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Aligarh News: पीतल की कीमतों में भारी उछाल, मूर्ति और आर्टवेयर कारोबार पर दोहरी मार
Sat, 04 Apr 2026 05:46 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Sat, 04 Apr 2026 05:46 PM IST
सार
पश्चिम एशिया के हालातों ने न केवल माल भेजने में असुरक्षा पैदा की है, बल्कि लॉजिस्टिक्स का खर्च भी बढ़ा दिया है। अलीगढ़ का आर्टवेयर जो दुनिया भर के घरों की शोभा बढ़ाता था, आज महंगाई और युद्ध की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है।
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पीतल की मूर्तियां
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पहले अमेरिकी टैरिफ और अब एक महीने से पश्चिमी एशिया में संघर्ष के चलते पीतल की कीमतों में तेजी आई है। अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव ने स्थानीय कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि महज कुछ महीनों के भीतर पीतल की सिल्ली के दाम 150 से 170 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं।
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जो पीतल 15 सितंबर 2025 को 580 रुपये प्रति किलो के भाव पर था, वह 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 750 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गया है। इस बेतहाशा तेजी ने उत्पादन लागत को बुरी तरह प्रभावित किया है। अलीगढ़ से बड़े पैमाने पर पीतल के हार्डवेयर और आर्टवेयर उत्पादों का निर्यात किया जाता है। कारोबारियों का कहना है कि वे वर्तमान में दोहरी मार झेल रहे हैं। पहले अमेरिकी टैरिफ नीतियों और अब पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन बाधित हुई है। इससे निर्यात के ऑर्डर में भारी गिरावट आई है। कच्चे माल (सिल्ली) के दाम बढ़ने से पीतल की मूर्तियों और सजावटी सामानों की कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं, जिससे घरेलू बाजार में मांग कम हो गई है।
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क्या कहते हैं कारोबारी
अलीगढ़ ब्रास स्टेच्यू एंड आर्टवेयर सप्लायर एसोसिएशन के अध्यक्ष हनुमंत राव गांधी ने कहा कि पीतल के दामों में अस्थिरता के कारण नए ऑर्डर लेना मुश्किल हो गया है। मूर्ति कारोबारी मोहित कुमार का कहना है कि पीतल की मूर्तियों से लेकर अन्य उत्पाद बनाना अब काफी महंगा हो गया है। कच्चे माल के दाम जिस रफ्तार से बढ़े हैं, उस अनुपात में तैयार माल की कीमतें बढ़ाना संभव नहीं है, क्योंकि इससे ग्राहक बाजार से दूर हो रहे हैं।
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निर्यात पर ब्रेक
पश्चिम एशिया के हालातों ने न केवल माल भेजने में असुरक्षा पैदा की है, बल्कि लॉजिस्टिक्स का खर्च भी बढ़ा दिया है। अलीगढ़ का आर्टवेयर जो दुनिया भर के घरों की शोभा बढ़ाता था, आज महंगाई और युद्ध की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। कारोबारियों ने सरकार से कच्चे माल की कीमतों पर नियंत्रण और निर्यात प्रोत्साहन की मांग की है।