत्तापूर्ण संस्थानों के अलावा, हमें शिक्षा के क्षेत्र में भारत को 'विश्वगुरु' बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाना चाहिए। इस दायरे में, स्व-निर्मित उद्यमी ने मायबिजकिड 8-16 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए एक अनूठा ऑनलाइन व्यवसाय सीखने का कार्यक्रम तैयार किया है।
कैसे शुरू हुआ यह सब?
नितिन विजय ने बताया, “जब मैंने एक कोचिंग संस्थान शुरू किया, तो हमारे पास पैसे नहीं थे। मैंने केवल 10,000 रुपये से शुरुआत की, जिसे मैंने अपने स्नातक के दिनों में दी जाने वाली कोचिंग से बचाया था। संस्थान को इस स्तर पर लाने के लिए कड़ी मेहनत की जरूरत थी क्योंकि कोटा में पहले से ही कई बड़े नाम थे। मैं केवल 23 वर्ष का था और आपसे अधिक उम्र का फेकल्टी होने की दिक्कत थी। मेरी कोई व्यावसायिक पृष्ठभूमि नहीं थी, और किसी ने मुझ पर भरोसा नहीं किया। लंबे समय तक काम करने की मेरी आदत रंग लाई।”
सार्वजनिक-निजी सहयोग की जरूरत
“हम प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष तैयारी कराते हैं, जिसकी आजकल बहुत आवश्यकता है। हमें यह समझना होगा कि बोर्ड परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में बहुत बड़ा अंतर है। बोर्ड परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कार्यप्रणाली और रणनीति पूरी तरह से अलग है। अब, इंडस्ट्री को हाइब्रिड मॉडल विकसित करने के लिए शिक्षा को कस्टमाइज करने की आवश्यकता है, जो इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।”
इंडस्ट्री की मदद करने वाली तकनीकी प्रगति
एआई और मशीन लर्निंग से छात्रों को उनके ऑनलाइन इनपुट और फीडबैक से उनकी कमजोरी का विश्लेषण करने में मदद मिलेगी। महामारी के दौरान सबसे अच्छी बात यह हुई कि हम यह जानने के लिए विकसित हुए हैं कि आने वाले दस वर्षों में हमें क्या करना है। प्रौद्योगिकी के साथ मानवीय हस्तक्षेप का एक आइडियल कॉम्बिनेशन भविष्य में कोचिंग उद्योग को बहुत मदद करेगा।